स्टार्टअप्स के लिए खुशखबरी! केंद्र सरकार ने 'फंड ऑफ फंड्स 2.0' के तहत 10,000 करोड़ रुपये के निवेश को मंजूरी दी है। जानें किन स्टार्टअप्स को मिलेगा फायदा।
By: Ajay Tiwari
Feb 14, 20264:44 PM
नई दिल्ली। स्टार समाचार
भारत को दुनिया का सबसे बड़ा स्टार्टअप हब बनाने की दिशा में केंद्र सरकार ने एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में शनिवार को हुई कैबिनेट की बैठक में 'स्टार्टअप इंडिया फंड ऑफ फंड्स (FFS) 2.0' के लिए 10,000 करोड़ रुपये के विशाल कोष को हरी झंडी दे दी गई है।
इस योजना का मुख्य उद्देश्य डीप-टेक, एडवांस टेक्नोलॉजी और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में काम करने वाले नए उद्यमियों को शुरुआती दौर में वित्तीय सहारा देना है।
स्टार्टअप इंडिया का दूसरा चरण: क्या है खास?
सरकार ने साल 2016 में स्टार्टअप इंडिया पहल के तहत पहले चरण की शुरुआत की थी। अब इसका दूसरा चरण (FFS 2.0) और भी अधिक व्यापक दायरे के साथ पेश किया गया है।
घरेलू पूंजी को बढ़ावा: यह फंड विदेशी निवेश पर निर्भरता कम कर घरेलू पूंजी के जरिए स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र (Ecosystem) को मजबूत करेगा।
वित्तीय आवंटन: 10,000 करोड़ रुपये की इस राशि को 145 वैकल्पिक निवेश कोषों (AIFs) के माध्यम से वितरित किया जाएगा।
व्यापक असर: अब तक एआईएफ के माध्यम से 1,370 से अधिक स्टार्टअप्स में 25,500 करोड़ रुपये से ज्यादा का निवेश किया जा चुका है।
साल 2016 में जब स्टार्टअप इंडिया की शुरुआत हुई थी, तब देश में मान्यता प्राप्त स्टार्टअप्स की संख्या मात्र 500 के करीब थी। आज यह आंकड़ा 2 लाख को पार कर चुका है।
रिकॉर्ड ग्रोथ: अकेले वर्ष 2025 में 49,400 से अधिक नए स्टार्टअप्स को सरकार द्वारा मान्यता दी गई है।
यूनिकॉर्न का शतक: वर्तमान में भारत में 100 से अधिक 'यूनिकॉर्न' (1 अरब डॉलर से अधिक वैल्यू वाले स्टार्टअप) मौजूद हैं।
मानकों में बदलाव: सरकार ने हाल ही में स्टार्टअप मान्यता के नियमों को आसान बनाते हुए टर्नओवर की सीमा को बढ़ाकर 200 करोड़ रुपये कर दिया है।
सरकार का ध्यान अब सामान्य सर्विस सेक्टर से हटकर 'डीप टेक्नोलॉजी' और 'इनोवेटिव मैन्युफैक्चरिंग' पर है।
अर्ली स्टेज स्टार्टअप्स: जो कंपनियां अपने शुरुआती दौर में हैं और फंड की कमी से जूझ रही हैं।
टेक्नोलॉजी आधारित विनिर्माण: ऐसी इकाइयां जो तकनीक के जरिए उत्पादन में नवाचार ला रही हैं।
हाई-टेक इनोवेशन: रोबोटिक्स, एआई और उन्नत हार्डवेयर पर काम करने वाले स्टार्टअप्स।
इस योजना को पारदर्शिता और कुशलता से चलाने के लिए सरकार एक अधिकार प्राप्त समिति (Empowered Committee) का गठन करेगी। यह समिति फंड के सही इस्तेमाल और स्टार्टअप्स को मिलने वाले मार्गदर्शन की निगरानी करेगी।
स्टार्टअप्स को मिलने वाली यह फंडिंग सीधे तौर पर रोजगार सृजन में मदद करेगी। जब स्टार्टअप्स को शुरुआती पूंजी मिलेगी, तो वे अधिक रिसर्च और डेवलपमेंट कर पाएंगे, जिससे देश की आर्थिक विकास दर (GDP) को गति मिलेगी।
'फंड ऑफ फंड्स 2.0' महज एक वित्तीय योजना नहीं है, बल्कि यह उन युवाओं के सपनों को पंख देने का जरिया है जो जोखिम लेने और कुछ नया रचने का जज्बा रखते हैं। यह कदम भारत को 'जॉब सीकर' (नौकरी चाहने वाला) के बजाय 'जॉब क्रिएटर' (नौकरी देने वाला) राष्ट्र बनाने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा।