चैत्र नवरात्रि? जाने कलश स्थापना का समय व पूजा-अर्चना का विधी-विधान

शुभ फल प्राप्ति के लिए ध्यान रखे जरूरी बातें, नवरात्रि शुरू होने से पहले घर ले आएं पूजन सामग्री

चैत्र नवरात्रि? जाने कलश स्थापना का समय व पूजा-अर्चना का विधी-विधान

नवरात्रि के नौ दिनों में मां दुर्गा के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा-अर्चना की जाती है। मां दुर्गा को सुख-समृद्धि और धन की देवी कहा जाता है। नवरात्रि के दौरान मां दुर्गा की विधि-विधान से पूजा की जाती है। मान्यता है कि नवरात्रि में मां दुर्गा की पूजा-अर्चना करने वाले भक्तों पर माता रानी की कृपा रहती है। हिंदू पंचांग के अनुसार, चैत्र नवरात्रि चैत्र मास की शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से शुरू होती है। चैत्र नवरात्रि इस साल 2 अप्रैल 2022 से शुरू हो रहा है, जिसका समापन 11 अप्रैल 2022 को होगा। जानिए इस साल चैत्र नवरात्रि में माता रानी के पूजन में कौन-कौन से पूजन सामग्री जमा करनी चाहिए। नवरात्रि के पहले दिन कलश स्थापना की जाती है। 

मां दुर्गा की पूजन सामग्री-
सबसे पहले आम के पत्ते, चावल, लाल कलावा, गंगा जल, चंदन, नारियल, कपूर, जौ, गुलाल, लौंग, इलायची, 5 पान, सुपारी, मिट्टी का बर्तन, फल, मिट्टी के बर्तन, श्रृंगार का सामान, आसन, कमलगट्टा आदि।

कलश स्थापना की सामग्री-
पूजा स्थल पर कलश स्थापना के लिए अनाज, मिट्टी का बर्तन, पवित्र मिट्टी, कलश, गंगाजल, आम या अशोक के पत्ते, सुपारी, जटा वाला नारियल, लाल सूत्र, मौली, इलायची, लौंग, कपूर, रोली, अक्षत, लाल कपड़ा और फूल आदि।

नवरात्रि हवन के लिए पूजा सामग्री-
पीपल का तना और छाल, बेल, नीम, पलाश, चंदन की लकड़ी, अश्वगंधा, मुलैठी की जड़, तिल, चावल, लौंग, गूलर की छाल, गाय का घी, लोभान, इलायची, शक्कर, जौ आदि।

कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त-
चैत्र नवरात्रि के पहले दिन घटस्थापना की जाएगी। घट स्थापना का शुभ मुहूर्त 02 अप्रैल को सुबह 06 बजकर 10 मिनट से 08 बजकर 29 मिनट तक रहेगा। कुल अवधि 02 घंटे 18 मिनट की है।