सेरेब्रल पाल्सी तंत्रिका तंत्र से जुड़ी एक गंभीर और दर्दनाक बीमारी है, जो गर्भावस्था के दौरान या जन्म के बाद भी हो सकती है। इस बीमारी में बच्चे का मस्तिष्क कमजोर हो जाता है, जिससे शरीर की कई नसें काम करना बंद कर देती हैं। सतना जिले के पीकू वार्ड में हर साल 100 से अधिक बच्चे इस बीमारी से पीड़ित होकर भर्ती किए जाते हैं। डॉक्टरों के अनुसार, इसका कोई स्थायी इलाज नहीं है, लेकिन फिजियोथेरेपी बच्चों के जीवन में सुधार लाने का सबसे बड़ा सहारा है।

हाइलाइट्स:
सतना, स्टार समाचार वेब
सेरेब्रल पाल्सी बीमारी तंत्रिका तंत्र संबंधी एक दर्दनाक बीमारी है, जिसमें दिमाग से ही सेंट्रल नर्वस सिस्टम कमजोर हो जाता है यानी एक तरह से शरीर की कई नसें काम करना बंद कर देती हैं, जिससे मरीज का हिलना-डुलना भी मुश्किल हो जाता है। सेरेब्रल का अर्थ दिमाग से जुड़ा है। पाल्सी का अर्थ है मांसपेशियों का इस्तेमाल करने में परेशानी या कमजोरी। अधिकतर मरीजों को पूरा जीवन व्हील चेयर पर ही बिताना पड़ता है। सेरेब्रल पाल्सी विकसित हो रहे दिमाग के डैमेज होने से हो सकता है। यह प्रेग्नेंसी के दौरान भी हो सकता है और शिशु के जन्म लेने के बाद भी। आमतौर पर 1 से 2 साल के बीच इसके लक्षण दिखाई देने शुरू होते हैं, इसलिए अधिकांश बच्चों को बाद में अपंगता की स्थिति में जीना होता है। जिला अस्पताल प्रबंधन के अनुसार हर साल 100 से अधिक सेरेब्रल पाल्सी से पीड़ित बच्चों को गंभीर मानते हुए पीकू वार्ड में भर्ती कर इलाज किया जाता है। बताया गया कि सितम्बर माह में सेरेब्रल पाल्सी से पीड़ित 9 बच्चों को गंभीर अवस्था में पीकू वार्ड में भर्ती किया गया, जिनका इलाज कर फिजिओथेरेपी की सलाह भी दी गई। इसके अलावा इन बच्चों की दिव्यांगता को देखकर इनका विकलांगता प्रमाण पत्र भी बनाया जाता है।
सेरेब्रल पाल्सी के कारण
सेरेब्रल पाल्सी के कई कारण है जो प्रेग्नेंसी के दौरान भी हो सकता है और प्रेग्नेंसी के बाद भी। यह प्रेग्नेंसी के दौरान बच्चे के ब्रेन डेवलपमेंट के समय जेनेटिक परिवर्तन के कारण भी हो सकता है और प्रेग्नेंसी के दौरान मां को हुए गंभीर संक्रमण से भी हो सकता है। अगर बच्चे के दिमाग में गर्भ के दौरान ब्रेन में खून की सप्लाई बंद होती है तो भी यह बीमारी हो सकती है। गर्भ में ब्रेन से खून निकलने के कारण भी यह हो सकता है। नवजात बच्चों में घातक संक्रमण के कारण भी यह बीमारी हो सकती है। अगर गर्भ में बच्चे के दिमाग में चोट लग जाए तो भी सेरेब्रल पाल्सी हो सकती है। इसलिए इस बीमारी के कई कारण है. ऐसे में समय पर अपने बच्चों के प्रति सतर्कता ही इससे बचाव है।
विकलांगता प्रमाण पत्र बनाने का प्रावधान
चिकित्सक ने बताया कि सेरेब्रल पाल्सी बीमारी से पीड़ित बच्चे दिव्यांगता की श्रेणी में आते हैं। ऐसे बच्चों का जिला अस्पताल में प्रत्येक मंगलवार एवं शुक्रवार को आयोजित विकलांग बोर्ड द्वारा बच्चे की अपंगता के अनुसार विकलांगता प्रमाण पत्र भी जारी किया जाता है जिससे उन विशेष बच्चों को लाभ मिल सके।
पीड़ित बच्चों को विशेष चिकित्सा देने का प्रावधान है। इस बीमारी से पीड़ित बच्चों को गंभीर मानते हुए उन्हें पीकू (पीडियाट्रिक इंटेंसिव केयर यूनिट) वार्ड में भर्ती कर उनका इलाज किया जाता है। इसके बाद उन्हें शारीरिक कसरत के लिए जिला अस्पताल के फिजियोथेरेपिस्ट के पास भेजा जाता है।
डॉ. संजीव प्रजापति ,चाइल्ड स्पेशलिस्ट व इंचार्ज पीकू वार्ड
इस बीमारी का कोई स्थाई इलाज नहीं है, लेकिन फिजियोथेरेपी सेरेब्रल पाल्सी से पीड़ित बच्चों के लिए वरदान से कम नहीं है। फिजियो की मदद से मांसपेंशियों को मजबूत करना, अंगों की अकड़न को कम करना, संतुलन और समन्वय बनाना, शारीरिक व्यायाम करना, चलने की क्षमत को बढ़ाना, बच्चों को इंडिपेंडेंट बनाने वाली प्रतिक्रिया करना, स्ट्रेचिंग, बैलेंस ट्रेनिंग आदि कराया जाता है ताकि बच्चा खुद पर निंत्रण रख सके।
डॉ. सुरभि श्रीवास्तव, पीडियाट्रिक थेरेपिस्ट


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