होम आइसोलेशन में देखभाल और उपचार की हो उत्कृष्ट व्यवस्था

मध्यप्रदेश में इंदौर में 1169, भोपाल में 572, जबलपुर में 280 तथा उज्जैन में कोरोना के 170 प्रकरण सामने आये हैं।  मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बुधवार को मंत्रालय में कोरोना नियंत्रण एवं उपचार की व्यवस्थाओं की समीक्षा की इस दौरान उन्होंने कहा कि तीसरी लहर में प्रदेश में कोरोना के 14 हजार 413 मरीजों में से अधिकांश 13 हजार 862 मरीज होम आइसोलेशन में हैं। इन्हें मेडिकल किट एवं टेली कंसल्टेशन की सुविधा प्रदान की गई है।

होम आइसोलेशन में देखभाल और उपचार की हो उत्कृष्ट व्यवस्था

भोपाल। मध्यप्रदेश में इंदौर में 1169, भोपाल में 572, जबलपुर में 280 तथा उज्जैन में कोरोना के 170 प्रकरण सामने आये हैं।  मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बुधवार को मंत्रालय में कोरोना नियंत्रण एवं उपचार की व्यवस्थाओं की समीक्षा की इस दौरान उन्होंने कहा कि तीसरी लहर में प्रदेश में कोरोना के 14 हजार 413 मरीजों में से अधिकांश 13 हजार 862 मरीज होम आइसोलेशन में हैं। इन्हें मेडिकल किट एवं टेली कंसल्टेशन की सुविधा प्रदान की गई है।

साथ ही हर जिले में बनाये गये कमांड एण्ड कंट्रोल सेंटर के माध्यम से प्रतिदिन कॉल कर होम आइसोलेशन में बरती जाने वाली सावधानियों के बारे में बताया जाता है। मुख्यमंत्री चौहान ने निर्देश दिये कि होम आइसोलेशन में रह रहे मरीजों की देखभाल और उपचार की उत्कृष्ट व्यवस्था सुनिश्चित की जाये। आवश्यकता पड़ने पर उन्हें तुरंत एम्बुलेंस के माध्यम से अस्पताल में भर्ती किया जाये। इस दौरान चिकित्सा शिक्षा मंत्री  विश्वास सारंग, लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. प्रभुराम चौधरी वर्चुअली शामिल हुए। मुख्य सचिव  इकबाल सिंह बैंस, अपर मुख्य सचिव स्वास्थ्य  मोहम्मद सुलेमान, आयुक्त स्वास्थ्य डॉ. सुदाम खाड़े सहित अधिकारी उपस्थित थे।

अस्पतालों में हो उपचार की पूरी व्यवस्था
मुख्यमंत्री  चौहान ने निर्देश दिये कि कोरोना के उपचार की अस्पतालों में सभी व्यवस्थाएँ हों। वर्तमान में प्रदेश में कोविड उपचार के लिये कुल 50 हजार 873 बेड्स उपलब्ध हैं। इनमें 10 हजार 55 सामान्य बिस्तर, 27 हजार 901 आॅक्सीजनयुक्त सामान्य बिस्तर तथा 12 हजार 917 एचडीयू/आईसीयू बिस्तर हैं। स्वास्थ्य मंत्री डॉ. प्रभुराम चौधरी ने बताया कि इसके अतिरिक्त प्रदेश में कोविड केयर सेंटर्स में 13 हजार 965 बिस्तर उपलब्ध हैं। कोविड के उपचार के लिये प्रदेश में 9 अस्थाई अस्पताल बनाये गये हैं, जिनमें 740 बिस्तर हैं। इनमें 437 आॅक्सीजन युक्त हैं।

कोरोना प्रोटोकॉल का पूरा पालन हो
मुख्यमंत्री  चौहान ने निर्देश दिये कि सभी जिलों में कोरोना प्रोटोकॉल का पूरा पालन सुनिश्चित किया जाये। सभी अनिवार्य रूप से मास्क लगायें, परस्पर सुरक्षित दूरी रखें, हाथ साफ रखें, सेनेटाइज करें तथा अन्य सभी सावधानियों का पालन करें।

आॅक्सीजन की पर्याप्त उपलब्धता
मुख्यमंत्री  चौहान ने कहा कि कोरोना मरीजों के उपचार के लिये अस्पतालों एवं कोविड केयर सेंटर्स में आॅक्सीजन की पर्याप्त उपलब्धता है। अस्पतालों एवं कोविड केयर सेंटर्स में 17 हजार आॅक्सीजन कंसंट्रेटर, 36 हजार 393 आॅक्सीजन सिलेण्डर्स, 190 (206 मीट्रिक टन) पीएसए प्लांट तथा निजी क्षेत्र में 60 पीएसए प्लांट हैं। प्रदेश के सभी मेडिकल कॉलेज एवं शासकीय अस्पतालों में 1847 वेंटीलेटर कोविड मरीजों के उपचार के लिये उपलब्ध हैं।                                                                     

होम आइसोलेशन किट में दी जाने वाली दवाएँ
होम आइसोलेशन में मरीजों को दी जा रही मेडिकल किट में टेबलेट अजीथ्रोमाइसिन 500 एम.जी., टेबलेट एस्कॉर्बिक एसिड (विटामिन-सी), टेबलेट सेट्रीजिन 10 एम.जी., टेबलेट मल्टीविटामिन, टेबलेट पेरासिटामॉल 500 एम.जी./650 एम.जी., टेबलेट रेनिटीडीन 150 एम.जी. एवं टेबलेट जिंक 20 एम.जी. शामिल हैं।

प्रदेश में कोरोना नियंत्रण संबंधी प्रतिबंध

प्रदेश में कोरोना संक्रमण से बचाव के लिये रात्रि 11 से प्रात: 5 बजे तक नाइट कर्फ्यू लागू किया गया।

सभी प्रकार के मेले, जिनमें जन-समूह एकत्र होता है, प्रतिबंधित हैं।

समस्त सिनेमा हॉल, मल्टीप्लेक्स थिएटर, कोचिंग क्लासेस, स्वीमिंग पूल, क्लब, स्टेडियम में केवल कोविड-19 के दोनों टीके लगाये हुए व्यक्तियों को प्रवेश की अनुमति है।

समस्त स्कूलों में कक्षा पहली से आठवीं तक बच्चे 50 प्रतिशत उपस्थिति के साथ रहेंगे।

विवाह आयोजनों में दोनों पक्षों का मिलाकर अधिकतम 250 लोग शामिल हो सकेंगे।

अंतिम संस्कार और उठावना में अधिकतम 50 व्यक्ति शामिल हो सकेंगे।

समस्त सार्वजनिक स्थानों पर मास्क का उपयोग अनिवार्य होगा।

कलेक्टर एवं सीएमएचओ को कोविड-19 रोगियों के संबंध में संशोधित निर्देश जारी
केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय से प्राप्त गाइड-लाइन्स के आधार पर कोविड-19 के रोगियों को डिस्चार्ज करने के संबंध में संशोधित दिशा-निर्देश सभी कलेक्टर्स और सीएमएचओ को दिये गये हैं। स्वास्थ्य आयुक्त डॉ. सुदाम खाड़े ने बताया कि संशोधित डिस्चार्ज नीति कोविड-19 के संशोधित प्रबंधन, प्रोटोकॉल्स, होम आइसोलेशन गाइड-लाइन और कोविड-19 स्ट्रेटजी के अनुपालन में तैयार की गई है। साथ ही तय किया गया है कि मध्यम लक्षण वाले कोविड-19 रोगियों को डेडीकेटेड कोविड-19 हेल्थ सेंटर पर भर्ती किया जाये।

जारी निर्देशों में कोविड-19 के मंद लक्षण वाले रोगी होम आइसोलेशन में रहेंगे, जिनकी नियमित रूप से निगरानी की जायेगी। रोगी के पॉजिटिव पाए जाने के सातवें दिन डिस्चार्ज किया जायेगा और यह भी सुनिश्चित किया जायेगा कि पिछले 3 दिनों में रोगी को लगातार बुखार नहीं आया है। डिस्चार्ज से पूर्व कोविड जाँच की आवश्यकता नहीं होगी।

कोविड-19 के ऐसे रोगी, जिनके लक्षणों में सुधार हो रहा है। ऑक्सीजन सेचुरेशन 93 प्रतिशत 3 दिन तक लगातार पाया जाता है और ऑक्सीजन सपोर्ट की आवश्यकता नहीं पड़ती है। साथ ही यदि कोई कोमार्बिडिटी है, परंतु उसके कारण कोई जटिलता नहीं है, उस स्थिति में ऐसे रोगियों को चिकित्सा प्रदान करने वाले मेडिकल ऑफिसर द्वारा डिस्चार्ज किया जा सकता है। डिस्चार्ज के पहले कोविड-19 की जाँच की आवश्यकता नहीं होगी।

ऐसे रोगी, जिनके लक्षणों में सुधार परिलक्षित नहीं हुआ और ऑक्सीजन की आवश्यकता निरंतर बनी रहती है, उन्हें उपचार देने वाले चिकित्सक द्वारा क्लीनिकल लक्षणों में सुधार होने, बिना ऑक्सीजन सपोर्ट के 3 दिन तक लगातार ऑक्सीजन सेचुरेशन मेंटेन रहने और कोमार्बिलिटी में जटिलता नहीं होने पर डिस्चार्ज किया जायेगा।

कोविड-19 के गंभीर रोगी, जिनमें एचआईवी पेशेंट, ट्रांसप्लांट थैरेपी और कैंसर रोगी, जो इम्यूनोकॉम्प्रोमाइज्ड सम्मिलित हैं, को डिस्चार्ज का क्राइटेरिया रोगी के क्लीनिकल सुधार और उपचार करने वाले चिकित्सक पर निर्भर करेगा।

डिस्चार्ज के बाद सभी कोविड-19 रोगी अपने स्वास्थ्य की निगरानी अगले 7 दिन तक करेंगे और मास्क पहनेंगे। डिस्चार्ज के बाद यदि रोगी को बुखार, खाँसी या श्वांस लेने में तकलीफ जैसे लक्षण उत्पन्न होते हैं और यह लक्षण लगातार बने रहते हैं, ऐसी स्थिति में रोगी को चिकित्सक से तत्काल सम्पर्क कर क्लीनिकल मार्गदर्शन लेना चाहिये। रोगी जिले के कोविड-19 कंट्रोल सेंटर की हेल्पलाइन पर सम्पर्क कर सकता है। स्वास्थ्य आयुक्त डॉ. सुदाम खाड़े ने कोविड-19 रोगियों के डिस्चार्ज संबंधी संशोधित दिशा-निर्देशों का पालन सुनिश्चित करने के लिये सभी कलेक्टर्स और सीएमएचओ को कहा है।