जबलपुर में साइबर फ्रॉड का बड़ा मामला: जालसाजों ने खुद को IPS और CBI अधिकारी बताकर $72$ वर्षीय वृद्ध को 'डिजिटल अरेस्ट' किया और सुप्रीम कोर्ट के नाम पर $76$ लाख रुपये ठगे। क्राइम ब्रांच ने जांच शुरू की।

जबलपुर. स्टार समाचार वेब
जबलपुर में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है जहाँ कथित आईपीएस और सीबीआई अधिकारियों ने एक 72 वर्षीय वृद्ध को डिजिटल अरेस्ट करके उनके बैंक खाते से 76 लाख रुपये ठग लिए। ठगी का अहसास होने पर पीड़ित ने क्राइम ब्रांच में शिकायत दर्ज कराई है और पुलिस ने अज्ञात जालसाजों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
ठगी की शुरुआत: 'सिम दुरुपयोग' का बहाना
संजीवनी नगर निवासी $72$ वर्षीय अनिल कुमार नन्हौरया के पास 22 नवंबर 2025 को सुबह करीब 10:30 बजे एक कॉल आया। कॉल करने वाले ने खुद को डिपार्टमेंट ऑफ टेलीकॉम का कर्मचारी बताया और कहा कि उनके नाम से जारी सिम का उपयोग लोगों को डराने-धमकाने में किया जा रहा है, जिसकी रिपोर्ट दिल्ली थाने में दर्ज है। उसने वृद्ध को दिल्ली आकर बयान दर्ज कराने को कहा। जब वृद्ध ने असमर्थता जताई, तो जालसाज ने उन्हें ऑनलाइन स्टेटमेंट दर्ज कराने के लिए एक फोन नंबर (9573352514) पर संपर्क करने को कहा।
आईपीएस और सीबीआई का नाटक
जब वृद्ध ने दिए गए नंबर पर कॉल किया, तो सामने वाले व्यक्ति ने खुद को आईपीएस विजय कुमार बताया। इसके बाद कथित आईपीएस अधिकारी ने वीडियो कॉल करके वृद्ध को दिल्ली में दर्ज केस की जानकारी दी। कुछ ही देर बाद, एक और वीडियो कॉल में उसने दावा किया कि वृद्ध सदाकत खान ह्यूमन ट्रैफिकिंग केस में संदिग्ध हैं, जो सीबीआई में दर्ज है। जालसाज ने वृद्ध को व्हाट्सएप पर सर्वोच्च न्यायालय के एक फर्जी पत्र की प्रति भी भेजी, जिसमें उन्हें संदिग्ध बताया गया था और यह भी कहा कि सदाकत खान के पास उनका केनरा बैंक, मुंबई का एटीएम कार्ड मिला है।
'सीक्रेट मिशन' का डर और डिजिटल अरेस्ट
कथित आईपीएस विजय कुमार ने वृद्ध को धमकी दी कि यह एक 'सीक्रेट मिशन' है और यदि उन्होंने किसी को इसकी जानकारी दी तो उन्हें तीन साल की जेल और 5 लाख रुपये का जुर्माना होगा। सजा के डर से पीड़ित ने यह बात किसी से साझा नहीं की। जालसाजों ने पीड़ित को पूरी तरह से डिजिटल अरेस्ट कर लिया। उन्होंने हर तीन घंटे में व्हाट्सएप पर अपनी लोकेशन और एक्टिविटी बताने का निर्देश दिया। इसके बाद, एक वीडियो कॉल में उन्हें बताया गया कि उनके नाम का अरेस्ट वारंट और जब्ती की कार्यवाही के आदेश हैं, जिनसे बचने के लिए उन्हें 'प्रायोरिटी इन्वेस्टीगेशन' कराना होगा। इसके लिए कथित सीबीआई अधिकारी कीर्ति सान्याल के माध्यम से अनुमति लेने की बात कही गई।
सारे पैसे सुप्रीम कोर्ट के खाते में जमा करने का निर्देश
जालसाजों ने अगले कॉल में बताया कि 'प्रायोरिटी इन्वेस्टीगेशन' की अनुमति मिल गई है। अब उन्हें अपने सभी जमा (फिक्स्ड डिपॉजिट भी) तुड़वाकर पूरी राशि 'सुप्रीम कोर्ट के खाते' में तुरंत जमा करनी होगी। उन्होंने यह भी कहा कि सत्यापन के बाद यह राशि वापस कर दी जाएगी। पीड़ित ने जालसाजों के निर्देश पर अपनी एफडी तुड़वाई और पूरी राशि स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, कमला नेहरू नगर शाखा, जबलपुर के अपने खाते में जमा कर दी। इसके तुरंत बाद, उसी खाते से 76 लाख रुपये किसी दूसरे खाते में ट्रांसफर हो गए और वापस नहीं आए।
क्राइम ब्रांच की कार्रवाई
खुद को ठगा महसूस करने पर वृद्ध अनिल कुमार नन्हौरया ने तत्काल क्राइम ब्रांच में शिकायत दर्ज कराई। क्राइम ब्रांच के थाना प्रभारी शैलेश मिश्रा ने बताया कि अज्ञात जालसाजों के खिलाफ संबंधित धाराओं में प्रकरण दर्ज कर लिया गया है और उनकी पहचान और पतासाजी का काम शुरू कर दिया गया है।

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