मध्यप्रदेश की संस्कारधानी जलबलपुर में गरीब बच्चों के प्रवेश के नाम पर स्कूल संचालकों ने लाखों रुपए का खेला किया है। ईओडब्ल्यू की जांच में स्कूलों का घपला उजागर हो गया है। यहां शिक्षा के अधिकार को स्कूल संचालकों ने मजाक बनाकर रख दिया है। इससे प्रशासन ने भी सख्त रुख अपनाया है।
By: Arvind Mishra
Jan 17, 20261:53 PM
जबलपुर। स्टार समाचार वेब
मध्यप्रदेश की संस्कारधानी जलबलपुर में गरीब बच्चों के प्रवेश के नाम पर स्कूल संचालकों ने लाखों रुपए का खेला किया है। ईओडब्ल्यू की जांच में स्कूलों का घपला उजागर हो गया है। यहां शिक्षा के अधिकार को स्कूल संचालकों ने मजाक बनाकर रख दिया है। इससे प्रशासन ने भी सख्त रुख अपनाया है। दरअसल, जबलपुर में आरटीई के अंतर्गत गरीब बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया गया है। ईओडब्ल्यू की जांच में खुलासा हुआ है कि छह स्कूल संचालकों ने नोडल अधिकारियों के साथ मिलकर 628 फर्जी प्रवेश दिखाए और सरकार से लाखों की फीस हजम कर ली। ईओडब्ल्यू ने घोटाले का पर्दाफाश करते हुए छह स्कूल संचालकों और 5 नोडल अधिकारियों के खिलाफ केस दर्ज किया है। सभी ने एक ही छात्र का कई बार दाखिला दिखाकर सरकारी फीस प्रतिपूर्ति राशि में हेरफेर किया है।
2011 से 2016 साल तक चला घोटाला
यह घोटाला 2011 से 2016 के बीच हुआ है। ईओडब्ल्यू को शिकायत मिली थी कि कुछ स्कूल संचालक नियमों का पालन नहीं कर रहे हैं। शिक्षा के अधिकार के तहत, प्राइवेट स्कूलों को 25 फीसदी सीटें आर्थिक रूप से कमजोर और गरीबी रेखा से नीचे वाले बच्चों के लिए मुफ्त रखनी होती हैं। इसके बदले सरकार स्कूलों को फीस देती है।
प्रशासन में मचा हड़कंप
जांच में पता चला कि जबलपुर के 466 प्राइवेट स्कूलों को फीस प्रतिपूर्ति के तौर पर 3 करोड़ 27 लाख 83 हजार दिए गए थे। लेकिन, 6 स्कूलों ने 628 छात्रों का फर्जी दाखिला दिखाकर करीब 26.50 लाख रुपए का गबन किया। इस बात का खुलासा होते ही शासन-प्रशासन में बैठे जिम्मेदार अफसरों में हड़कंप मच गया।
इन पर दर्ज की गई एफआईआर
ईओडब्ल्यू ने स्मिता चिल्ड्रन एकेडमी के संचालक मनीष असाटी और नोडल अधिकारी चंद्र कोष्टा, अशासकीय आदर्श ज्ञान सागर शिक्षा शाला की संचालक नसरीन बेगम और नोडल अधिकारी गुल निगार खान, गुरू पब्लिक स्कूल के मो तौफिक और नोडल अधिकारी अख्तर बेगम, अस्मानिया मिडिल स्कूल के संचालक मो शमीम और नोडल अधिकारी राजेंद्र बुधौलिया, और सेंट अब्राहम स्कूल के संचालक मोहम्मद शफीक और नोडल अधिकारी डीके मेहता के खिलाफ धोखाधड़ी, गबन और आपराधिक साजिश जैसी धाराओं के तहत एफआईटार दर्ज की गई है।