तालिबान की बिजनेस डील

रूस से सस्ता तेल, एलपीजी और गेहूं खरीदेगी अफगान हुकूमत

तालिबान की बिजनेस डील

अफगानिस्तान की सत्ता पर कब्जा करने वाले आतंकी संगठन तालिबान ने पहली बार किसी दूसरे देश से बिजनेस डील की है। तालिबान हुकूमत ने रूस से डिस्काउंट रेट पर आॅयल, छढॠ और गेहूं खरीदने का करार किया है। तालिबान के कॉमर्स एंड इंडस्ट्री मिनिस्टर हाजी नूरद्दीन ने डील की पुष्टि कर दी है। इस मामले में खास बात यह है कि रूस समेत अब तक किसी देश ने तालिबान हुकूमत को मान्यता नहीं दी है। भारत ने मानवता के आधार पर अफगानिस्तान को 50 हजार टन गेहूं और दवाइयां भेजी हैं।

रूस ने दिया था आफर
ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, रूस ने अफगानिस्तान को कम कीमत पर आॅयल और खासकर डीजल सप्लाई का आॅफर दिया था। बाद में बात आगे बढ़ी और डील में लिक्विड पेट्रोलियम गैस के अलावा गेहूं भी शामिल किए गए। अब देखना ये होगा कि तालिबान पेमेंट किस तरह करता है, क्योंकि वो इंटरनेशनल बैंकिंग सिस्टम से बाहर है और अमेरिका ने उसके तमाम एसेट्स फ्रीज कर दिए हैं। नूरद्दीन ने डील के ऐलान के वक्त कहा- हम अपने ट्रेडिंग पार्टनर्स की तादाद बढ़ाना चाहते हैं। रूस ने हमें सस्ता तेल, गैस और गेहूं खरीदने का आॅफर दिया था। इसलिए यह डील हुई है। यूक्रेन पर हमले को लेकर रूस पहले ही अमेरिका और पश्चिमी देशों की आंखों की किरकिरी बना हुआ है। अब तालिबान से उसकी डील को लेकर उनकी नाराजगी बढ़ना तय है। पश्चिमी देशों की मांग है कि तालिबान ह्यूमन राइट्स के हालात तेजी से सुधारे। इसमें भी सबसे पहले महिलाओं को शिक्षा समेत हर क्षेत्र में बराबरी का हक दिया जाए। इसके बाद ही तालिबान हुकूमत को मान्यता देने पर विचार किया जा सकता है। इस वक्त काबुल में कुछ देशों की एम्बेसीज जरूर मौजूद हैं, लेकिन इनमें हाईलेवल डिप्लोमैट्स नहीं हैं।