सतना के नारायण तालाब की बाउंड्री वॉल और पानी निकासी पुलिया में दरारें सामने आई हैं। पिछले साल भारी जलभराव की चपेट में आई उतैली बस्ती एक बार फिर खतरे में है। 4 करोड़ की लागत से हो रहे निर्माण में गुणवत्ता की अनदेखी और तय समय सीमा के बाद भी अधूरा कार्य स्थानीय प्रशासन की गंभीर लापरवाही को दर्शाता है।

सतना, स्टार समाचार वेब
शहर में चल रहे निर्माण व विकास कार्यों में किस तरह की लीपापोती चल रही है इसका एक उदाहरण मारुति नगर वार्ड क्र. 10 में तो सामने आया ही था अब वार्ड क्र. 22 स्थित नारायण तालाब की बाउंड्री वॉल के निर्माण के गुणवत्ता के साथ खिलवाड़ किए जाने का मामला भी सामने आ गया है। इस मामले में आरोप है कि संबंधित संविदाकार द्वारा नारायण तालाब में बनाई जा रही बाउंड्री वॉल और तालाब के पानी निकासी के लिए जो पुलिया बनाई गई है उसमें भी दरार आ गई है। नारायण तालाब में चल रहे निर्माण कार्य की गुणवत्ता के साथ खिलवाड़ किसी निर्माण कार्य की गुणवत्ता तक ही सीमित नहीं है बल्कि तालाब की बाउण्ड्री वॉल के निर्माण में की गई गड़बड़ी उतैली वासियों को एक बार फिर खतरे में डाल सकती है। दरअसल पिछले साल सितंबर माह में नारायण तालाब की मेड़ बह जाने से उतैली की कई कॉलोनियां जलमग्न हो गई थीं, लोगों के घरों में पानी भर गया था जिससे उनकी गृहस्थी का सामान नष्ट हुआ ही था साथ ही कई वाहन भी बह गए थे। वह खौफनाक मंजर एक बार फिर सामने न आए इसके लिए जरूरी है कि नारायण तालाब में जो भी निर्माण कार्य चल रहा है वह पूर्ण गुणवत्ता के साथ हो। लेकिन ऐसा नहीं हो रहा है। यहां कार्य कराने की जिम्मेदारी जिन लोगों पर वे संविदाकार के साथ सांठगांठ कर निर्माण कार्यों में लीपापोती कर रहे हैं।
6 माह में होना था कार्य, अब भी अधूरा
बताया जा रहा है कि लगभग 70 साल पुराने नारायण तालाब के निर्माण कार्य के लिए सितंबर 2024 की घटना के बाद दूसरा टेंडर स्टेपअप बिल्डिंग कांस्ट्रक्शन जबलपुर को 4 करोड़ 5 लाख रुपए में 20 दिसंबर 2024 को दिया गया था। निर्माण कार्य 6 माह में पूर्ण करना था। लेकिन निर्माण कार्य पूर्ण करने के लिए तय की गई समय सीमा बीत जाने के बावजूद अभी तक मात्र 60 फीसदी काम ही हो पाया है। उस काम में भी जमकर गड़बड़ी की गई है और यह गड़बड़ी सबके सामने नजर आ रही है।
138 लोगों को मुआवजे का इंतजार
बताया जाता है कि सितंबर 2024 में जब नारायण तालाब की मेड़ फूटी थी उस समय उतैली के अलग-अलग कॉलोनियों के 138 लोग प्रभावित हुए थे। जिनका मुआवजा आरबीसी एक्ट के तहत बना जरूर लेकिन आज तक उन्हें मुआवजा नहीं मिला।


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