पन्ना के बृहस्पति कुंड में डूबे दो युवकों के शव 48 घंटे बाद बरामद हुए। प्रशासनिक लापरवाही और सीमावर्ती क्षेत्र के समन्वय की कमी से रेस्क्यू प्रभावित रहा।

पन्ना, स्टार समाचार वेब
जिले के बृजपुर थाना अंतर्गत प्रसिद्ध पर्यटन स्थल बृहस्पति कुंड में डूबे तीन युवकों के शवों का रेस्क्यू किया गया। ऑपरेशन के दौरान प्रशासनिक लापरवाही स्पष्ट रूप से सामने आई। यह स्थान सतना-पन्ना जिले की सीमा पर स्थित है, जिससे दोनों जिलों के अधिकार क्षेत्र को लेकर भ्रम और टालमटोल की स्थिति बनी रही। सतना जिले से भेजी गई टीम 48 घंटे में केवल दो घंटे ही मौके पर रही, और वो भी बिना स्ट्रेचर जैसे जरूरी उपकरणों के। शव मिलने के बाद भरहुत नगर निवासी कृष्णकांत शर्मा का शव करीब एक घंटे तक जमीन पर पड़ा रहा, जबकि तत्काल मदद की जरूरत थी। वहीं, पन्ना जिले की एसडीआरएफ टीम के पास केवल एक स्ट्रेचर था, जिससे त्वरित चौधरी पिता राकेश चौधरी, भरहुत नगर को पहले निकाला गया। उसी स्ट्रेचर से दो घंटे बाद कृष्णकांत का शव ऊपर लाया जा सका। इस लापरवाही से पीड़ित परिवारों की पीड़ा और बढ़ गई। पन्ना और सतना जिला प्रशासन के बीच समन्वय की कमी साफ देखी गई। लापरवाही और टालमटोल ने रेस्क्यू ऑपरेशन को प्रभावित किया, जिससे लोगों में भारी रोष है।
घटनास्थल पर डटे अधिकारियों व जवानों ने विषम परिस्थिति में भी सराहनीय कार्य किया। विशेष रूप से थाना बृजपुर प्रभारी महेंद्र सिंह भदौरिया, प्रधान आरक्षक प्रदीप हरदौनिया, आरक्षक राम निरंजन कुशवाहा, एसडीआरएफ के सत्यपाल जैन, ब्रजेश सिंह, उदित सिंह, अमर राज सिंह, उमेश, राकेश, थाना बरौंधा के अभिनव सिंह, उप निरीक्षक विषम सिंह और अन्य ने मानवता के नाते अंत तक डटे रहे। दोनों युवकों के शवों का मझगवां सतना में पोस्टमार्टम करवा कर उनके परिजनों को सौंप दिया गया है। प्रशासन ने आगे जांच और रिपोर्ट की बात कही है, लेकिन यह घटना फिर से उस संवेदनशीलता की ओर इशारा करती है जिसकी इस प्रकार के पर्यटन स्थलों पर आवश्यकता है। यह घटना प्रशासन को सबक है कि सीमावर्ती क्षेत्रों में स्पष्ट दायित्व और तैयार आपात सेवाएं आवश्यक हैं।

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