मध्यप्रदेश के धार जिले में स्थित भोजशाला में बसंत पंचमी और नमाज अदा कराने के दौरान टकराव के हालात न बने, इसके लिए तगड़े पुलिस बल का इंतजाम किए गए हैं। अफसरों ने दस साल पहले यानी 2016 में अपनाए गए फार्मूले पर भरोसा जताया है। तब दोनों समाज आमने-सामने नहीं हुए थे और भोजशाला खाली कराने की नौबत भी नहीं आई थी।

टकराव के हालात न बने, इसके लिए तगड़े पुलिस बल का इंतजाम किए गए हैं।

इंदौर। स्टार समाचार वेब
मध्यप्रदेश के धार जिले में स्थित भोजशाला में बसंत पंचमी और नमाज अदा कराने के दौरान टकराव के हालात न बने, इसके लिए तगड़े पुलिस बल का इंतजाम किए गए हैं। अफसरों ने दस साल पहले यानी 2016 में अपनाए गए फार्मूले पर भरोसा जताया है। तब दोनों समाज आमने-सामने नहीं हुए थे और भोजशाला खाली कराने की नौबत भी नहीं आई थी। उधर, मुस्लिम समाज के प्रतिनिधियों की तरफ से भी सांकेतिक पूजा का बयान आना भी बता रहा है कि इस बार भी प्रशासन भोजशाला में आने वाले उत्सव समिति के जुलूस को गेट पर नहीं रोकेगा और प्रवेश आसानी से हो जाएगा। कमाल मौला मस्जिद वाले हिस्से के परिसर को टेंट से ढक दिया जाएगा। सांकेतिक नमाज सीमित संख्या में कराई जाएगी। हालांकि पिछली बार इस रणनीति को अफसरों ने सार्वजनिक नहीं किया था, लेकिन इस बार पहले ही मुस्लिम समाज की तरफ से सांकेतिक नमाज का बयान आ गया है।
इसलिए हो रही इतनी माथा-पच्ची
दरअसल, इस बार 23 जनवरी (शुक्रवार) को जुमे की नमाज और बसंत पंचमी एक साथ आ रही है। इससे पहले वर्ष 2006, 2013 और 2016 में इस तरह के हालात बने और उन सभी मौकों पर क्षेत्र में तनावपूर्ण स्थिति रही। नमाज के लिए सीमित संख्या रखे जाने के कारण परिसर भी खाली नहीं कराया गया था।
ड्रोन उड़ाने की नहीं होगी अनुमति
इधर, सूर्याअस्त से सूर्योदय तक पूजा और हवन वर्ष 2016 में हुए थे। हालांकि प्रशासन सुरक्षा में कोई कसर बाकी नहीं रख रहा है। लगातार इलाकों में फ्लैग मार्च हो रहे हैं। भोजनशाला के ऊपरी हिस्से में ड्रोन उड़ाने की अनुमति नहीं रहेगी।
धार पहुंच रहा पुलिस बल
बसंत पंचमी से तीन दिन पहले ही धार पुलिस छावनी में तब्दील होगा। धार जाने वाले मार्गों पर सुरक्षा चौकियां बन गई हैं। बेरिकेड पर पुलिसकर्मी तैनात हैं। वाहनों को जांच के बगैर भीतर नहीं जाने दिया जा रहा है। आज यानी मंगलवार को सुबह धार में अतिरिक्त पुलिस बल पहुंचा गया है। सीआरपीएफ-आरएएफ की कंपनियां धार में तैनात हो चुकी हैं। ताकि सरस्वती पूजन और नमाज के बाद भी शहर शांत रहे।


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