जानें 31 अक्टूबर को भारत की 'आयरन लेडी' इंदिरा गांधी को क्यों याद किया जाता है। उनके साहसिक फैसले, 1971 का युद्ध और राष्ट्र की एकता के लिए उनके बलिदान पर विस्तृत आलेख।

फीचर डेस्क. स्टार समाचार वेब.
हर वर्ष 31 अक्टूबर का दिन भारतीय इतिहास में एक दुखद और महत्वपूर्ण तारीख के रूप में दर्ज है। यह वह दिन है जब भारत की पहली और एकमात्र महिला प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी की हत्या कर दी गई थी। उनकी पुण्यतिथि को देश भर में उन्हें श्रद्धांजलि देने और राष्ट्र निर्माण में उनके साहसिक योगदान को याद करने के लिए मनाया जाता है।
इंदिरा गांधी का जन्म 19 नवंबर 1917 को इलाहाबाद में हुआ था। वह स्वतंत्रता सेनानी और भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू की बेटी थीं। जनवरी 1966 में प्रधानमंत्री का पद संभालने के बाद, उन्होंने लगभग 16 वर्षों तक देश का नेतृत्व किया, जिसने उन्हें भारतीय राजनीति की एक अविस्मरणीय हस्ती बना दिया।
उन्हें "भारत की आयरन लेडी (Iron Lady of India)" के नाम से जाना जाता था, क्योंकि उन्होंने कई कठिन और साहसी निर्णय लिए, जिसने देश की दिशा को प्रभावित किया:
बैंकों का राष्ट्रीयकरण (1969): इसका उद्देश्य बैंकों के संसाधनों को बड़े उद्योगपतियों के हाथों से निकालकर आम जनता और गरीबों के कल्याण के लिए इस्तेमाल करना था।
प्रिवी पर्स का उन्मूलन (1971): पूर्व रियासतों के शासकों को मिलने वाले विशेष भत्तों को समाप्त करके देश में समानता लाने की दिशा में कदम उठाया गया।
1971 का युद्ध और बांग्लादेश का निर्माण: उनके नेतृत्व में, भारत ने पाकिस्तान के साथ युद्ध जीता और पूर्वी पाकिस्तान को एक स्वतंत्र राष्ट्र बांग्लादेश के रूप में स्थापित करने में निर्णायक भूमिका निभाई। इस जीत के बाद, तत्कालीन विपक्षी नेता अटल बिहारी वाजपेयी ने उन्हें 'देवी दुर्गा' कहकर संबोधित किया था।
इंदिरा गांधी के कार्यकाल में कई बड़ी चुनौतियाँ भी आईं। वर्ष 1975 में आंतरिक अशांति का हवाला देते हुए आपातकाल (Emergency) की घोषणा करना उनके जीवन का सबसे विवादास्पद फैसला रहा। हालाँकि, बाद में उन्होंने स्वयं आपातकाल हटाकर चुनाव कराए।
उनके जीवन का अंत 31 अक्टूबर 1984 को एक दुखद घटना के साथ हुआ। ऑपरेशन ब्लू स्टार के बाद, नई दिल्ली स्थित उनके आवास पर उनके ही दो अंगरक्षकों द्वारा गोली मारकर उनकी हत्या कर दी गई। उनकी शहादत ने देश को स्तब्ध कर दिया और भारतीय राजनीति में एक अधूरा अध्याय छोड़ दिया।
इंदिरा गांधी को आज भी उनकी असाधारण राजनीतिक दूरदर्शिता, दृढ़ इच्छाशक्ति और वैश्विक पहचान के लिए याद किया जाता है। उनकी पुण्यतिथि पर, देश के नेता और नागरिक 'शक्ति स्थल' (दिल्ली में उनका समाधि स्थल) पर इकट्ठा होकर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं।
उन्होंने अपने एक भाषण में कहा था, "मैं आज यहां हूं, कल शायद यहां न रहूं। जब मैं मरुंगी तो मेरे खून का एक-एक कतरा भारत को मजबूत करने में लगेगा।" उनकी यह पंक्ति भारत की एकता और अखंडता के प्रति उनके अंतिम समर्पण को दर्शाती है। उनकी विरासत हमें यह याद दिलाती है कि देश की संप्रभुता और एकता को बनाए रखना हर नागरिक का सर्वोच्च कर्तव्य है।
महावीर जयंती पर विशेष आलेख: जानें भगवान महावीर के जीवन, तपस्या और अहिंसा-अपरिग्रह के सिद्धांतों के बारे में। कैसे उनके विचार आज के आधुनिक युग की समस्याओं का समाधान हैं।
साहित्य अकादमी पुरस्कार को लेकर उठती बहस केवल एक लेखक या कृति तक सीमित नहीं है, बल्कि यह हिंदी साहित्य में सम्मान की कसौटियों, चयन प्रक्रिया की पारदर्शिता और समय पर मूल्यांकन जैसे व्यापक प्रश्नों को सामने लाती है।
23 मार्च "विश्व मौसम विज्ञान दिवस" पर विशेष आलेख। विस्तार से जानें कैसे मानवीय स्वार्थ प्रकृति का विनाश कर रहे हैं और बदलता मौसम क्यों पूरी जीवसृष्टि के लिए सबसे बड़ा खतरा बन गया है।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने नव संवत्सर (विक्रम संवत 2083) पर मध्य प्रदेश के विकास का विजन साझा किया। जानें कृषक कल्याण वर्ष, जल गंगा संवर्धन अभियान और विक्रमोत्सव 2026 के बारे में
भारत में फाल्गुन पूर्णिमा को मनाई जाने वाली होली केवल रंगों का त्योहार नहीं, बल्कि नवजीवन, प्रकृति के पुनर्जागरण और सामाजिक समरसता का महापर्व है।
आज के डिजिटल युग में सोशल मीडिया केवल युवाओं का माध्यम नहीं रह गया है। वरिष्ठ नागरिक भी तेजी से इस आभासी दुनिया में अपनी सक्रिय उपस्थिति दर्ज करा रहे हैं। वे परिवार और मित्रों से जुड़े रहने, नए समुदायों से संवाद स्थापित करने तथा अपने शौक और रुचियों को पुनर्जीवित करने के लिए इन मंचों का उपयोग कर रहे हैं।
महाप्राण सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' के साहित्यिक योगदान पर एक विस्तृत आलेख। उनके छायावाद, प्रगतिवाद और प्रमुख रचनाओं जैसे 'राम की शक्ति पूजा' और 'सरोज स्मृति' का गहराई से विश्लेषण।
महाशिवरात्रि केवल एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि भारतीय आध्यात्मिक चेतना की सबसे गहन और अर्थपूर्ण अभिव्यक्तियों में से एक है। यह तिथि शिव और शक्ति के कॉस्मिक मिलन, शिव के तांडव और उस महाक्षण की स्मृति से जुड़ी है जब शिव ने हलाहल विष का पान कर सृष्टि को विनाश से बचाया और नीलकंठ कहलाए।
व्यक्ति से समाज और समाज से राष्ट्र निर्माण का मार्ग दिखाने वाले , विलक्षण व्यक्तित्व के धनी , एकात्म मानव दर्शन और अंत्योदय के प्रणेता पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी के चरणों में कोटिशः नमन।
भारत में हर साल 9 फरवरी को बंधुआ मजदूर दिवस मनाया जाता है। जानिए क्या है बंधुआ मजदूरी का इतिहास, कानूनी प्रावधान और आधुनिक दौर में इस शोषण को रोकने के उपाय।

जबलपुर हाईकोर्ट का ऐतिहासिक फैसला, सरकारी कर्मचारियों को मिलेगा 100% वेतन और एरियर्स

खरमास 2025-2026: कब से कब तक रहेगा, जानें शुभ कार्यों की मनाही का कारण

ऑपरेशन सिंदूर...मुझे एक तस्वीर दिखा दो...जिसमें भारत का एक गिलास भी नहीं टूटा हो

लागू होंगे नए अवकाश नियम: CCL में वेतन कटौती, EL को 'अधिकार' नहीं मानेगा MP वित्त विभाग

आहत जनता को राहत...निचले स्तर पर आई थोक महंगाई

जैतवारा से लेकर बारामाफी तक आक्रोश

सुरक्षित और नेचुरल तरीके से बाल करना है काले तो अपनाएं ये उपाय

बची हुई चाय को दोबारा गर्म करके पीने क्या होगा, जानें इसके बारे में?

अगर 40 की उम्र कर ली है पार और रहना चाहते हैं तंदरुस्त तो अपनाएं ये आदतें

ठंडा पानी पीने और मीठा खाने पर दांतों में होती है झनझनाहट तो हो जाएं सावधान, नहीं तो हो सकती है बड़ी समस्या

ठंड में बढ़ जाती है डिहाइड्रेशन की समस्या, जानें क्या है कारण ?

तनाव से चाहिए है छुटकारा तो इन चीजों से करें तौबा, अपनाएं ये सलाह