नोएडा प्राधिकरण के CEO हटाए गए, बिल्डर अभय कुमार गिरफ्तार और एडीजी के नेतृत्व में SIT जांच शुरू
By: Ajay Tiwari
Jan 20, 20264:33 PM
हाइलाइट्स
नोएडा। स्टार समाचार वेब
सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की मौत ने उत्तर प्रदेश के 'शो-विंडो' कहे जाने वाले नोएडा के दावों की पोल खोलकर रख दी है। इस हृदयविदारक घटना का मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कड़ा संज्ञान लिया है। शासन ने तत्काल प्रभाव से नोएडा प्राधिकरण के सीईओ डॉ. लोकेश एम. को पद से हटाकर प्रतीक्षारत (Waiting) कर दिया है। मुख्यमंत्री की इस कार्रवाई ने स्पष्ट कर दिया है कि अफसरशाही की लापरवाही अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
नोएडा पुलिस ने इस मामले में सक्रियता दिखाते हुए नामजद बिल्डर अभय कुमार को गिरफ्तार कर लिया है। नॉलेज पार्क कोतवाली में 'एमजे विशटाउन' और 'लोटस ग्रीन' बिल्डर कंपनियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज है। मामले की तह तक जाने के लिए मेरठ जोन के एडीजी भानू भास्कर के नेतृत्व में तीन सदस्यीय एसआईटी (SIT) गठित की गई है। इस टीम में मेरठ मंडलायुक्त भानू चंद्र गोस्वामी और पीडब्ल्यूडी के चीफ इंजीनियर अजय वर्मा शामिल हैं, जो 5 दिनों के भीतर मुख्यमंत्री को अपनी रिपोर्ट सौंपेंगे।
सूत्रों के मुताबिक, मुख्यमंत्री इस बात से बेहद नाराज थे कि एक पिता के सामने उसका जवान बेटा डूबता रहा और संसाधनों से लैस फायर ब्रिगेड, पुलिस और एसडीआरएफ की टीमें किनारे खड़ी तमाशा देखती रहीं। सीएम ने इस बात को गंभीरता से लिया कि जो साहस एक अप्रशिक्षित डिलीवरी बॉय ने दिखाया, वह प्रशिक्षण प्राप्त बचाव दल क्यों नहीं दिखा सका? बेसमेंट के लिए अवैध खुदाई कर उसे मौत का गड्ढा बनाने वाले बिल्डर पर समय रहते कार्रवाई न करना भी प्राधिकरण की बड़ी विफलता मानी गई है।
एक तरफ जहां शासन सख्त है, वहीं नोएडा प्राधिकरण ने भी एसीईओ सतीश पाल की अध्यक्षता में आंतरिक जांच कमेटी बनाई है। यह कमेटी सिविल, नियोजन और एनटीसी विभाग के उन अधिकारियों की भूमिका की जांच करेगी जिन्होंने स्पोर्ट्स सिटी जैसे संवेदनशील भूखंड पर नियमों की अनदेखी की। जांच में सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के निर्देशों का भी विशेष ध्यान रखा जा रहा है, क्योंकि यह जमीन पहले से ही कानूनी विवादों में घिरी हुई है।
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