भू-माफियाओं को झटका: सतना कलेक्टर ने चित्रकूट की 20 एकड़ जमीन के क्रय-विक्रय पर लगाई रोक

सरकारी से निजी स्वत्व में दर्ज कर दी गई थी आराजियां, Arazis were registered from government to private ownership

भू-माफियाओं को झटका: सतना कलेक्टर ने चित्रकूट की 20 एकड़ जमीन के क्रय-विक्रय पर लगाई रोक

सतना। कलेक्टर व जिला मजिस्ट्रेट अनुराग वर्मा ने चित्रकूट की 20 एकड़ जमीन के क्रय-विक्रय पर रोक लगाते हुए पूर्व में पारित आदेश स्थगित कर दिए हैं। एक आवेदन पर विचारण के दौरान कलेक्टर ने पाया कि उक्त जमीन पूर्व में सरकारी से निजी स्वत्व में दर्ज कर दी गई थी। कलेक्टर के इस आदेश ने चित्रकूट क्षेत्र में सक्रिय भू-माफियाओं को बड़ा झटका दिया है।

जानकारी के मुताबिक कलेक्टर सतना अनुराग वर्मा ने चित्रकूट के पटवारी हल्का रजौला की आराजी नंबर 102 और उसके बटांको में दर्ज 20 एकड़ भूमि की खरीद-बिक्री प्रतिबंधित कर दी है। इस मामले में आमजन चित्रकूट की तरफ से कलेक्टर कोर्ट में आवेदन पेश कर जमीनों के सरकारी से निजी स्वत्व में दर्ज किए जाने की शिकायत की गई थी। इसके पूर्व भी कलेक्टर ने इसी मूल आराजी नंबर 102 के बटांक 102/1/8 के 8 एकड़ रकबे के क्रय-विक्रय पर रोक लगाई थी।

4 आदेशों पर स्थगन 
चित्रकूट की आम जनता की तरफ से प्रस्तुत आवेदन पर विचारण के दौरान कलेक्टर ने पाया कि सही तथ्यों को छिपा कर कुछ लोगों ने न्यायालय को गुमराह किया है और गलत तरीके से लाभ प्राप्त किया है। इससे शासकीय आराजी खुर्द बुर्द हुई हैं। लिहाजा कलेक्टर ने शासकीय से निजी स्वत्व में दर्ज हुई भूमियों के सम्बंध में पूर्व कलेक्टर के ओर से जारी 4 आदेशों पर स्थगन देते हुए जमीन के क्रय-विक्रय पर रोक लगा दी।

इनके नाम दर्ज हो गई थी जमीनें
राम स्वरूप पिता गोला यादव निवासी बन्दरकोल कर्वी ने आराजी नंबर 102/1/3 के 3.237 हेक्टेयर, रामपाल पिता रामआसरे ने 102/1/2 के रकबा 0.809 हेक्टेयर,श्यामलाल पिता गोला अहीर ने आराजी नंबर 102/1/9 के रकबा 3.236 हेक्टेयर पर दावा किया था। इसी तरह खिलौना पिता रामखेलावन प्रजापति ने आराजी नंबर 102/1/7 के रकबा 0.809 हेक्टेयर पर दावा करते हुए कलेक्टर न्यायालय में निगरानी दायर की थी। गत 17 फरवरी 2021 की इन सभी के पक्ष में कलेक्टर न्यायालय ने फैसला सुनाया था। ये आराजियां शासकीय से इन सभी के नाम निजी स्वत्व में दर्ज हो गई थीं। जबकि मूल आराजी जुलाई 2006 में कलेक्टर न्यायालय के आदेश पर शासकीय दर्ज की गई थी।