Bhaiyyu Maharaj आत्महत्या केस में 3 दोषी करार, मॉडल से संत तक का सफर

इंदौर में 12 जून, 2018 को संत भय्यूजी महाराज ने आश्रम में गोली मारकर खुदकुशी कर ली थी। खुदकुशी के बाद प्रदेश में हड़कंप मच गया । छह महीने तक परिवार और आश्रम के लोगों को इस केस में किसी पर शक नहीं था। केस में आईओ बदलते ही नया मोड़ आया कहा गया कि भय्यूजी महाराज को ब्लैकमेल किया जा रहा था।

Bhaiyyu Maharaj आत्महत्या केस में 3 दोषी करार, मॉडल से संत तक का सफर

प्रदेश के बहुचर्चित भय्यू महाराज सुसाइड केस में 3 साल बाद फैसला आ गया है। इंदौर जिला कोर्ट के  न्यायाधीश धर्मेंद्र सोनी ने शिष्या पलक, मुख्य सेवादार विनायक, ड्राइवर शरद को दोषी ठहराते हुए तीनों को 6-6 साल कैद की सजा सुनाई है। पहले ही तीनों 1105 दिन जेल में रह चुके हैं। यानी आधी सजा पहले ही काट चुके हैं। उन्हें सिर्फ 3 साल और जेल में रहना होगा। फैसले में दर्ज बयानों में खुलासा हुआ है कि शिष्या पलक की एंट्री भय्यू महाराज की जिंदगी में बहुत पहले हो गई थी। तब पहली पत्नी भी जिंदा थी। उसकी मौत के बाद सबसे पहला शक महाराज की बहन को हुआ था लेकिन महाराज यह कहकर रह गए कि मैं फंस गया हूं। निकलना चाहता हूं। यह भी खुलासा हुआ कि पलक महाराज का बाथरूम, बेडरूम तक शेयर करती थी। 

इंदौर में 12 जून, 2018 को संत भय्यूजी महाराज ने आश्रम में गोली मारकर खुदकुशी कर ली थी। खुदकुशी के बाद प्रदेश में हड़कंप मच गया । छह महीने तक परिवार और आश्रम के लोगों को इस केस में किसी पर शक नहीं था। केस में आईओ बदलते ही नया मोड़ आया कहा गया कि भय्यूजी महाराज को ब्लैकमेल किया जा रहा था।

इस मामले में सेवादार विनायक की जमानत को लेकर आरोपी के वकील सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा भी खटखटा चुके हैं। इधर, बेटी कुहू ने फैसले पर कुछ भी कहने से अभी इनकार किया है। सुप्रीम कोर्ट में विनायक की जमानत के लिए आरोपी के वकील धर्मेंद्र गुर्जर ने एक आवेदन पेश किया गया था। जहां सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले को 6 महीने में खत्म करने की बात कही थी, लेकिन कोरोना के कारण सर्वोच्च न्यायालय ने फिर से 6 महीने का समय दिया था। इस मामले में 32 गवाह कोर्ट के समक्ष पेश किए गए। भय्यू महाराज की दूसरी पत्नी आयुषी, बेटी कुहू और बहन समेत डॉ. पवन राठी के बयान को अहम माना गया।

मॉडल से संत तक का सफर

भय्यू महाराज का वास्तविक नाम उदयसिंह देशमुख था। 1968 में मध्य प्रदेश के शुजालपुर में मध्यमवर्गीय किसान परिवार में उनका जन्म हुआ था। भय्यू महाराज ने मुंबई की बड़ी कंपनी में मैनेजमेंट कंपनी में नौकरी की, फिर मॉडलिंग की। मॉडलिंग से अपना करियर शुरू करने वाले उदयसिंह देशमुख की रूचि शुरू से ही समाजसेवा और धार्मिक कार्यों में रही। उन्होंने महाराष्ट्र की संत परंपरा के अनुसार समाजसेवा को अपनाया और अनेक सेवा प्रकल्प शुरू किए। भय्यू महाराज की राजनैतिक क्षेत्रों में अच्छी पकड़ थी। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी उनके ट्रस्ट के आयोजनों में दो बार जा चुके हैं। प्रधानमंत्री पद की शपथ के दौरान भी भय्यू महाराज दिल्ली में मौजूद थे। अन्ना हजारे का अनशन तुड़वाकर आए थे सुर्खियों में रातोंरात उनके कई हाईप्रोफाइल भक्त रहे हैं।

आत्महत्या के 6 महीने बाद हुई थी तीनों की गिरफ्तारी

जांच के दौरान तत्कालीन CSP सुरेंद्र सिंह ने कहा था कि महाराज के पास से पुलिस को एक डायरी मिली थी, जिसमें महाराज ने लिखा था कि जीवन से परेशान हूं, इसलिए जीवन छोड़ रहा हूं। इस डायरी में उन्होंने आरोपी विनायक को विश्वासपात्र बताया था। CSP सुरेंद्र सिंह ने यह भी स्वीकारा था कि मामले में जांच के तहत कुछ लोगों के बयान दर्ज किए थे। इनमें से किसी ने भी आरोपियों पर शक नहीं जताया था। आत्महत्या वाली घटना के 6 महीने बाद पुलिस ने विनायक, शरद और पलक को आरोपी बनाते हुए गिरफ्तार किया था। घटना के 6 महीने तक किसी पर भी कोई आरोप नहीं लगा था।

डेढ लाख रुपये महीना देते थे महाराज, ढाई लाख मांग रही थी

बयानों में यह बात भी सामने आई थी कि महाराज आरोपित पलक को डेढ लाख रुपये महीना भिजवाते थे। पलक के पिता ने गुरु पूर्णिमा पर चंदे की फर्जी रसीदों के जरिए लोगों से वसूली की थी। यह बात जब महाराज को पता चली थी तो उन्होंने इसका विरोध किया और पलक को फोन लगाया कि मैं तुम्हें इतना पैसा भिजवा रहा हूं फिर भी तुम्हारे पिता ऐसी हरकत कर रहे हैं। इस पर पलक ने कहा था कि मेरे पिता अब ऐसा नहीं करेंगे लेकिन तुम्हें अब ढाई लाख रुपये भिजवाना होंगे।

सबसे आखिरी में हुए दूसरी पत्नी आयुषी के बयान

पूरे मामले में भय्यू महाराज की दूसरी पत्नी आयुषी ने कोर्ट के समक्ष पेश होने के लिए कई बार अलग-अलग दलीलें पेश की थीं। आरोपी पक्ष द्वारा सबसे लंबा क्रॉस एग्जामिनेशन आयुषी का किया गया था। एक बार तो आयुषी कोर्ट में बयान देते वक्त रो भी पड़ी थी। जिला न्यायालय में बचाव पक्ष के गवाह ने अपने बयान दर्ज कराए थे। जिसमें सेवादार प्रवीण ने कोर्ट के सामने कहा था कि घटना के 1 महीने पहले भी भय्यू महाराज अपने आप को गोली मारने की कोशिश कर चुके थे, लेकिन सेवादार ने बंदूक छिपा दी थी। जिसके बाद उनकी दूसरी पत्नी आयुषी ने फोन पर ये जानकारी मांगी कि बंदूक कहां छुपाई है। सेवादार प्रवीण घाड़गे ने आयुषी को कहा था कि यदि वह बंदूक महाराज को दे देंगे, तो वह कोई गलत कदम उठा सकते हैं, लेकिन आयुषी ने सेवादार को यह कहा था कि महाराज को शहर से बाहर जाना है। उन्हें बंदूक की जरूरत है।