मकर संक्रांति की तिथि को लेकर असमंजस की स्थिति है। यह आम सवाल है कि संक्रांति 14 जनवरी को है या 15 जनवरी को।
By: Ajay Tiwari
Jan 13, 20263:10 PM
धर्म डेस्क. स्टार समाचार वेब
मकर संक्रांति की तिथि को लेकर असमंजस की स्थिति है। यह आम सवाल है कि संक्रांति 14 जनवरी को है या 15 जनवरी को। ज्योतिषीय गणना के अनुसार, संक्रांति उस क्षण मनाई जाती है जब सूर्य धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश (Inbound) करते हैं। वर्ष 2026 में, सूर्य का मकर राशि में प्रवेश 14 जनवरी की देर रात हो रहा है।
हिंदू धर्म के ‘उदयातिथि’ सिद्धांत (सूर्योदय के समय मौजूद तिथि) के अनुसार, जब संक्रांति रात में होती है, तो उसका पुण्यकाल और उत्सव अगले दिन मनाया जाता है। अतः वर्ष 2026 में मुख्य रूप से मकर संक्रांति 14 जनवरी, बुधवार को मनाई जाएगी, क्योंकि 14 जनवरी को सूर्य का गोचर शुरू हो चुका होगा और पूरे दिन दान-पुण्य का विशेष महत्व रहेगा।
मकर संक्रांति का निर्धारण ‘सौर कैलेंडर’ के आधार पर होता है, जबकि अन्य हिंदू त्योहार ‘चंद्र कैलेंडर’ पर आधारित होते हैं। बता दें.. पृथ्वी अपनी धुरी पर झुककर सूर्य की परिक्रमा करती है, जिससे सूर्य का उत्तरायण और दक्षिणायन होना तय होता है। मकर संक्रांति से सूर्य उत्तरी गोलार्ध की हर 70 से 80 साल में संक्रांति की तिथि एक दिन आगे खिसक जाती है। यही कारण है कि प्राचीन काल में यह दिसंबर में मनाई जाती थी, फिर 13 या 14 जनवरी को और अब अक्सर यह 15 जनवरी को भी पड़ती है। 2026 में ग्रहों की स्थिति ऐसी है कि 14 जनवरी को सूर्य का गोचर रात में होने के कारण 14 जनवरी का पूरा दिन और 15 जनवरी की सुबह (पारण काल) दोनों ही अत्यंत शुभ रहेंगे।
2026 में 14 जनवरी को षटतिला एकादशी का भी योग बन रहा है, जिससे इस दिन का महत्व दोगुना हो गया है। 14 जनवरी को सूर्योदय से लेकर सूर्यास्त तक स्नान-दान का सर्वोत्तम समय रहेगा। शास्त्रों के अनुसार, यदि संक्रांति सूर्यास्त के बाद होती है, तो उसका पुण्यकाल अगले दिन के प्रथम पहर तक विस्तारित होता है। इसलिए, जो लोग सूर्य के राशि परिवर्तन के ठीक बाद स्नान करना चाहते हैं, वे 15 जनवरी की सुबह भी यह अनुष्ठान कर सकते हैं।