पिछले कुछ सालों में बजट और शेयर बाजार का रिश्ता कई बार निवेशकों के लिए निराशाजनक साबित हुआ है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यकाल में अब तक पेश किए गए बजटों में कई मौके ऐसे आए हैं, जब बजट के बाद बाजार में भारी गिरावट देखने को मिली है।

बाजार का रिश्ता कई बार निवेशकों के लिए निराशाजनक साबित हुआ है।

मुंबई। स्टार समाचार वेब
पिछले कुछ सालों में बजट और शेयर बाजार का रिश्ता कई बार निवेशकों के लिए निराशाजनक साबित हुआ है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यकाल में अब तक पेश किए गए बजटों में कई मौके ऐसे आए हैं, जब बजट के बाद बाजार में भारी गिरावट देखने को मिली है। कई बार सेंसेक्स और निफ्टी लाल निशान पर बंद हुए, जिससे निवेशकों को बड़ा नुकसान उठाना पड़ा है। बीते कुछ सालों के आंकड़ों पर नजर डालें तो बजट के दिन शेयर बाजार में कमजोरी कई बार देखने को मिली है। 2024 में पेश किए गए अंतरिम बजट के दिन सेंसेक्स 1.14 प्रतिशत गिरकर 71,645.30 अंक पर बंद हुआ था। वहीं, 2020 में बजट के दिन बाजार में ज्यादा दबाव देखने को मिला था।
सेंसेक्स 2.42 प्रतिशत टूटकर 987.96 अंक नीचे आ गया था। 2018 में इसमें 0.16 प्रतिशत की हल्की गिरावट दर्ज की गई थी, जबकि 2014 में बजट के दिन सेंसेक्स 0.28 प्रतिशत की गिरावट के साथ बंद हुआ था। ये आंकड़े बताते हैं कि कई मौकों पर बजट के दौरान निवेशकों को निराशा का सामना करना पड़ा है। दरअसल, हफ्ते के पहले कारोबारी दिन भारतीय बाजार लाल निशान पर खुला। शुरुआती कारोबार में 30 शेयरों वाला सेंसेक्स 18.59 अंक या 0.02 प्रतिशत गिरकर 80,704.35 अंक पर आ गया। वहीं 50 शेयरों वाला निफ्टी 28.95 अंक या 0.12 प्रतिशत गिरकर 24,796.50 अंक पर आ गया।
छुट्टी के दिन खुला रहा बाजार
केंद्रीय बजट 1 फरवरी को पेश होने के चलते रविवार को भी बाजार खुला रहा। अपने बजट भाषण में वित्त मंत्री ने शेयर बाजार को लेकर कई बड़ी घोषणाएं की। इसमें फ्यूचर्स और आप्शंस ट्रेडिंग पर सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स बढ़ाने का एलान किया गया। इससे बेंचमार्क सूचकांक और निफ्टी में करीब 2 प्रतिशत की गिरावट दर्ज हुई।
एशियाई बाजार में भी गिरावट
जापान का निक्केई इंडेक्स 0.26 फीसदी गिरकर 53,186 पर और दक्षिण कोरिया का कोस्पी इंडेक्स 4.33 प्रतिशत नीचे 4,998 कारोबार कर रहा है। हॉन्गकॉन्ग का हैंगसेंग 2.33 फीसदी गिरकर 26,748 पर और चीन का शंघाई कंपोजिट 1.32 प्रतिशत नीचे 4,063 पर ट्रेड कर रहा है। अमेरिका का डाउ जोंस 0.36 फीसदी गिरा, नैस्डैक 0.94 प्रतिशत गिरकर बंद हुआ था।


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भारतीय शेयर बाजार के लिए विदेशों से रेड सिग्नल मिल रहे थे और जिसका डर था वही हुआ। आज खुलते के साथ ही शेयर मार्केट औंधे मुंह गिर गया। इस बड़ी गिरावट के बीच पावर ग्रिड, टाटा स्टील, मारुति, एचडीएफसी बैंक, अडानी पोर्ट्स और टाइटन जैसी दिग्गज कंपनियों के शेयर बिखरे हुए दिखाई दिए।
अदाणी ग्रुप के चेयरमैन गौतम अदाणी ने बिहार में 50,000 से 60,000 करोड़ रुपये के बड़े निवेश का एलान किया है। भागलपुर के पीरपैंती में पावर प्रोजेक्ट और सारण में आई हॉस्पिटल का उद्घाटन। पढ़ें पूरी खबर।
दिल्ली-एनसीआर में सीएनजी के दाम आज एक बार फिर एक रुपए प्रति किलो बढ़ा दिए गए। इससे पहले गैस कंपनियों ने शुक्रवार को सीएनजी की कीमतें दो रुपए प्रति किलो बढ़ा दी थी। पिछले तीन दिन में सीएनजी तीन रुपए महंगी हुई है।
भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में तीन प्रति लीटर तक की बढ़ोतरी के बाद केंद्र सरकार ने तेल कंपनियों के लिए नियमों में बदलाव किया है। सरकार ने पेट्रोल एक्सपोर्ट पर तीन रुपए प्रति लीटर का विंडफॉल टैक्स लगा दिया है। इसके साथ ही डीजल और जेट फ्यूल पर टैक्स घटाया है।
अमेरिकी प्रतिभूति एवं विनिमय आयोग (SEC) ने गौतम अदाणी और सागर अदाणी के खिलाफ चल रहे मुकदमे के निपटारे पर सहमति दी है।
भारतीय शेयर बाजार में सप्ताह के आखिर कारोबारी दिन शुक्रवार की शुरुआत पॉजिटिव रही। प्रमुख बेंचमॉर्क इंडेक्स बीएसई सेंसेक्स और एनएसई निफ्टी 50 हरे निशान पर ट्रेड करते हुए ओपन हुए। इससे पहले मार्केट में गुरुवार के कारोबारी दिन जोरदार तेजी देखने को मिली थी।
हफ्ते के चौथे कारोबारी दिन आज घरेलू शेयर बाजार में राहत की किरण नजर आ रही है। बीते कुछ दिनों से बिकवाली का दबाव झेल रहे बाजार के प्रमुख सूचकांक हरे निशान पर कारोबर करते दिख रहे हैं। हालांकि, शुरुआती कारोबार में बढ़त के बाद बेंचमार्क सूचकांकों पर बिकवाली का जोर दिखा।
देश में आज से दूध महंगा हो गया है। देर शाम दिग्गज कंपनियों अमूल और मदर डेयरी ने एक के बाद एक अपनी पैकेज्ड मिल्क की कीमतों में बढ़ोतरी का ऐलान किया था और गुरुवार को महंगाई का झटका देश की जनता को लगा है।
अमेरिका और ईरान के बीच चल रही बातचीत को लेकर छाई अनिश्चितता और पश्चिम एशिया में लगातार बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का सीधा असर भारतीय शेयर बाजार पर पड़ा है। विदेशी निवेशकों की ओर से बिकवाली के दबाव के कारण इक्विटी बाजारों में लगातार चौथे कारोबारी सत्र में भारी दबाव दिखा।
बीते रविवार को पहली बार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के लोगों से एक साल तक सोना न खरीदने की अपील की थी और 24 घंटे के भीतर ही अपनी इस अपील को दोहराया भी था। अब सरकार ने गोल्ड को लेकर एक बड़ा फैसला ले लिया है।