रायसेन शिव मंदिर का नहीं खुला ताला, न हुआ जलाभिषेक, उमा भारती बोली-जब तक ताला नहीं खुलेगा, अन्न त्याग रही हूं

ताला खुला तो पूरे देश के संरक्षित स्मारकों को खोलने की मांग शुरू हो जाएगी, If the lock is opened, the demand for opening the protected monuments of the whole country will start.

रायसेन शिव मंदिर का नहीं खुला ताला, न हुआ जलाभिषेक, उमा भारती बोली-जब तक ताला नहीं खुलेगा, अन्न त्याग रही हूं

भोपाल। पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती आज रायसेन किले के सोमनाथ मंदिर पहुंचीं। जहां पर जिला प्रशासन को सूचना देने के बाद भी शिव मंदिर का ताला नहीं खोला गया। इस कारण उमा भारती जलाभिषेक नहीं कर पाई। इस पर उन्होंने कहा- हम मंदिर का ताला खुलवाना चाहते हैं, तोड़ना नहीं। ये ताला तो बहुत छोटा है, मेरे घूंसे से भी टूट जाएगा। जब तक ताला नहीं खुलेगा, अन्न त्याग कर रही हूं। 

ज्ञात हो कि चार दिन पहले पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती ने रायसेन किले में स्थित सोमनाथ मंदिर में जलाभिषेक की घोषणा की थी। उमा भारती ने ट्वीट में कहा था- मान्यता है कि नवरात्रि के बाद के पहले सोमवार को शिवजी का अभिषेक करना चाहिए। 11 अप्रैल को गंगोत्री से लाए हुए गंगाजल से रायसेन के सोमेश्वर धाम में गंगाजल चढ़ाऊंगी। राजा पूरणमल, उनकी पत्नी रत्नावली, दोनों बेटे व बेटी और सैनिकों का तर्पण करूंगी। अपनी अज्ञानता के लिए क्षमा मांगूंगी।

मंदिर का ताला खोलना आसान नहीं,
शिवमहापुराण कथावाचक पंडित प्रदीप मिश्रा ने रायसेन के जिस शिव मंदिर का जिक्र व्यासपीठ से किया था, उसका ताला इतनी आसानी से नहीं खुल पाएगा। क्योंकि, इसका ताला खुलता है, तो पूरे देश पर असर पड़ेगा। इसके बाद देश की तमाम संरक्षित स्मारकों को खोलने की मांग शुरू हो जाएगी। इसका खुलासा आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया के नियमों की पड़ताल में हुआ है। यहां का नियम ऐसा है कि पूर्व सीएम उमा भारती मंदिर के अंदर जाकर जलार्पण करना चाहें, तो भी नहीं कर सकतीं।

एक रिटायर्ड अफसर की माने तो रायसेन किले के शिव मंदिर का ताला खुलने का असर विश्व प्रसिद्ध आगरा के ताजमहल, दिल्ली के कुतुब मीनार जैसे अन्य धार्मिक स्मारकों पर भी पड़ेगा। जहां अभी किसी भी तरह की धार्मिक गतिविधियां करने पर प्रतिबंध है। ऐसे में देश में अन्य जगहों से भी धार्मिक आयोजन करने की मांग उठने लगेगी।

कलेक्टर को प्रस्ताव बनाकर विभाग को भेजना होगा
भक्तों के दर्शन के लिए रायसेन फोर्ट स्थित शिव मंदिर का ताला खोलने के लिए जिला कलेक्टर को इसका प्रस्ताव प्रदेश के संस्कृति विभाग को भेजना होगा। यहां से यह प्रस्ताव आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया के डीजी को भेजा जाएगा। जहां इस प्रस्ताव को एएम एंड एएसआर एक्ट 1957 (द एंसिएंट मोन्यूमेंट्स एंड आर्कियोलॉजिकल साइट्स एंड रिमेन्स) की कसौटियों पर जांचने के बाद फैसला होगा।

केंद्र सरकार को एक्ट में संशोधन करना पड़ेगा
एएसआई के रिटायर्ड अफसर ने बताया कि रायसेन किले में स्थित शिव मंदिर का ताला खोलने के लिए एएम एंड एएसआर एक्ट 1957 में संशोधन करना पड़ेगा। इसके बाद एक्ट में संशोधन का प्रस्ताव संसद में रखा जाएगा। यहां एक्ट में संशोधन का प्रस्ताव पारित होने पर शिव मंदिर का ताला खोले जाने की कार्रवाई शुरू होगी।

एएसआई की कस्टडी में आने के पहले जो एक्टिविटी होती 
एएम एंड एएसआर एक्ट 1957 के नियमों के अनुसार संरक्षित स्थल पर उन्हीं गतिविधियों की अनुमति होती है, जो संरक्षित स्थल के अरक के हैंडओवर होने के पहले होती थी। इससे अलग कोई भी एक्टिविटी संबंधित संरक्षित स्थल पर एक्ट के अनुसार नहीं की जा सकती।

मंदिर सर्वेक्षण रिपोर्ट में शामिल नहीं किले का शिव मंदिर
अरक की मंदिर सर्वेक्षण परियोजना में रायसेन किले में स्थित शिव मंदिर शामिल नहीं है। यह खुलासा अरक की मंदिर सर्वेक्षण प्रोजेक्ट की रिपोर्ट में हुआ है। इसमें भोजपुर के शिव मंदिर और सांची में बने पांच बौद्ध मंदिरों के होने की जानकारी दी गई है, जबकि अरक के इस प्रोजेक्ट में प्रदेश के 100 मंदिर शामिल हैं।