250 ईसाई और 32 मुस्लिम अब फिर हिंदू, सनातन धर्म में की वापसी

1966 में पड़े अकाल के दौरान भुखमरी से बचने पूर्वज बने थे ईसाई, During the famine in 1966, the ancestors became Christians to avoid starvation.

250 ईसाई और 32 मुस्लिम अब फिर हिंदू, सनातन धर्म में की वापसी

भोपाल। मध्यप्रदेश के झाबुआ में 250 ईसाई अब हिंदू हो गए हैं। इसी तरह रतलाम में 32 मुस्लिम भी सनातन धर्म में लौट आए हैं। आदिवासी बहुल झाबुआ जिले के पेटलावद क्षेत्र में 250 लोगों ने ईसाई धर्म छोड़कर सनातन धर्म में वापसी कर ली। गुलरीपाड़ा गांव के इन सनातन धर्म अपनाने वालों का कहना है कि ऐसा कर उन्होंने ईसाई बनने की 56 साल पुरानी पुरखों की भूल को सुधारा है। तब उनके पुरखे हिन्दू से ईसाई बन गए थे।

बता दें कि सनातन धर्म में वापसी की यह पहल पंडित कमल किशोर नागर के धर्म जागरण अभियान से संभव हो पाई। अप्रैल में बेकल्दा गांव में भागवत कथा हुई थी जिससे गुलरीपाड़ा में भी हिंदू धर्म को लेकर उत्साह जागा। यहां राम दरबार मंदिर का निर्माण हुआ। बुधवार को मंदिर के प्राण-प्रतिष्ठा कार्यक्रम में 250 ग्रामीण दोबारा सनातनी हो गए। वे मंदिर के सभी धार्मिक आयोजनों में भी शामिल हुए।

स्थानीय लोगों ने बताया कि 1966 में यहां जबर्दस्त अकाल पड़ा था। भुखमरी से लोग मर गए तो जिंदगी बचाने के लिए ईसाई बन गए। उस समय गांव में खासा मतांतरण हुआ था। गौरतलब है कि गुलरीपाड़ा वही गांव है, जहां 1998 में सेवाभारती के रामरथ को घुसने से रोक दिया गया था। ग्रामीण राधु वसुनिया, प्रेम वसुनिया,रुमाल सिंह डांगी, पप्पू वसुनिया सहित 250 ग्रामीणों ने पुन: सनातन धर्म अपना लिया है। इनका कहना है कि जड़ों की ओर लौटना सुखद अहसास दिला रहा है।

इधर, रतलाम जिले के आंबा गांव में मुस्लिम परिवारों के 32 लोगों ने पुन: सनातन धर्म अपना लिया। शिव मंदिर में पूजा के बाद ये सनातनी बन गए। कई पीढ़ी पहले इनके पूर्वज मुसलमान बने थे। सनातन धर्म में लौटने वाले मुस्लिमों ने शुक्रवार सुबह गांव में भीमनाथ महादेव मंदिर में पूजा-अर्चना की। सभी ने गोमूत्र से स्नान कर जनेऊ धारण किया। स्वामी आनंदगिरी महाराज की मौजूदगी में गुरुवार को उनकी घर वापसी के पहले सनातन धर्म अपनाने का शपथ पत्र भी तैयार करवाया गया।