कोरोना काल में तैयार आइसोलेशन कोच को पुन: मूल स्वरूप ‘यात्री बोगी’ में लाने की तैयारी

भोपाल रेल मंडल ने करीब 60 कोचों को कोरोना में बनाया था मोबाइल आइसोलेशन कोच, Bhopal Railway Division had made about 60 coaches in Corona as mobile isolation coach

कोरोना काल में तैयार आइसोलेशन कोच को पुन: मूल स्वरूप ‘यात्री बोगी’ में लाने की तैयारी

भोपाल। कोरोना संक्रमण से लड़ने के लिए भोपाल रेल मंडल ने जिन कोचों को अस्पताल के आइसोलेशन वार्ड में तब्दील किया था उन्हें अब दोबारा यात्री बोगी में बदला जाएगा। यह प्रक्रिया मई के पहले सप्ताह से शुरू कर दी जाएगी। भोपाल रेल मंडल ने 60 कोच में वार्ड बनाए थे। इनमें कोरोना संक्रमित मरीज को भर्ती करने के संसाधनों का इंतजाम किया था। जैसे आक्सीजन सिलेंडर, दवा रूम, पानी बोतल, सोने के लिए बिस्तर, डस्टबिन आदि का इंतजाम किया था।

कोरोना की पहली लहर में तो इनकी जरुरत नहीं पड़ी लेकिन दूसरी लहर में इन कोचों को भोपाल रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म-छह की ओर खड़ा किया था। इनमें कोरोना संक्रमितों को भर्ती भी किया था। करीब एक माह तक 70 से अधिक कोरोना मरीजों का इलाज किया जाता रहा था। इसके पहले और बाद इनके उपयोग की जरुरत नहीं पड़ी थी।

रेलवे बोर्ड के एक अधिकारी ने बताया कि ये सभी मंडलों में ये कोच खड़े हुए हैं, इनका कोई उपयोग नहीं हो रहा है। आने वाले समय में उपयोग की जरुरत भी नहीं पड़ेगी, क्योंकि सभी राज्यों ने अस्पतालों का पर्याप्त इंतजाम कर लिया हैं उनमें बिस्तरों की संख्या बढ़ाई है। जिसे देखते हुए कहा गया है कि मोबाइल आइसोलेशन कोचों का प्रत्येक मंडल अपनी जरुरत के मुताबिक उपयोग कर सकते हैं।

कोचों के इस तरह उपयोग की संभावना
जिन कोचों को मोबाइल आइसोलेशन कोच में बदला था उनमें से ज्यादातर काफी दिनों से उपयोग में नहीं लिए जा रहे थे तो कुछ कोचों को ओवर हालिंग के लिए लाया गया था। ऐसे कोचों को माल परिवहन कोच में बदला जा सकता है।

दिल्ली भेजे गए थे कोच
जब दिल्ली में कोरोना बेकाबू हो गया था तब भोपाल से मोबाइल आइसोलेशन कोच दिल्ली भेजे गए थे। तब दो रैक भेजे गए थे। इनमें से एक रैक झांसी से लौटाकर जबलपुर भेजा गया था। इन्हें लौटाने की वजह इनके अंदर आक्सीजन सिलेंडरों का नहीं होना था। जबलपुर से कोचों में आक्सीजन सिलेंडरों का इंतजाम किया गया था। तब इन्हें पुन: दिल्ली के लिए रवाना किया था। दिल्ली में कोरोना मरीजों को इन कोचों के अंदर भर्ती किया गया था।