नए साल की इसरो की पहली सफलता: पीएसएलवी-सी52 के जरिए ईओएस-4 को भेजा अंतरिक्ष पर, साथ में गए दो और सैटेलाइट

यह प्रक्षेपण आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से पीएसएलवी-सी52 के जरिये हुआ। इसके साथ दो अन्य छोटे सैटलाइट्स को भी अंतरिक्ष में भेजा गया। लॉन्च के साथ ही लोगों ने तालियां बजाकर इसका स्वागत किया।

नए साल की इसरो की पहली सफलता: पीएसएलवी-सी52 के जरिए ईओएस-4 को भेजा अंतरिक्ष पर, साथ में गए दो और सैटेलाइट

बेंगलुरु। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन ने इस साल भी सफलताओं की सीढ़ियां चढ़नी शुरू कर दी हैं। सोमवार को इसरो ने पीएसएलवी-सी52 के जरिए सैटेलाइट ईओएस-04 को सफलतापूर्व प्रक्षेपित किया। यह प्रक्षेपण आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से पीएसएलवी-सी52 के जरिये हुआ। इसके साथ दो अन्य छोटे सैटलाइट्स को भी अंतरिक्ष में भेजा गया। लॉन्च के साथ ही लोगों ने तालियां बजाकर इसका स्वागत किया।

एजेंसी के मुताबिक इसरो ने सोमवार की सुबह पीएसएलवी-सी52 मिशन के तहत 3 सैटेलाइट लॉन्च किए हैं। इसमें से एक एडर-04 रडार इमेजिंग है, जिसे कृषि, वानिकी और वृक्षारोपण, मिट्टी की नमी और जल विज्ञान और बाढ़ और मौसम की स्थितियों के संबंध में हाई रेजोलूशन फोटोज भेजने के लिए डिजाइन किया गया है।

रडार इमेजिंग एडर-04 के साथ दो सैटेलाइट लांच
इस मिशन के तहत रडार इमेजिंग एडर-04 को अंतरिक्ष में भेजा गया है। 1,710 किलो वजनी ईओएस-04, अंतरिक्ष में 529 किलोमीटर के सूर्य समकालिक ध्रुवीय कक्षा में चक्कर लगाएगा। इसरो ने बताया कि ईओएस-04 राडार इमेजिंग सैटेलाइट है। इसका इस्तेमाल पृथ्वी की उच्च गुणवत्ता वाली तस्वीरें लेने में होगा। इनसे कृषि, वानिकी, पौधरोपण, मिट्टी में नमी, पानी उपलब्धता और बाढ़ ग्रस्त इलाकों के नक्शा को तैयार करने में मदद मिलेगी। इसके अलावा दो अन्य सैटेलाइट को भी अंतरिक्ष में भेजा गया है।

पीएसएलवी की 54वीं उड़ान
यह पीएसएलवी की 54वीं उड़ान है और 6 पीएसओएस-एक्सएल (स्ट्रैप-आॅन मोटर्स) के साथ पीएसएलवी-एक्सएल कॉन्फिगरेशन का इस्तेमाल करते हुए 23वां मिशन है। इसरो ने बताया कि भारत के ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण यान पीएसएलवी-सी52 ने आज सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र, श्रीहरिकोटा से 06:17 बजे पृथ्वी अवलोकन उपग्रह ईओएस-04 को 529 किमी ऊंचाई पर की एक इच्छित सूर्य-तुल्यकालिक ध्रुवीय कक्षा में इंजेक्ट किया।

क्या काम करेगा यह सैटलाइट
पीएसएलवी-सी 52 के माध्यम से जिस उपग्रह ईओएस-04 को धरती की कक्षा में भेजा गया है वह धरती पर नजर रखने का काम करनेगा। इसके अलावा दो छोटे-छोटे ध्रुवीय उपग्रहों को भी अंतरिक्ष में भेजा गया है। इसके लिए 25 घंटे और 30 मिनट की उल्टी गिनती की गई। ईओएस-04 एक रडार इमेजिंग सैटलाइट है जिसका काम कृषि, वृक्षापोपण, मिट्टी की नमी, बाढ़ मानचित्र, जल विज्ञान और मौसम विज्ञान संबंधी जानकारियां भेजना है।

यह दो उपग्रह भी साथ भेजे गए
इंस्पायर सेट-1: यह उपग्रह भारतीय अंतरिक्ष विज्ञान तकनीक संस्थान ने कोलोराडो विश्विद्यालय के अंतरिक्ष भौतिक शास्त्र व वायुमंडलीय प्रयोगशाला के साथ तैयार किया है।
आईएनएस-2टीडी : साथ प्रक्षेपित होने वाला यह दूसरा उपग्रह इसरो का ही है। इसे भारत व भूटान के संयुक्त उपग्रह आईएनएस-2वी के पहले विकसित कर भेजा गया है।

इसरो के मुताबिक पृथ्वी अवलोकन सैटेलाइट ईओएस-04 के साथ ही दो छोटे सैटेलाइट को भी पीएसएलवी-सी52 रॉकेट से सफलतापूर्वक लॉन्च किया गया है। ये सैटेलाइट अपनी कक्षा में स्थापित हो गए हैं।

इसरो इस साल के शुरूआती तीन महीनों के अंदर पांच लॉन्चिंग की तैयारी में है. पहली तो ईओएस-4 होगी. इसके बाद पीएसएलवी-सी53 पर ओशनसैट-3और आईएनएस-2बी मार्च में लॉन्च किया जाएगा। अप्रैल में एसएसएलवी-डी1 माइक्रोसैट की लॉन्चिंग होगी. हालांकि किसी भी लॉन्चिंग की तय तारीख आखिरी वक्त तक बदली जा सकती है. क्योंकि किसी भी लॉन्च से पहले कई तरह के मानकों को देखना होता है।