केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने असम में कांग्रेस पर घुसपैठियों को बढ़ावा देने का आरोप लगाया। जानें कैसे भाजपा ने राज्य की सीमाओं को सुरक्षित किया और काजीरंगा को मुक्त कराया।
मशहूर टेनिस खिलाड़ी लिएंडर पेस ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) की सदस्यता ले ली है। दिल्ली मुख्यालय पहुंचकर उन्होंने पार्टी का हाथ थामा। जानें उनके इस राजनीतिक सफर के बारे में।
नेपाल की राजनीति में बालेन शाह का उदय। जानें कैसे एक इंजीनियर और रैपर ने केपी शर्मा ओली को हराकर रचा इतिहास और रामनवमी पर ली सांसद पद की शपथ।
पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने लोकसभा में कहा कि भारत में डीजल-पेट्रोल और गैस की किल्लत नहीं है। वहीं राहुल गांधी और सुप्रिया सुले ने ईंधन संकट पर सरकार को घेरा। सदन में लगे एपस्टीन के नारे।
महाराष्ट्र में बीएमसी सहित 29 नगर निगम चुनावों में भाजपा गठबंधन ने शानदार प्रदर्शन करते हुए कई प्रमुख शहरों में जीत हासिल की है। यह जीत एकनाथ शिंदे और भाजपा गठबंधन की रणनीति का नतीजा है, जबकि ठाकरे बंधु के एक साथ आने के बावजूद शिवसेना (यूबीटी) अपना आखिरी किला नहीं बचा सकी।
जनता दल यूनाइटेड के वरिष्ठ नेता केसी त्यागी के बयानों के कारण पार्टी की जमकर किरकिरी हुई। उनका बयान आईपीएल को लेकर था। वहीं नाराज जेडीयू ने उन्हें पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया है। दरअसल, वरिष्ठ नेता केसी त्यागी का पार्टी में अध्याय अब समाप्त हो चुका है।
महाराष्ट्र की राजनीति इनदिनों चौंकाने वाली है। कभी भाजपा-कांग्रेस का गठबंधन तो कभी अवैसी की पार्टी का साथ। और अब इसी बीच एक बार फिर चाचा-भतीजा भी एक हो गए। दरअसल, एनसीपी और एनसीपी (शरद पवार) ने पुणे नगर निगम चुनाव 2026 के लिए संयुक्त घोषणापत्र जारी किया।
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) की सांसद सुप्रिया सुले ने ईवीएम के विरोध का विरोध करते हुए जो बयान दिया, उससे कांग्रेस को तो धक्का लगा ही है, स्वयं उनकी पार्टी का एजेंडा भी ध्वस्त हो गया। कहा-मैं चार बार इसी मशीन से चुनकर आई हूं। इसलिए ईवीएम या वीवीपैट पर सवाल नहीं उठाऊंगी।
सतना स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट में भ्रष्टाचार के आरोप लोकसभा तक पहुंचे। सांसद गणेश सिंह ने 943 करोड़ के कार्यों में अनियमितताओं का आरोप लगाकर थर्ड पार्टी ऑडिट की मांग की।
ऑस्ट्रेलियाई सीनेटर पॉलिन हैनसन ने संसद में बुर्का पहनकर विरोध प्रदर्शन किया, जिसके बाद उनकी धुर दक्षिणपंथी 'वन नेशन' पार्टी की लोकप्रियता 25 साल के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है। जानें इस उछाल के पीछे आर्थिक संकट, अप्रवासन नीति और विरोध प्रदर्शन का क्या प्रभाव रहा।






















