रानी मुखर्जी की फिल्म 'मर्दानी 3' (Mardaani 3) का विस्तृत रिव्यू। जानें कैसी है शिवानी शिवाजी रॉय की भिखारी माफिया के खिलाफ जंग और क्या मल्लिका प्रसाद ने अपनी एक्टिंग से रानी को पीछे छोड़ दिया?
By: Ajay Tiwari
Jan 30, 20264:43 PM
एंटरटेंमेंट डेस्क. स्टार समाचार वेब
रानी मुखर्जी की बहुप्रतीक्षित एक्शन-क्राइम थ्रिलर 'मर्दानी 3' आज, यानी 30 जनवरी 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज हो गई है। शिवानी शिवाजी रॉय का सफर जो 2014 में शुरू हुआ था, वह अब अपनी तीसरी और सबसे महंगी किस्त तक पहुंच चुका है। यश राज फिल्म्स की इस फ्रेंचाइजी ने हमेशा से ही मानव तस्करी और महिलाओं के खिलाफ होने वाले अपराधों जैसे संवेदनशील मुद्दों को बेहद संजीदगी और साहस के साथ पेश किया है।
फिल्म की पटकथा एक हाई-प्रोफाइल किडनैपिंग केस के इर्द-गिर्द बुनी गई है, जहां एक राजदूत की बेटी के साथ-साथ उसकी केयरटेकर की बेटी का भी अपहरण कर लिया जाता है। जांच की कमान संभाल रही शिवानी शिवाजी रॉय (रानी मुखर्जी) का सामना इस बार 'भिखारी माफिया' और 'अंग तस्करी' (Organ Trafficking) के एक खौफनाक नेटवर्क से होता है। इस अंधेरे साम्राज्य की बागडोर 'रानी अम्मा' (मल्लिका प्रसाद) के हाथ में है। अम्मा का किरदार इतना क्रूर और प्रभावशाली है कि वह शहर की गलियों से लेकर सत्ता के गलियारों तक अपनी पकड़ रखती है। फिल्म का पहला भाग सस्पेंस और थ्रिल से भरपूर है, जो दर्शकों को अपनी सीट से बांधे रखता है।
इस बार फिल्म का असली सरप्राइज पैकेज विलेन 'अम्मा' के रूप में मल्लिका प्रसाद हैं। उनकी परफॉर्मेंस इतनी डरावनी है कि जब भी वह पर्दे पर आती हैं, दर्शकों के रोंगटे खड़े हो जाते हैं। वहीं, रानी मुखर्जी के किरदार 'शिवानी' में इस बार वह पुरानी गहराई और शांत ऊर्जा की कमी खलती है। कई सीन्स में रानी काफी लाउड और ड्रामेटिक नजर आती हैं, जो उनके मूल किरदार की सादगी के खिलाफ जाता है। जानकी बोदीवाला ने अपनी भूमिका के साथ न्याय करने की कोशिश की है, लेकिन कमजोर राइटिंग के कारण उनका किरदार दबकर रह गया है।
फिल्म का सबसे कमजोर हिस्सा इसका 'क्लाइमैक्स' है। जिस रोमांच और सस्पेंस के साथ कहानी आगे बढ़ती है, वह अंत तक आते-आते अपनी पकड़ खो देती है। क्लाइमैक्स में वो भावनात्मक गहराई नहीं दिखती जो पिछली दो फिल्मों की जान थी। निर्देशक अभिराज मीनावाला ने स्केल बड़ा करने के चक्कर में 'मर्दानी' की उस 'रॉ' और 'रियलिस्टिक' पहचान को थोड़ा खो दिया है। हालांकि, फिल्म का बैकग्राउंड स्कोर (BGM) और सिनेमैटोग्राफी बेहद शानदार है, जो सस्पेंस को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
कुल मिलाकर, 'मर्दानी 3' एक अच्छी क्राइम थ्रिलर है, लेकिन यह अपनी पहली फिल्म के बेंचमार्क को छू नहीं पाती। मल्लिका प्रसाद की बेहतरीन अदाकारी के लिए इसे एक बार देखा जा सकता है।