भारतीय गौर, हाथी के बाद बांधवगढ़ का सबसे बड़ा शाकाहारी वन्यप्राणी है। पारिस्थितिकी तंत्र में इसकी भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह खुरदुरी घास का सेवन करता है, जिसे हिरण एवं मृग जैसे छोटे शाकाहारी प्राणी नहीं खाते।
By: Arvind Mishra
Jan 25, 202612:20 PM

उमरिया। स्टार समाचार वेब
भारतीय गौर पुनर्स्थापना एवं ट्रांसलोकेशन कार्यक्रम के तीसरे दिन यानी आज रविवार को सतपुड़ा टाइगर रिजर्व से 1 नर और 5 मादा गौर को लाकर सुरक्षित रूप से बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में छोड़ा गया। शनिवार से प्रारंभ इस महत्वपूर्ण अभियान के अंतर्गत अब तक 19 भारतीय गौर को सतपुड़ा टाइगर रिजर्व से लाकर बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में सफलतापूर्वक पुनर्स्थापित किया जा चुका है। आगामी दो से तीन दिनों में सतपुड़ा टाइगर रिजर्व से 8 और गौर बांधवगढ़ लाएने की तैयारी है। वर्तमान में बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में भारतीय गौर का सफलतापूर्वक पुनर्स्थापन किया जा रहा है। भारतीय गौर, हाथी के बाद बांधवगढ़ का सबसे बड़ा शाकाहारी वन्यप्राणी है। पारिस्थितिकी तंत्र में इसकी भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह खुरदुरी घास का सेवन करता है, जिसे हिरण एवं मृग जैसे छोटे शाकाहारी प्राणी नहीं खाते।
बांधवगढ़ में समाप्त हो गए थे गौर
1990 के दशक तक बांधवगढ़ के गौर आहार की खोज में अमरकंटक के जंगलों तक आवागमन करते थे, परंतु बाद में बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व से अमरकंटक वन क्षेत्र के कॉरिडोर के बीच में सड़क, रेलवे लाइन, विद्युत वितरण लाइन और अन्य कारणों से गौर का सीजनल माइग्रेशन प्रभावित हुआ और अंतत: 1998 में बांधवगढ़ से गौर पूर्णत: समाप्त हो गए।
फिर बनी कार्ययोजना
भारतीय गौर के विलुप्त होने के बाद मध्य प्रदेश वन विभाग एवं वन्यजीव संस्थान, भारत के संयुक्त तत्वावधान में 2010-11 से बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में गौर पुनर्स्थापना कार्यक्रम की शुरुआत की गई, जिसके अंतर्गत कान्हा टाइगर रिजर्व से 50 गौर यहां लाए गए। वर्तमान में आनुवंशिक विविधता बनाए रखने के उद्देश्य से सतपुड़ा रिजर्व से भी 50 गौर लाए जा रहे हैं, जिनमें से 22 गौर पिछले वर्ष फरवरी में लाए जा चुके हैं।