जानें 30 नवंबर 2025 (रविवार) का विस्तृत हिंदू पंचांग: तिथि, नक्षत्र (आर्द्र), योग (शुभ), शुभ-अशुभ मुहूर्त (राहुकाल), सूर्य-चंद्र उदय और संकष्टी गणेश चतुर्थी व्रत का समय।
By: Star News
Nov 30, 20251:05 AM
धर्म डेस्क. स्टार समाचार वेब
30 नवंबर 2025, रविवार का दिन, हिंदू पंचांग के अनुसार मार्गशीर्ष (अगहन) महीने के कृष्ण पक्ष की महत्वपूर्ण तिथियों और शुभ-अशुभ योगों से सुसज्जित है। यह दिन भगवान सूर्यदेव को समर्पित है और धार्मिक कार्यों, अनुष्ठानों तथा व्रत-उपवास के लिए विशेष फलदायी माना जाता है। इस दिन ग्रहों और नक्षत्रों की चाल जीवन के विभिन्न पहलुओं को प्रभावित करती है, जिसके बारे में विस्तार से नीचे दिया गया है।
| शीर्षक | विवरण |
| दिनांक | 30 नवंबर 2025 |
| दिन | रविवार (Sunday) |
| विक्रम संवत | 2082 (पिंगल नाम संवत्सर) |
| शक संवत | 1947 |
| मास (महीना) | मार्गशीर्ष (अगहन) |
| पक्ष | कृष्ण पक्ष |
तिथि: चतुर्थी।
यह तिथि सूर्योदय से लेकर अगले दिन, 01 दिसंबर को प्रातः 07 बजकर 54 मिनट तक रहेगी।
चतुर्थी के उपरांत पंचमी तिथि का आरंभ हो जाएगा।
नक्षत्र: आर्द्र (आद्रा)।
यह नक्षत्र सूर्योदय से लेकर अगले दिन, 01 दिसंबर को प्रातः 07 बजकर 52 मिनट तक प्रभावी रहेगा।
आर्द्र के बाद पुनर्वसु नक्षत्र शुरू होगा।
योग: शुभ।
यह योग प्रातः 08 बजकर 28 मिनट तक रहेगा।
इसके बाद शुक्ल योग आरंभ हो जाएगा।
करण: बालव।
बालव करण शाम 07 बजकर 20 मिनट तक रहेगा।
इसके बाद कौलव करण शुरू होगा।
सूर्योदय: प्रातः 06 बजकर 55 मिनट पर
सूर्यास्त: शाम 05 बजकर 24 मिनट पर
चंद्रोदय: रात्रि 09 बजकर 31 मिनट पर
चंद्रास्त: प्रातः 10 बजकर 25 मिनट पर (01 दिसंबर)
चंद्र राशि: मिथुन राशि में (चंद्रमा पूरे दिन और रात मिथुन राशि में ही संचार करेगा)।
सूर्य राशि: वृश्चिक राशि में।
अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 11 बजकर 48 मिनट से दोपहर 12 बजकर 30 मिनट तक। (यह दिन का सबसे शुभ समय होता है)।
अमृत काल: रात्रि 09 बजकर 31 मिनट से रात्रि 11 बजकर 19 मिनट तक।
विजय मुहूर्त: दोपहर 02 बजकर 01 मिनट से दोपहर 02 बजकर 43 मिनट तक।
गोधूलि मुहूर्त: शाम 05 बजकर 21 मिनट से शाम 05 बजकर 48 मिनट तक।
राहुकाल: शाम 04 बजकर 05 मिनट से शाम 05 बजकर 24 मिनट तक। (इस दौरान कोई भी शुभ या नया कार्य शुरू करने से बचना चाहिए)।
यमगण्ड: दोपहर 12 बजकर 11 मिनट से दोपहर 01 बजकर 30 मिनट तक।
गुलिक काल: दोपहर 02 बजकर 48 मिनट से शाम 04 बजकर 05 मिनट तक।
दुर्मुहूर्त:
शाम 04 बजकर 05 मिनट से शाम 04 बजकर 46 मिनट तक।
शाम 04 बजकर 46 मिनट से शाम 05 बजकर 24 मिनट तक।
संकष्टी गणेश चतुर्थी व्रत: इस दिन भगवान गणेश की पूजा-अर्चना की जाती है और चंद्रोदय के बाद व्रत खोला जाता है। यह व्रत दुखों को हरने वाला और मनोकामनाएं पूर्ण करने वाला माना जाता है।