इंदौर पुलिस की दरियादिली: रात में फूड डिलीवरी बॉय को साइकिल पर देख टीआई ने दिला दी नई बाइक

इंदौर पुलिस की दरियादिली: रात में फूड डिलीवरी बॉय को साइकिल पर देख टीआई ने दिला दी नई बाइक

टीआई विजय नगर ने डिलीवरी बॉय की मदद कर पेश की नेकी की मिशाल

इंदौर। मध्य प्रदेश के इंदौर शहर की पुलिस ने एक युवक की मदद कर नेकी की मिसाल पेश की है। एक युवक अपने परिवार को पानल-पोषण करने के लिए देर रात तक साइकल से फूड डिलीवरी करता था। एक रात जोमैटो डिलीवरी बॉय साइकल पर जाता हुआ एक टीआई को दिखाई दिया। फिर क्या था, टीआई ने मन ही मन उस युवक की मदद करने संकल्प ले लिया। उन्होंने थाने के स्टाफ के साथ मिलकर एक दिन की सैलरी इकट्ठा की और उस रकम से टीआई ने डिलीवरी बॉय को एक नई बाइक गिफ्ट कर दी। डिलीवरी बॉय इतना खुश हुआ कि बाइक से डिलीवरी करने के बाद रात को थाने पहुंचा। उसने बताया कि पहले दिन उसने हजार रुपए कमाए हैं।

हम बात कर रहे हैं इंदौर के विजय नगर थाना प्रभारी तहजीब काजी की, जिन्होंने अपने स्टाफ के साथ मिलकर एक जरूरतमंद युवक की मदद कर नेकी की मिशाल पेश की है। टीआई तहजीब काजी ने बताया कि वे कुछ दिनों पहले गश्त पर थे। इसी दौरान उन्होंने साइकिल से एक फूड डिलीवरी बॉय को देखा। वह बहुत जल्दी में था। काजी ने उसे रोक लिया। डिलीवरी बॉय ने कहा कि उसे फूड डिलीवर करना है। उसे देरी हो रही है, यह कहते हुए युवक अपनी साइकल से डिलीवरी करने निकल गया। युवक को यूं देर रात साइकल से फूड डिलीवरी करते देख उनका दिल पसीज गया। उस वक्त उन्होंने युवक की मदद करने की ठान ली। उन्होंने युवक की परेशानी दूर करने के लिए अपने थाने के स्टाफ की मदद से एक दिन की सैलरी जुटाई। इसके बाद जमा हुए 32 हजार रुपए का डाउन पेमेंट जमा कर डिलीवरी बॉय को नई बाइक दिला दी।

एक दिन का भी खर्च नहीं निकल पाता था

टीआई काजी ने बताया कि, मालवी नगर में रहने वाला जय हल्दे निवासी (18) जोमैटो में फूड डिलीवरी बॉय का काम करता है। साइकिल से कई बार खाना लेट पहुंचाने के कारण उसे ग्राहकों से डांट भी सुननी पड़ती थी। घर में मां और छोटा भाई है। साइकिल से डिलीवरी करने पर दिन भर में 300-400 रुपए ही कमा पाता है। इससे घर का खर्च पूरा नहीं हो पाता। पिता 2 सालों से मजदूरी करने नासिक गए हैं। जय ने दसवीं तक पढ़ाई की है। वह जनता क्वार्टर के पिंक फ्लावर स्कूल में पढ़ता था। एक्सीडेंट में हाथ टूटने के बाद स्कूल जाना बंद हो गया। आर्थिक हालत ठीक नहीं होने के कारण वह आगे नहीं पढ़ पाया। अभी वह अपने छोटे भाई को पढ़ा रहा है। जो पांचवी क्लास में है।

थाने से फोन आया तो डर गया
जय हल्दे ने बताया कि रविवार दोपहर उसके पास विजय नगर थाने से फोन आया। उसे थाने बुलाया गया था। यह सुनते ही वह डर गया। मां ने कहा कि कुछ गलत तो नहीं किया है। जय किसी तरह हिम्मत जुटा कर थाने पहुंचा तो डर के कारण साइकिल भी थाने के बाहर ही खड़ी कर दी। तब टीआई तहजीब काजी  ने उससे कहा तुम्हें एक नई बाइक दिला देते हैं। किस्त जमा कर पाओगे? जय ने भी खुद्दारी दिखाई। उसने टीआई से कहा कि आप बस डाउन पेमेंट कीजिए। बाकी का पैसा मैं खुद कमाकर जमा कर दूंगा। पुलिसकर्मियों ने ऐसा ही किया। जय ने कहा कि अब मैं गाड़ी से ज्यादा डिलीवरी कर सकता हूं तो आगे की किस्त मैं खुद जमा करूंगा।

पहले ही दिन एक हजार रुपए कमाए
जय को नई बाइक मिलने के बाद वह सीधे फूड डिलीवरी करने निकल गया। देर रात डिलीवरी खत्म होने के बाद वह फिर थाने पहुंचा और टीआई तहजीब काजी से जाकर मिला। जय ने उन्हें बताया कि उसने शाम 5 से रात 12 बजे तक 1 हजार रुपए कमा लिए हैं।