मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 2026 को 'कृषक कल्याण वर्ष' घोषित किया। सरसों पर भावांतर योजना, 30 लाख सोलर पंप और सिंचाई परियोजनाओं से बदलेगी मप्र के किसानों की किस्मत।
By: Ajay Tiwari
Jan 11, 20265:53 PM
भोपाल: स्टार समाचार वेब
मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने रविवार, को भोपाल के जंबूरी मैदान में आयोजित एक विशाल किसान सम्मेलन में वर्ष 2026 को आधिकारिक रूप से “कृषक कल्याण वर्ष” के रूप में मनाने की घोषणा की। मध्यप्रदेश देश का ऐसा पहला राज्य बन गया है जहाँ पूरा एक वर्ष किसानों के समग्र उत्थान और उनकी आय दोगुनी करने के संकल्पों को समर्पित किया गया है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि कृषि प्रदेश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है और किसानों की खुशहाली में ही प्रदेश की समृद्धि निहित है।

खेती को लाभ का धंधा बनाने के लिए मास्टर प्लान
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सम्मेलन के दौरान 'विकास पोर्टल' (ई-विकास, वितरण एवं कृषि उर्वरक आपूर्ति समाधान प्रणाली) का शुभारंभ किया। उन्होंने घोषणा की कि सोयाबीन के बाद अब सरसों की फसल को भी 'भावांतर योजना' के दायरे में लाया जाएगा, जिससे किसानों को बाजार के उतार-चढ़ाव से सुरक्षा मिलेगी। साथ ही, अगले तीन वर्षों में प्रदेश के 30 लाख किसानों के खेतों में सोलर पंप लगाने का लक्ष्य रखा गया है, ताकि वे 'अन्नदाता' के साथ-साथ 'ऊर्जादाता' भी बन सकें।
सिंचाई और अधोसंरचना पर विशेष जोर
प्रदेश में सिंचाई के रकबे को 65 लाख हेक्टेयर से बढ़ाकर वर्ष 2028-29 तक 100 लाख हेक्टेयर करने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य तय किया गया है। इसके लिए केन-बेतवा, पार्वती-कालीसिंध-चंबल और ताप्ती ग्राउंड वॉटर रिचार्ज जैसी बड़ी परियोजनाओं के माध्यम से 25 जिलों की 16 लाख हेक्टेयर भूमि को सिंचित किया जाएगा। इसके अतिरिक्त, डिंडोरी में 'श्रीअन्न अनुसंधान केंद्र' की स्थापना और सभी मंडियों के आधुनिकीकरण के जरिए कृषि तंत्र को नई ऊंचाई दी जाएगी।
कृषक कल्याण के 10 मुख्य संकल्प:
आय वृद्धि: आधुनिक तकनीक और नवाचार से किसानों की आमदनी बढ़ाना।
प्राकृतिक खेती: जैविक और प्राकृतिक कृषि को मिशन मोड में बढ़ावा देना।
ऊर्जादाता किसान: कृषि अपशिष्ट से बायोगैस और एथेनॉल निर्माण।
माइक्रो इरिगेशन: 'पर ड्रॉप मोर क्रॉप 2.0' के तहत जल संरक्षण।
एग्री ब्रांडिंग: मप्र के कृषि उत्पादों की ग्लोबल ब्रांडिंग और निर्यात पर फोकस।
फूड प्रोसेसिंग: 'खेत से फैक्ट्री तक' विजन के तहत फूड पार्कों की स्थापना।
सौर ऊर्जा: सोलर पंपों के माध्यम से बिजली की आत्मनिर्भरता।
तकनीकी सर्वे: फसल नुकसानी का आधुनिक तकनीक (ड्रोन/सैटलाइट) से सटीक सर्वे।
स्टार्ट-अप: युवाओं को कृषि आधारित स्टार्ट-अप से जोड़ना।
शून्य ब्याज: किसानों को 0% ब्याज पर ऋण की सुविधा निरंतर जारी रखना।
फरवरी: कोदो-कुटकी बोनस का वितरण।
मार्च: प्राकृतिक खेती पर राज्य स्तरीय संगोष्ठी।
मई: नर्मदापुरम में भव्य 'आम महोत्सव'।
अक्टूबर-नवंबर: नरसिंहपुर में गन्ना महोत्सव और प्रदेशव्यापी फूड फेस्टिवल।
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