कोलकाता में आई-पैक (I-PAC) निदेशक के घर ईडी की छापेमारी के दौरान सीएम ममता बनर्जी का हस्तक्षेप। ईडी पहुंची हाई कोर्ट, टीएमसी सांसदों का दिल्ली में प्रदर्शन। पूरी घटना का विवरण।
By: Ajay Tiwari
Jan 09, 20264:08 PM
कोलकाता/नई दिल्ली। स्टार समाचार वेब
पश्चिम बंगाल की राजनीति में गुरुवार को उस समय अभूतपूर्व स्थिति पैदा हो गई, जब प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने तृणमूल कांग्रेस (TMC) के चुनावी रणनीतिकार संस्था इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमेटी (I-PAC) और इसके निदेशक प्रतीक जैन के ठिकानों पर छापेमारी की। इस कार्रवाई ने देखते ही देखते एक बड़े संवैधानिक और राजनीतिक विवाद का रूप ले लिया है।
छापेमारी के दौरान बड़ा मोड़: ममता बनर्जी खुद पहुंचीं

घटनाक्रम में सबसे चौंकाने वाला मोड़ तब आया जब मुख्यमंत्री ममता बनर्जी स्वयं छापेमारी वाली जगह पर पहुंच गईं। ईडी का आरोप है कि मुख्यमंत्री ने जांच में बाधा डाली और वहां से महत्वपूर्ण फाइलें व एक लैपटॉप अपने कब्जे में लेकर चली गईं।
टीएमसी का पक्ष: पार्टी का आरोप है कि केंद्र सरकार चुनाव से पहले उनके रणनीतिक डेटा और गोपनीय दस्तावेजों को चुराने की कोशिश कर रही है।
ED का आरोप: जांच एजेंसी ने ममता बनर्जी पर डिजिटल साक्ष्य छीनने का आरोप लगाया है और इसे 'जांच में गंभीर बाधा' करार दिया है।
कोर्ट में हंगामा और सुनवाई स्थगित
इस मामले को लेकर ईडी और टीएमसी दोनों ही कोलकाता हाई कोर्ट पहुंच गए हैं। शुक्रवार को जब इस मामले पर सुनवाई शुरू हुई, तो अदालत परिसर में भारी भीड़ और हंगामे के कारण अफरा-तफरी मच गई। स्थिति को नियंत्रण से बाहर होता देख हाई कोर्ट ने सुनवाई 14 जनवरी 2026 तक के लिए टाल दी है।
सड़क पर टीएमसी उतरी

सड़कों पर संग्राम: दिल्ली से कोलकाता तक प्रदर्शन हुआ। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने खुद कोलकाता की सड़कों पर उतरकर ईडी की कार्रवाई के खिलाफ एक विरोध मार्च का नेतृत्व किया। वहीं दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्रालय के बाहर प्रदर्शन कर रहे टीएमसी के आठ सांसदों को पुलिस ने हिरासत में ले लिया है।
अभिषेक बनर्जी का 'लोकतंत्र' पर प्रहार
टीएमसी महासचिव अभिषेक बनर्जी ने मोदी सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि भाजपा जांच एजेंसियों का इस्तेमाल कर लोकतंत्र को कुचलना चाहती है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा, "प्रदर्शनकारियों को जेल भेजा जा रहा है और अपराधियों को जमानत मिल रही है—यही भाजपा का 'नया भारत' है।"
स्टार व्यू.. चुनावी प्रबंधन संस्था आई-पैक पर यह छापा केवल एक कानूनी कार्रवाई नहीं, बल्कि बंगाल की सत्ता और केंद्र के बीच एक बड़े युद्ध का संकेत है। लैपटॉप और फाइलों का यह विवाद आने वाले दिनों में और भी गंभीर कानूनी मोड़ ले सकता है।