भूकंप के बाद ताइवान में बचाव कार्य तेज

गिराई जा रहीं क्षतिग्रस्त इमारतें

भूकंप के बाद ताइवान में बचाव कार्य तेज

नई दिल्ली । हुलिएन और पूर्वी तट के किनारे बचाव कार्य जारी है। यहां भूकंप के झटकों के कारण निचली मंजिले ढह जाने के कारण दर्जनों इमारतें धराशाई हो गए। ब्रिज और टनल नष्ट हो गए और भूस्खलन के कारण सड़के भी क्षतिग्रस्त हो गईं। ताइवान में बुधवार की सुबह 7.4  की तीव्रता से भूकंप के झटके महसूस किए गए थे। यहां 25 वर्षों में आए सबसे भीषण भूकंप में नौ लोगों की मौत हो गई, जबकि 1,038 लोग गंभीर रूप से घायल हो गए हैं। सूत्रों के अनुसार, भूकंप के कारण 52 लोग लापता भी हो गए हैं। भूकंप के कारण हुए नुकसान के बीच लापता लोगों की तलाश जारी है। पार्क या अन्य जगहों में फंसे लोगों को सुरक्षित स्थानों में भेजने के लिए बचावकर्मी ड्रोन और हेलीकॉप्टर के जरिए लोगों की तलाश कर रहे हैं। हुलिएन और पूर्वी तट के किनारे बचाव कार्य जारी है। यहां भूकंप के झटकों के कारण निचली मंजिलें ढह जाने के कारण दर्जनों इमारतें धराशायी हो गए। ब्रिज और टनल नष्ट हो गए और भूस्खलन के कारण सड़के भी क्षतिग्रस्त हो गईं। बचाल दल के कर्मी  हुलिएन शहर में क्षतिग्रस्त इमारतों को गिरा रहे हैं।

भूकंप के झटके ने ताइपे में चिंता बढ़ा दी
बुधवार को भूकंप के कारण  2.3 करोड़ की आबादी वाले देश में इमारतें झुक गईं, विद्यार्थियों को स्कूल से निकाल कर खेल के मैदान में ले जाया गया। ताइवान के भूकंप निगरानी एजेंसी के अधिकारी कम तीव्रता वाले झटके की उम्मीद कर रहे थे, जिस वजह से अधिकारियों ने अलर्ट जारी नहीं किया था। हालांकि, 7.4 की तीव्रता से भूकंप के झटके ने राजधानी ताइपे में चिंता बढ़ा दी। यहां की इमारते बुरी तरह से हिल गई थी। इसी के साथ दक्षिण जापान और फिलीपींस तक सुनामी की चेतावनी जारी कर दी गई। इस भूकंप के झटके का अनुभव शेयर करते हुए एक चिनी शिक्षक ने कहा, "मैं आॅनलाइन क्लास ले रहा था। भूकंप के झटके के कारण मैं घबरा गया। मैं 1999 के हादसे से गुजर चुका हूं। मुझे मालूम है कि वह कितना डरावना मंजर था। मैंने तुरंत अपन हेलमेट निकाला और टेबल के नीचे खाने पीने की चीजें रखने लगा कि कहीं कुछ अजीब न हो जाए।" बता दें कि इससे पहले साल 1999 में ताइवान में 7.6 की तीव्रता से भूकंप आया था, जिसमें 2,400 लोगों की मौत हो गई थी और और 10,000 से अधिक घायल हुए थे।