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सतना रेलवे प्लेटफॉर्म की कहानियां: अधिकारियों की मलाईखोरी, ईमानदारी का ढिंढोरा, सुस्त विकास की रेल और खुरचन की मिठास

पत्रकार करण उपाध्याय के कॉलम प्लेटफ़ॉर्म में सतना रेलवे विभाग के गलियारों में घूम रही दिलचस्प कहानियां – किसी अधिकारी की मलाईखोरी के किस्से, किसी की ईमानदारी की दुहाई, विकास की धीमी चाल और खुरचन की मिठास तक। प्लेटफॉर्म पर सुनाई दे रही ये चर्चाएं यात्री से लेकर अफसर तक सबको गुदगुदा रही हैं।

By: Yogesh Patel

Aug 28, 202511:34 PM

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सतना रेलवे प्लेटफॉर्म की कहानियां: अधिकारियों की मलाईखोरी, ईमानदारी का ढिंढोरा, सुस्त विकास की रेल और खुरचन की मिठास

हिस्से का किस्सा 

रेलवे विभाग में एक किस्सा खूब चल रहा है। एक साहब की कुर्सी तो बड़ी हो गई लेकिन पुरानी आदत अभी छूटी नहीं है। साहब ने कुछ ठेकेदारों को काम बांट रखे थे। अभी ठेकेदारों से उनके हिस्से का इनाम नहीं मिला है, इससे साहब परेशान हैं। ऐसा इस लिए क्योंकि उनका तबादला कहीं दूसरी जगह न हो जाए। तबादले से पहले वे चाहते हैं कि ठेकेदार उनकी जेब गर्म कर दें। ठेकेदार भी चतुर चालाक हैं। उन्हें लगता है कि अब तो साहब जल्दी जाने वाले हैं फिर उनका हिस्सा क्यों दिया जाए। अब सच्चाई क्या है यह तो भगवान ही जाने,लेकिन यह किस्सा इन दिनों रेलवे के गलियारों में चटकारे लेकर सुनाया जा रहा है। 

ईमानदारी का पीट रहे ढिंढोरा 

मेन कुर्सी पर बैठे एक अधिकारी ईमानदारी का ढिंढोरा पीटते थकते नहीं हैं। इसके पहले भी जो थे वो भी इसी रास्ते पर थे। वर्तमान समय में बैठे अधिकारी पहले वाले को यह कहते नहीं थकते कि उनके पहले जो थे उन्होंने बड़ी मलाई खाई है। ड्यूटी में खाली छोला लाते थे और झोला भर कर ले जाते थे। क हते है कि वे खाने के बड़े शौकीन थे। दराज में चना-मूंगफली पैके ट भरे पड़े रहते थे। एक्सपाइरी डेट के पैकेट भी नहीं बचते थे। मेन कुर्सी में अब बैठे अधिकारी जब देखों तब जेब ही दिखाते रहते हैं। हमारे पास तो सौ-दो सौ रुपइया बस रहत हैं, 20 की चाय मगवां लई। एक ने कहा कि अब सच्चाई क्या है यह तो भगवान ही जाने हर पहले वाले व्यक्ति को सब यही कहते हैं कि उसने बड़ी मलाई खाई है। 

डबल इंजन भी नहीं खीच पा रहा ‘विकास’ की रेल

स्टेशन का पुनर्विकास और विस्तार कर सतना को प्रगति की रफ्तार देने की बड़ी-बड़ी बातें  हुर्इं। स्टेशन पुनर्विकास का मॉडल प्लेटफार्म में सजा तो रखा हैं लेकिन काम की गति न दिखने से यात्री कहते हंै कि गति शक्ति की गति इतनी सुस्त हो गई है कि रेलवे का ‘विकास’ उम्मीदों के अनुसार नहीं दौड़ पा रहा है। 2 साल बीतने को है और अभी तक स्ट्रक्चर डिजाइन का अता-पता नहीं है। कहते है कि सतना-पन्ना नई रेल लाइन हो या फिर सतना-रीवा डबल रेल लाइन परियोजनाओं की चाल सुस्त है। ये हाल तब है जब डबल इंजन की सरकार है। कैमा का विकास एक दशक से चल रहा है। अंगे्रजों के जमाने का मालगोदाम की वजह से बाजार रोड में लगने वाला जाम शहरवासियों व यात्रियों के लिए अब नासूर बन गया है। उधर माननीय मंच से विकास की गाथा सुनाते थकते नहीं हैं, इधर सतना जंक्शन से या तो विकास रूठ गया है या फिर उसकी चाल इतनी धीमी है कि वह स्थिर खड़ा नजर आ रहा है। 

खुरचन घोल रहा मिठास 

सतना स्टेशन में लगे खुरचन का स्वाद यात्री ले या ना लें, लेकिन यहां का खुरचन अब उत्तर रेलवे के लखनऊ डिवीजन तक के अधिकारी ले रहे हैं। यात्रियों के साथ रेल अधिकारियों के संबंध में मिठास लाने का जरिया भी बना हुआ है। रक्षाबंधन का त्यौहार था एक रेलवे अधिकारी ने खुरचन स्टॉल संचालक से खुरचन लखनऊ भेजने की बात कहीं। स्टॉल संचालक ने कहा साहब पिछली बार से बेहतर दूंगा। अधिकारी ने कहा लखनऊ के साहब हमारे खास हंै। लखनऊ ही नहीं बल्कि जबलपुर भी खूब खुरचन इस बार राखी के पर्व में भेजा गया है। अधिकारियों के साथ-साथ कई रेलवे के ठेकेदारों ने भी इंजीनरिंग व निर्माण सेक्शन के अधिकारियों को खुरचन भेजा,ताकि खुरचन की मिठास उनके ठेके के कामों में भी घुल सके। मंडल अधिकारी भी खुरचन का दोहरा गिफ्ट पाकर गद-गद हैं।

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