एनआईटीटीटीआर भोपाल में भारतीय ज्ञान परम्परा विभाग द्वारा नागरिक कर्तव्यों में शिक्षकों की भूमिका विषय पर व्याख्यान का आयोजन किया गया। इस व्याख्यान के मुख्य वक्ता विक्रांत खंडेलवाल, संगठन मंत्री, भारत विकास परिषद थे।
By: Arvind Mishra
Jan 03, 20263:19 PM

भोपाल। स्टार समाचार वेब
एनआईटीटीटीआर भोपाल में भारतीय ज्ञान परम्परा विभाग द्वारा नागरिक कर्तव्यों में शिक्षकों की भूमिका विषय पर व्याख्यान का आयोजन किया गया। इस व्याख्यान के मुख्य वक्ता विक्रांत खंडेलवाल, संगठन मंत्री, भारत विकास परिषद थे। इस अवसर पर वंदना त्रिपाठी, डॉ. आरके दीक्षित, डॉ. रामेंद्र सिंह और संस्थान के अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन बबली चतुर्वेदी ने किया। खंडेलवाल ने कहा-संवेदना के बिना निर्माण नहीं हो सकता, इसलिए शिक्षकों को संवेदनशील होना अत्यंत आवश्यक है। शिक्षक को अपने कार्य का मूल्यांकन स्वयं करना चाहिए और शिक्षा को न केवल अधिकार, बल्कि कर्तव्य के रूप में भी देखना चाहिए। अधिकार और कर्तव्य एक गाड़ी के दो पहिये हैं। अधिकार तभी सही है, जब हम अपने कर्तव्यों को पूरी जिम्मेदारी से निभाते हैं और हम सभी को प्रकृति को वापस देने का मानस बनाना चाहिए।
शिक्षा से बड़ा कोई संस्कार नहीं
खंडेलवाल ने कहा- सार्वजनिक जीवन में व्यक्ति का व्यवहार उसकी सही पहचान होता है। जीवन सफल नहीं, बल्कि सार्थक होना चाहिए, और शिक्षक को यह प्रेरणा देने में अपना योगदान देना चाहिए। शिक्षक के कार्य को सर्वोच्च मानते हुए यह भी कहा कि शिक्षकों की गोद में ही भविष्य का निर्माण होता है, शिक्षा से बड़ा कोई संस्कार नहीं है।
शिक्षक समाज में बदलाव लाने का सशक्त माध्यम
एनआईटीटीटीआर भोपाल के निदेशक डॉ. सीसी त्रिपाठी ने कहा- शिक्षक केवल ज्ञान देने वाला नहीं, बल्कि समाज में बदलाव लाने का एक सशक्त माध्यम हैं। शिक्षकों की संवेदनशीलता और कर्तव्यों का निर्वहन ही समाज में आदर्श नागरिकों का निर्माण करता है। हमें अपनी शिक्षा नीति और शिक्षण पद्धतियों को इस नजरिए से और भी सशक्त करना होगा, ताकि हमारे देश का हर नागरिक कर्तव्यपूर्ण और समाज के प्रति जिम्मेदार बने।
कर्तव्यपरायण नागरिक का निर्माण
डीन साइंस एवं आईकेएस प्रमुख प्रो. पीके पुरोहित ने कहा- शिक्षकों के प्रयासों से ही हम अपनी सांस्कृतिक धरोहर को बनाए रखते हुए, नए ज्ञान की ओर अग्रसर हो सकते हैं। इस व्याख्यान ने हमें यह समझने का अवसर दिया कि शिक्षा का असली उद्देश्य न केवल अकादमिक सफलता है, बल्कि एक संवेदनशील और कर्तव्यपरायण नागरिक का निर्माण भी है।