उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली महा विकास अघाड़ी (एमवीए) सरकार के दौरान तत्कालीन विपक्ष के नेता देवेंद्र फडणवीस और शहरी विकास मंत्री एकनाथ शिंदे को झूठे मामले में गिरफ्तार करने की साजिश रची गई थी। अब फडणवीस सरकार ने इस साजिश का पता लगाने के लिए एसआईटी का गठन किया है।
By: Arvind Mishra
Jan 10, 202610:19 AM
मुंबई। स्टार समाचार वेब
उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली महा विकास अघाड़ी (एमवीए) सरकार के दौरान तत्कालीन विपक्ष के नेता देवेंद्र फडणवीस और शहरी विकास मंत्री एकनाथ शिंदे को झूठे मामले में गिरफ्तार करने की साजिश रची गई थी। अब फडणवीस सरकार ने इस साजिश का पता लगाने के लिए एसआईटी का गठन किया है। इससे पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। वहीं, एमवीए के कई नेता जांच के दायरे में आ सकते हैं। दरअसल, महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर बड़ा भूचाल आ गया है। ठाणे नगर पुलिस थाने में साल 2016 में दर्ज एक पुराने मामले को दोबारा खोलकर तत्कालीन विपक्ष के नेता और मौजूदा सीएम देवेंद्र फडणवीस और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे को झूठे केस में फंसाने की कथित साजिश का खुलासा हुआ है। एसआईटी की रिपोर्ट में इस साजिश के लिए पूर्व डीजीपी संजय पांडे समेत तीन वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज करने की सिफारिश की गई है।
रिटायर होने से पहले सौंपी थी रिपोर्ट
यह रिपोर्ट राज्य की पूर्व डीजीपी रश्मी शुक्ला ने अपनी सेवानिवृत्ति से महज पांच दिन पहले अतिरिक्त मुख्य सचिव (गृह) को सौंपी थी। रिपोर्ट के मुताबिक, महाविकास आघाड़ी सरकार के कार्यकाल में फडणवीस को कानूनी पचड़े में फंसाने के प्रयास तेज हुए और संजय पांडे के मुंबई पुलिस आयुक्त बनने। बाद में डीजीपी बनने के बाद इन कोशिशों को और बल मिला।
दोबारा जांच को माना संदिग्ध
एसआईटी की जांच में सामने आया कि साल 2016 में ठाणे नगर पुलिस थाने में श्यामसुंदर अग्रवाल के खिलाफ एक मामला दर्ज किया गया था, जो बिल्डर संजय पुनमिया और अग्रवाल के बीच साझेदारी विवाद से जुड़ा था। 2017 में इस केस में चार्जशीट भी दाखिल हो चुकी थी। इसके बावजूद, संजय पांडे द्वारा दोबारा जांच के आदेश दिए गए, जिसे एसआईटी ने संदिग्ध माना है।
पुलिस पर दबाव और नाम जोड़ने की कोशिश
ठाणे और मुंबई के साइबर थानों में दर्ज मामलों में फडणवीस को आरोपी बनाने के लिए संबंधित अधिकारियों पर भारी दबाव डाला गया। रिपोर्ट में कहा गया है कि तत्कालीन उपायुक्त लक्ष्मीकांत पाटील और सहायक आयुक्त सरदार पाटील ने गवाहों पर बयान बदलने और नाम जोड़ने के लिए दबाव बनाया। यहां तक कि अधिकार क्षेत्र न होने के बाद भी पूछताछ, धमकाने के आरोप भी उजागर हुए है।
आरोप: आडियो-वीडियो सबूत
प्रकरण में बिल्डर संजय पुनमिया ने आरोप लगाया कि 2021 से जून 2024 तक पुराने केस की दोबारा जांच के नाम पर उनका उत्पीड़न किया गया और उनसे एक्सटॉर्शन मांगी गई। उनकी शिकायत के आधार पर संजय पांडे समेत सात लोगों के खिलाफ एक्सटॉर्शन का मामला दर्ज हुआ। एसआईटी ने पुनमिया द्वारा दिए गए आडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग की जांच कलिना स्थित फॉरेंसिक लैब में कराई, जिसमें सरदार पाटील, पूर्व नगर रचनाकार दिलीप घेवारे और पुनमिया के बीच बातचीत की पुष्टि हुई।
लॉगबुक गायब, मिटा दिया सबूत
एसआईटी रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि 5 मई 2021 से 21 मई 2021 के बीच सरदार पाटील द्वारा इस्तेमाल की गई सरकारी गाड़ी की लॉगबुक के पन्ने गायब पाए गए। इसे सबूत मिटाने की कोशिश माना गया है। बातचीत में यह भी सामने आया कि संजय पांडे ने पूछा था कि फडणवीस और शिंदे को अब तक गिरफ्तार क्यों नहीं किया गया। इस पूरे मामले को विधान परिषद सदस्य प्रविण दरेकर ने विधानमंडल में उठाया था, जिसके बाद एसआईटी का गठन हुआ। अब एसआईटी की सिफारिशों के बाद राज्य सरकार की अगली कार्रवाई पर सबकी नजरें टिकी हैं।