सुकमा जिले में सुरक्षा बलों के दबाव और पुनर्वास नीति से प्रेरित होकर 29 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया। जानें कैसे केरलपाल एरिया कमेटी नक्सल-मुक्त होने की ओर बढ़ रही है।
By: Ajay Tiwari
Jan 14, 20263:41 PM
छत्तीसगढ़। स्टार समाचार वेब
सुकमा जिले में सुरक्षा बलों के बढ़ते दबाव और सरकार की प्रभावी रणनीतियों के चलते नक्सलवाद के विरुद्ध एक बड़ी सफलता हाथ लगी है। क्षेत्र में सुरक्षा बलों की सक्रियता से प्रभावित होकर 29 पुरुष नक्सलियों ने हिंसा का मार्ग त्याग कर समाज की मुख्यधारा में लौटने का निर्णय लिया है।
इस सकारात्मक बदलाव का मुख्य श्रेय हाल ही में स्थापित ‘गोगुंडा कैंप’ और सुरक्षा बलों द्वारा लगातार चलाए जा रहे सर्च ऑपरेशनों को जाता है, जिन्होंने नक्सलियों के गढ़ में उनकी गतिविधियों को पूरी तरह बाधित कर दिया है। सुरक्षा बलों की इस निरंतर बढ़ती मौजूदगी और एरिया डॉमिनेशन की रणनीति ने नक्सलियों को यह अहसास करा दिया है कि विकास और शांति ही भविष्य का एकमात्र मार्ग है।
आत्मसमर्पण करने वाले सभी नक्सलियों ने सुकमा के पुलिस अधीक्षक (एसपी) किरण चव्हाण के समक्ष अपने हथियार डाले और शांतिपूर्ण जीवन जीने का संकल्प लिया। समर्पण के दौरान पुलिस प्रशासन द्वारा उन्हें राज्य सरकार की पुनर्वास नीति के फायदों से अवगत कराया गया, जो पूर्व नक्सलियों को आर्थिक सहायता और सामाजिक सुरक्षा प्रदान कर समाज में पुन: स्थापित होने का अवसर देती है।
अधिकारियों का मानना है कि इस बड़े आत्मसमर्पण के साथ ही अब केरलपाल एरिया कमेटी लगभग नक्सल-मुक्त होने के कगार पर पहुँच गई है। यह उपलब्धि न केवल सुकमा में विकास के नए द्वार खोलेगी, बल्कि अन्य सक्रिय नक्सलियों को भी हिंसा छोड़कर सम्मानजनक जीवन चुनने की प्रेरणा देगी।