दीपावली केवल एक दिन का त्योहार नहीं, बल्कि यह पाँच दिनों तक चलने वाला भव्य उत्सव है, जिसका आरंभ धनतेरस से होता है और समापन भाई दूज पर होता है।

स्टार समाचार वेब धर्म डेस्क
दीपों का पर्व दीपावली हर वर्ष कार्तिक मास की अमावस्या तिथि को मनाया जाता है। यह पर्व बुराई पर अच्छाई और अंधकार पर प्रकाश की विजय का प्रतीक है, जो हर व्यक्ति के जीवन में सुख-समृद्धि, नई ऊर्जा और खुशियों का संचार करता है। दीपावली केवल एक दिन का त्योहार नहीं, बल्कि यह पाँच दिनों तक चलने वाला भव्य उत्सव है, जिसका आरंभ धनतेरस से होता है और समापन भाई दूज पर होता है।
इस बार 2025 में यह पंच दिवसीय उत्सव कब से शुरू होगा और इसकी मुख्य तिथियां व शुभ मुहूर्त क्या हैं, आइए विस्तार से जानते हैं:
तिथि: 18 अक्टूबर 2025 (शनिवार)
कारण: कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि 18 अक्टूबर को दोपहर 12 बजकर 18 मिनट पर शुरू होकर 19 अक्टूबर को दोपहर 1 बजकर 51 मिनट पर समाप्त होगी। प्रदोष काल (सूर्यास्त के बाद का समय) में पूजा की महत्ता के कारण, धनतेरस 18 अक्टूबर को मनाई जाएगी।
महत्व: इस दिन भगवान धन्वंतरि और माता लक्ष्मी की पूजा की जाती है। शुभ मुहूर्त में सोना, चांदी या नए बर्तन खरीदना अत्यंत शुभ माना जाता है।
तिथि: 19 अक्टूबर 2025 (रविवार)
महत्व: इसे नरक चतुर्दशी भी कहते हैं। इस दिन संध्याकाल में यम देव के लिए दीप दान किया जाता है। घर के मुख्य द्वार पर चार मुखी दीपक जलाने का विधान है। यह दिन घर की नकारात्मकता को दूर करने और सकारात्मक ऊर्जा को बढ़ाने के लिए समर्पित है।
तिथि: 20 अक्टूबर 2025 (सोमवार)
कारण: कार्तिक अमावस्या तिथि 20 अक्टूबर को दोपहर 3 बजकर 44 मिनट से शुरू होगी और 21 अक्टूबर को शाम 5 बजकर 54 मिनट पर समाप्त होगी। चूंकि दिवाली पर लक्ष्मी पूजन सूर्यास्त के बाद (प्रदोष काल) में किया जाता है, इसलिए दीपावली का पर्व 20 अक्टूबर को मनाना शास्त्र सम्मत होगा।
लक्ष्मी पूजा का शुभ मुहूर्त: 20 अक्टूबर 2025, शाम 7 बजकर 8 मिनट से रात 8 बजकर 18 मिनट तक।
महत्व: इस दिन माता लक्ष्मी और भगवान गणेश की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है, ताकि घर में सुख-समृद्धि और धन का आगमन हो।
तिथि: 22 अक्टूबर 2025 (बुधवार)
कारण: कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि 21 अक्टूबर को शाम 05 बजकर 54 मिनट पर शुरू होकर 22 अक्टूबर को रात 8 बजकर 16 मिनट पर समाप्त होगी। उदय तिथि के अनुसार गोवर्धन पूजा 22 अक्टूबर को मनाई जाएगी।
महत्व: इस दिन भगवान कृष्ण को 56 भोग (अन्नकूट) लगाया जाता है और गौ-माता की पूजा की जाती है। कई स्थानों पर गोबर से गोवर्धन पर्वत की आकृति बनाकर पूजा की जाती है।
तिथि: 23 अक्टूबर 2025 (गुरुवार)
कारण: शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि 22 अक्टूबर को रात 08 बजकर 16 मिनट पर शुरू होगी और 23 अक्टूबर को रात 10 बजकर 46 मिनट पर समाप्त होगी। द्वितीया तिथि में सूर्योदय और तिलक के शुभ मुहूर्त को देखते हुए भाई दूज का पर्व 23 अक्टूबर को मनाया जाएगा।
तिलक का शुभ मुहूर्त: 23 अक्टूबर 2025, दोपहर 01 बजकर 13 मिनट से 03 बजकर 28 मिनट तक।
महत्व: यह पर्व भाई-बहन के अटूट प्रेम को समर्पित है। बहनें इस दिन भाई के माथे पर तिलक लगाकर उनकी लंबी आयु और खुशहाली की कामना करती हैं।

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