जबलपुर हाईकोर्ट ने लोकायुक्त कार्यालय से रिश्वत मामले की फाइल गुम होने पर नाराजगी जताई है। कोर्ट ने DGP को FIR दर्ज करने और लापरवाह अधिकारियों पर कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
By: Star News
Jan 16, 20267:51 PM
जबलपुर: मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने लोकायुक्त कार्यालय से एक महत्वपूर्ण रिश्वत प्रकरण की मूल फाइल (Original Case File) गायब होने पर गहरी नाराजगी जताई है। जस्टिस विवेक अग्रवाल और जस्टिस विनय सराफ की युगलपीठ ने इस बात पर हैरानी व्यक्त की है कि इतनी संवेदनशील फाइल गुम होने के बावजूद अब तक एफआईआर (FIR) दर्ज क्यों नहीं कराई गई। अदालत ने प्रदेश के पुलिस महानिदेशक को इस मामले में तुरंत केस दर्ज करने और संबंधित लापरवाह अधिकारी के खिलाफ विभागीय जांच शुरू करने का आदेश दिया है।
यह विवाद पीडब्ल्यूडी (PWD) के हेड क्लर्क अनिल कुमार पाठक से जुड़ा है। लोकायुक्त ने अगस्त 2009 में पाठक के खिलाफ 3000 रुपये की रिश्वत लेने का मामला दर्ज किया था। ट्रायल के दौरान पता चला कि लोकायुक्त कार्यालय से केस की मूल फाइल ही गायब हो गई है। फाइल न होने की स्थिति में लोकायुक्त ने ट्रायल कोर्ट में आवाज के नमूनों (Voice Samples) को द्वितीय साक्ष्य (Secondary Evidence) के रूप में स्वीकार करने की अनुमति मांगी थी, जिसे कोर्ट ने मंजूर कर लिया। इसी फैसले को याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।
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सुनवाई के दौरान लोकायुक्त पुलिस अधीक्षक अंजूलता पटले कोर्ट में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित हुईं। उन्होंने अदालत को बताया कि तत्कालीन इंचार्ज डीएसपी ऑस्कर किंडो ने फाइल खोने के संबंध में अपनी गलती स्वीकार की थी। हालांकि, याचिकाकर्ता के आग्रह पर कोर्ट ने उनकी मुख्य याचिका तो खारिज कर दी, लेकिन दस्तावेजों की सुरक्षा में हुई इस गंभीर चूक को नजरअंदाज नहीं किया।
युगलपीठ ने स्पष्ट किया कि महत्वपूर्ण सरकारी दस्तावेजों का इस तरह गायब होना गंभीर अपराध की श्रेणी में आता है। कोर्ट ने डीजीपी को निर्देश दिया है कि फाइल गुमने के संबंध में तत्काल FIR दर्ज की जाए। दोषी अधिकारी भले ही सेवानिवृत्त (Retired) हो चुका हो, लेकिन यदि उसकी सेवानिवृत्ति को 4 साल से कम समय हुआ है, तो उसके खिलाफ विभागीय जांच शुरू की जाए।