मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और केंद्रीय कृषि मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने सीहोर में इकॉर्डा (शुष्क क्षेत्र में अन्तर्राष्ट्रीय कृषि अनुसंधान केन्द्र) अंतर्गत खाद्य फलिया अनुसंधान मंच के प्रशिक्षण केंद्र के साथ प्रशासकीय संकुल का शुभारंभ किया। इसके बाद मुख्यमंत्री केंद्रीय मंत्री ने परिसर में आयोजित उद्घाटन समारोह में प्रदर्शनी का अवलोकन किया।
By: Arvind Mishra
Feb 07, 20262:55 PM

भोपाल। स्टार समाचार वेब
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और केंद्रीय कृषि मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने सीहोर में इकॉर्डा (शुष्क क्षेत्र में अन्तर्राष्ट्रीय कृषि अनुसंधान केन्द्र) अंतर्गत खाद्य फलिया अनुसंधान मंच के प्रशिक्षण केंद्र के साथ प्रशासकीय संकुल का शुभारंभ किया। इसके बाद मुख्यमंत्री केंद्रीय मंत्री ने परिसर में आयोजित उद्घाटन समारोह में प्रदर्शनी का अवलोकन किया। इस अवसर पर मप्र समेत प्रमुख दलहन उत्पादक नौ राज्यों के कृषि मंत्री, वरिष्ठ अधिकारी, वैज्ञानिक और उद्योग प्रतिनिधि मौजूद रहे। सबसे पहले समारोह को संबोधित करते हुए केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने राज्य में दलहन उत्पादन को देश में नंबर बताया। साथ ही कहा कि क्षेत्रफल में कमी चिंता का विषय है, जिसे बढ़ाने के प्रयास किए जाएंगे। आईसीएआरडीए सहित अन्य अनुसंधान संस्थानों के सहयोग से उन्नत बीज विकसित किए जा रहे हैं, जो कि मौसम और बीमारियों में अनुकूल होंगे। बीज वितरण के लिए क्लस्टर विकसित किए जाएंगे और आदर्श खेती के लिए प्रति हेक्टेयर 10 हजार रुपए की सहायता भी दी जाएगी।
वहीं सम्मेलन में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि भारतीय परंपरा में अन्न और दाल का विशेष महत्व है। हमारी थाली में परोसा गया अन्न ही हमारे लिए देवतुल्य है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय कृषि मंत्री का अभिनंदन करते हुए कहा कि किसान, युवा, गरीब और नारी सशक्तिकरण के लिए निरंतर योजनाएं चलाई जा रही हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत की कृषि परंपरा प्राचीन और समृद्ध रही है। प्रदेश में स्थापित अनुसंधान केंद्र किसानों के हित में महत्वपूर्ण कार्य कर रहे हैं। आज जरूरत इस बात की है कि हम दलहन उत्पादन में आत्मनिर्भर बनें, क्योंकि देश में मांग के अनुपात में उत्पादन अभी भी चुनौती बना हुआ है। दलहन-तिलहन मिशन के अंतर्गत मध्य प्रदेश सरकार दो कदम आगे रहकर कार्य करेगी। उन्होंने बताया कि भावांतर योजना के माध्यम से किसानों को डेढ़ हजार करोड़ रुपए से अधिक राशि सीधे खातों में पहुंचाई गई।
मप्र में सिंचाई का बढ़ा करबा
सीएम ने कहा-सरकार किसानों की आय बढ़ाने और उनके जीवन स्तर में सुधार के लिए प्रतिबद्ध है। प्रदेश में सिंचाई सुविधाओं का तेजी से विस्तार किया गया है। पूर्व में जहां लगभग साढ़े सात लाख हेक्टेयर क्षेत्र सिंचित था। वहीं अब इसे बढ़ाकर 44 लाख हेक्टेयर तक पहुंचाया गया है। नदियों को जोड़ने के अभियान सहित विभिन्न परियोजनाओं के माध्यम से हर गांव तक सिंचाई सुविधा पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है।
किसानों को बनाएंगे सशक्त
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अन्य राज्यों से आए कृषि मंत्रियों से भी आग्रह किया कि भारत की कृषि उपलब्धियों को वैश्विक स्तर पर स्थापित करने के लिए सामूहिक प्रयास आवश्यक हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि केंद्र और राज्य सरकार मिलकर दलहन उत्पादन बढ़ाने तथा किसानों को सशक्त बनाने की दिशा में ठोस कदम है।
हमारे मसालों को बाजार मिलेगा
शिवराज ने कहा-एक्सपोर्ट से हम हरियाणा, पश्चिमी उत्तरप्रदेश, पंजाब में बासमती आजकल उगाते हैं। पिछले साल 63 हजार करोड़ का निर्यात किया था। 18 प्रतिशत टैरिफ से भारत के बासमती चावल को दुनिया में और बाजार मिलेगा। इस बार और निर्यात बढ़ेगा। हमारे मसालों को बाजार मिलेगा। टेक्सटाइल सेक्टर में निर्यात बढ़ेगा। कपास उत्पादकों को फायदा मिलेगा। सीहोर का शरबती गेहूं दुनिया में धूम मचाएगा, उस पर कोई आंच नहीं आएगी। आत्मनिर्भर के तहत यूरोप के 27 देश समेत अमेरिका से हमारा समझौता हुआ है। कई लोग बड़ी हाय तौबा मचा रहे थे। कोई पहाड़ टूट जाएगा, आफत आ जाएगी। हमारे यहां कोई ऐसी चीज नहीं आएगी, जो किसानों को नुकसान करे।
एमपी में लगेंगी 55 दाल मिल
मंच से ही केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने घोषणा की है कि देशभर में 1 हजार नई दाल मिले स्थापित की जाएंगी। न्यूनतम समर्थन मूल्य दोहराते हुए कहा कि तुअर 8000 रुपए प्रति क्विंटल, उड़द 7800 रुपए, चना 5875 रुपए और मसूर 7000 रुपए प्रति क्विंटल खरीदी जाएगी। दाल हमें विदेशों से मंगवाना पड़े, ये हमारे लिए आनंद का विषय नहीं, शर्म की बात हैं।
दलहन उत्पादन में एमपी नंबर-1
शिवराज ने कहा कि पिछले कुछ दिनों से देख रहे हैं कि किसान दे सोयाबीन, दे सोयाबीन, सोयाबीन और गेहूं बो रहे हैं। हमनें क्रॉप पैटर्न डिस्टर्ब कर दिया है। दालों का क्षेत्र धीरे-धीरे घटता चला गया। हालांकि, मध्पप्रदेश में आज भी दलहन के उत्पादन में देश में नंबर 1 है, लेकिन एरिया घट रहा हैं। अब हमें जरुरत है। चौहान ने कहा गांवों में सुगमता से बीजों की वैरायटी पहुंच सके, इसके लिए बीज ग्राम बनाएंगे।