सतना जिले के स्वास्थ्य विभाग में हालात दिन-प्रतिदिन बिगड़ते जा रहे हैं। स्वास्थ्य आयुक्त का नया आदेश अधिकारियों में खलबली मचा रहा है। जिले के केवल तीन डॉक्टरों को ही स्वतंत्रता दिवस पर सम्मान मिला। वहीं 108 एम्बुलेंस सेवा "खटारा एक्सप्रेस" में तब्दील हो चुकी है और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) में मरीजों को सुविधाएं नहीं मिल रही हैं। बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्था पर प्रशासन मौन है।

हाइलाइट्स:
सुर्खियों में 'स्वास्थ्य आयुक्त' का पत्र
'स्वास्थ्य विभाग के दिन वैसे भी तीक नहीं चल रहे और अब 'स्वास्थ्य आयुक्त' का 'फरमान' भी जारी हो गया। 'फरमान भी ऐसा कि कई अधिकारियों की नींद उड़ गई 'चैन खो गया। वर्षों से जमे थे अब पद से हाथ धोने' को बारी जोगई। प्रचारी प्रशासनिक अधिकारियों की बनी-बनाई साख पे बहा लगना अब लाजमी है। अधिकारियों के 'हक से खाना-पानी तक नहीं उतर रहा। बस एक ही बेचैनी दिन-रात खाये जा रही है की अब आगे क्या होगा? किससे पूहूं, जवाब आखिर कौन देगा? दूसरी तरफ स्वास्थ्य विभाग के बड़े साहय' भी अपनी 'लिस्ट' खोजने में लगे हैं कि 'जिला अस्पताल' से लेकर 'सीएमएचओ ऑफिस' तक कितने चिकित्सक प्रशासकीय प्रचार में हैं, किनका 'अटैचमेंट' खामकर किनसे 'क्लीनिकल कार्य कराना है। बस अब उस 'पड़ी' का इंतजार है जब 'बड़े साहब' की 'चिट्ठी जारी होगी और बड़ी-बड़ी जगहों में कुछ खोटे-छोटे नाम नजर आएंगे और शायद ये कई लम्बे अर्से बाद हो।
'जिले' के केवल तीन डॉक्टर ही 'काबिल'
जिले में स्वास्थ्य विभाग में 'चिकित्सकी' का 'टोटा' जरूर है लेकिन ऐसा नहीं कि चिकित्सक ही नहीं। सतना जिले में तो 'मेडिकल कॉलेज' तक खुल गया है लेकिन अभी भी चिकित्सकों की कमी पूरी नहीं हो पा रही है। स्वतंत्रता दिवस के मौके पर स्वास्थ्य विभाग के 'बड़े साहब' के जलाया केवल तीन डॉक्टरों को ही 'सम्मान' मिला। 'सम्मान' में विता अस्पताल के अस्थि रोग विशेषज्ञ,सत्यरोग विशेष के अलावा 'मेडिकल कॉलेज' के 'मेडिसिन विशेषत' ने बाजी मारी। इस का आशय यह है कि जिले के केवल तीन डॉक्टर ने ही अपना काम पूरी निर्धा' के साथ किया इसलिए उनके नाम पर विभाग ने 'मुहर' लगाकर 'सम्मान' दिलाया। कॉश इस 'सम्मान' के लालच में ही अन्त डॉक्टर थी नीतिम्येतरी 'नि' पूर्वक निभाएं।
कब बहुरेंगे 'खटारा एक्सप्रेस' के दिन
इस समय स्वास्थ्य विभाग की 'नाक में दम करने वाला एक ही विभाग है वो है 'खटारा एक्सप्रेस' विभाग। इस समय आए दिन एम्बुलेंस '108' सेवा सुर्खियों में बनी हुई है। न जाने क्यों कोई भी 'अधिकारी' इस सेवा पर ध्यान नहीं दे रहा है जबकि यह सेवा 'मरीजों की 'जीवनदायिनी है। माना कि इसका संचालन 'राज्य स्तर' से होता है लेकिन स्वास्थ्य विभाग के 'बड़े साहव' तो इस पर एक्शन ले सकते हैं, इसकी मॉनिटरिंग के अधिकारी की कभी तो अपने सामने पेश कर सकते हैं, उससे जवाब तलब कर सकते हैं। बीते एक सप्ताह में चार से पांच 'एम्बुलेंस वाहनों ने मरीजों को जान से खिलवाड़ किया लेकिन जिले के सभी अधिकारी 'मौन' हैं, कोई भी इस ओर देखने वाला नहीं है। हां इतना तय है कि जिस दिन किसी मरीज की 'जान' चली जाएगी उस दिन जरूर सभी अधिकारियों के कपान' आएंगे।
'सीएचसी' के बिगड़े हालात
जिले से सटे विकासखंड में संचालित 'सीएचसी बी अजब-गजब है। यहां के स्टाफ ही अपनी 'सीएचसी की बदतर सेवाओं का गुणगान करते नहीं थकते। इस 'सीएचसी' से जाए दिन कोई नको 'मीडियो' 'सोशल मीडिया में वायरल होता रहता है, जिसमे बदहाल स्वास्थ्य सेवाओं को उकेला जाता है। इस विकासखंड में संचालित 'सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र' में सभी चिकत्सकों की तैनाती है लेकिन कोई भी 'समय' पर यहां नहीं मिलता। मरीजों की सुविधाओं के लिए एक्सरे मशीन एक यहां लगाई गई है जो कि कमरे में बंद है। गर्भवती महिलाओं को 'प्रसव' के बाद 'जनरल वार्ड' में ही 'शिफ्ट' किया जा रहा है जिससे 'संक्रमण' फैलने का भी डर बना रहता है। यहां की अधिकारी 'मैडम' स्वर्ष 'मुख्यालय में नहीं रहती। भावान भरोसे स्वास्थ्य संस्था संचालित हो रही है।


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