बालाघाट जिले के प्रसन्नजीत रंगारी के लिए सात साल का लंबा इंतजार खत्म हो गया है। पाकिस्तान की जेल में बंद प्रसन्नजीत रिहा होकर भारत लौट आए हैं। अमृतसर बालाघाट के लिए रवाना हो गए हैं। प्रसन्नजीत 2017 में घर से लापता हो गए थे। काफी तलाश के बाद जब कोई सुराग नहीं मिला, तो परिजनों ने उन्हें मृत मान लिया था।
By: Arvind Mishra
Feb 05, 20262:28 PM
बालाघाट। स्टार समाचार वेब
बालाघाट जिले के प्रसन्नजीत रंगारी के लिए सात साल का लंबा इंतजार खत्म हो गया है। पाकिस्तान की जेल में बंद प्रसन्नजीत रिहा होकर भारत लौट आए हैं। अमृतसर बालाघाट के लिए रवाना हो गए हैं। प्रसन्नजीत 2017 में घर से लापता हो गए थे। काफी तलाश के बाद जब कोई सुराग नहीं मिला, तो परिजनों ने उन्हें मृत मान लिया था। दिसंबर 2021 में एक फोन कॉल के जरिए जानकारी मिली कि वे पाकिस्तान की जेल में बंद हैं। इसके बाद उनकी बहन ने घर वापसी के लिए निरंतर प्रयास किए, जिसके परिणामस्वरूप रिहाई संभव हो सकी। दरअसल, भटककर सीमा पार पाकिस्तान पहुंचने और वहां की सेंट्रल जेल में सात साल की सजा काटने के बाद प्रसन्नजीत रंगारी (38) अब जल्द अपने गांव खैरलांजी पहुंचने वाले है। परिजना उसे लेकर गुरुवार सुबह बालाघाट के लिए निकल पड़े हैं। अमृतसर पुलिस द्वारा बालाघाट के प्रसन्नजीत को सौंपने के बाद सभी स्वर्ण मंदिर पहुंचे। वहां प्रसन्नजीत ने माथा टेका।

पाकिस्तानी पोषाक में प्रसन्नजीत
अमृतसर में संवाददाताओं से चर्चा के दौरान प्रसन्नजी ने कहा- मैं ठीक हूं, मां का ख्याल रखना, मैं आ रहा हूं। प्रसन्नजीत पाकिस्तानी पोषाक में नजर आया। उसने पाकिस्तानी कुर्ता-पायजामा पहन रखा था। मंगलवार को सड़क मार्ग से अमृतसर के लिए निकले परिजन बुधवार रात 10 बजे अमृतसर के मंजीठा थाना पहुंचे थे।
सभी स्वर्ण मंदिर पहुंचे
वहां पहुंचते ही पुलिस ने प्रसन्नजीत को सौंपने की कागजी कार्रवाई की। परिजन और साथ आए रोजगार सहायक व अन्य के हस्ताक्षर लिए और प्रसन्नजीत को उनके हवाले किया। इसके बात होटल में रात गुजारने के बाद सुबह सभी स्वर्ण मंदिर पहुंचे। इस दौरान प्रसन्नजीत सामान्य नजर आया। हालांकि, अभी ये स्पष्ट नहीं कि प्रसन्नजीत के बालाघाट पहुंचने के बाद उसे कलेक्टर कार्यालय लाया जाएगा या एसपी कार्यालय, लेकिन परिजन उसे बहन संघमित्रा के गांव महकेपार ले जाने की तैयारी में जुट गए हैं। संभावना है कि प्रसन्नजीत शुक्रवार रात तक बालाघाट पहुंच जाएगा।