बंगाल में ममता (टीएमसी) का किला भेदने में भाजपा अभी से जुट गई है। भाजपा की कवायद देखकर दिल्ली से पश्चिम बंगाल तक सियासी हलचल बढ़ गई है। भाजपा का यह निर्णय यह भी दर्शाता है कि पार्टी बंगाल को लेकर पूरी तरह गंभीर है।
By: Arvind Mishra
Jan 19, 202610:28 AM

नई दिल्ली। स्टार समाचार वेब
बंगाल में ममता (टीएमसी) का किला भेदने में भाजपा अभी से जुट गई है। भाजपा की कवायद देखकर दिल्ली से पश्चिम बंगाल तक सियासी हलचल बढ़ गई है। भाजपा का यह निर्णय यह भी दर्शाता है कि पार्टी बंगाल को लेकर पूरी तरह गंभीर है। पिछले लोकसभा और विधानसभा चुनावों में भाजपा ने राज्य में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है, लेकिन नेतृत्व का आकलन है कि निरंतर संगठनात्मक हस्तक्षेप से ही स्थायी राजनीतिक बढ़त हासिल की जा सकती है। दरअसल, भाजपा ने बंगाल विधानसभा चुनाव में बिहार मॉडल अपनाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। बिहार में संगठन से जुड़े सात प्रदेश पदाधिकारियों को बंगाल भेजा गया है। इसमें पांच को लोकसभा का प्रभारी बनाया गया है। राष्ट्रीय नेतृत्व की ओर से बंगाल के प्रभारी और बिहार के स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय के नेतृत्व में अनुभवी नेताओं को संगठनात्मक रूप से पार्टी जनाधार विस्तार के लिए लगाया गया था। इसमें मुख्य रूप से संगठन निर्माण, बूथ प्रबंधन, सामाजिक संतुलन एवं चुनावी तालमेल जैसे दायित्व भी शामिल है।
बिहार अनुभव को बंगाल में झोंका
बंगाल फतह के लिए बिहार संगठन से जुड़े पांच पार्टी पदाधिकारियों को पश्चिम बंगाल में लोकसभा प्रभारी बनाकर भेजा है। इस कदम को पार्टी की उस रणनीति के रूप में देखा जा रहा है, जिसके तहत संगठनात्मक रूप से मजबूत राज्यों के अनुभवी नेताओं को उन क्षेत्रों में जिम्मेदारी दी जा रही है, जहां पार्टी विस्तार एवं सशक्तीकरण की संभावनाएं देख रही है।
पांडेय से ‘मंगल’ की उम्मीद
भाजपा नेतृत्व का मानना है कि बिहार में संगठन निर्माण, बूथ प्रबंधन, सामाजिक संतुलन और चुनावी तालमेल का जो मॉडल विकसित हुआ है, उसका प्रभावी उपयोग बंगाल में किया जा सकता है। बंगाल में भाजपा के प्रदेश प्रभारी और बिहार के स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय द्वारा बिहार से भेजे गए पांचों पदाधिकारी लंबे समय से पार्टी संगठन से जुड़े रहे हैं।
बूथ स्तर तक प्रबंधन का जिम्मा
बंगाल में इन प्रभारी पदाधिकारियों की भूमिका केवल चुनाव प्रबंधन तक सीमित नहीं होगी। वे स्थानीय कार्यकर्ताओं के साथ नियमित संवाद, सामाजिक संगठनों से संपर्क, मतदाता समूहों की पहचान और मुद्दा आधारित अभियान को भी मजबूती देंगे। खासकर उन क्षेत्रों में, जहां भाजपा का जनाधार बढ़ा है, लेकिन संगठनात्मक ढांचे को और मजबूत करने की जरूरत है, वहां बिहार से गए प्रभारी अहम भूमिका निभाएंगे।