नितिन नबीन 20 जनवरी को निर्विरोध भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष चुने जा सकते हैं। जानें पीएम मोदी के इस युवा सेनापति के सामने बंगाल चुनाव, जाति जनगणना और वन नेशन वन इलेक्शन जैसी कौन सी चुनौतियां खड़ी हैं
By: Ajay Tiwari
Jan 15, 20263:44 PM
नई दिल्ली: स्टार समाचार वेब
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में एक बड़े पीढ़ीगत बदलाव की पटकथा तैयार हो चुकी है। बिहार के दिग्गज नेता और वर्तमान कार्यकारी अध्यक्ष नितिन नबीन 19 जनवरी को राष्ट्रीय अध्यक्ष पद के लिए अपना नामांकन दाखिल करेंगे। 20 जनवरी को उनके निर्विरोध अध्यक्ष चुने जाने की पूरी संभावना है। 45 वर्षीय नबीन भाजपा के इतिहास के सबसे युवा अध्यक्ष होंगे, जिनका कार्यकाल जनवरी 2026 से जनवरी 2029 तक रहेगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, अमित शाह और जेपी नड्डा जैसे दिग्गज उनके प्रस्तावक बनेंगे।
2026 में पश्चिम बंगाल, असम, तमिलनाडु और केरल जैसे राज्यों में चुनाव हैं। बंगाल में ममता बनर्जी की टीएमसी से मुकाबला और दक्षिण भारत (विशेषकर तमिलनाडु) में पार्टी की पैठ बनाना नबीन के लिए 'लोहे के चने चबाने' जैसा होगा। उन्होंने तमिलनाडु में पहले ही 90 दिनों का विशेष अभियान शुरू कर दिया है।
2027 के बाद लागू होने वाले 33% महिला आरक्षण के लिए नबीन को महिला नेतृत्व की नई खेप तैयार करनी होगी। उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती यह सुनिश्चित करना होगा कि आरक्षण का लाभ नेताओं की पत्नियों या माताओं के बजाय वास्तविक जमीन कार्यकर्ताओं को मिले, ताकि 'वंशवाद' के आरोपों से बचा जा सके।
यदि दिसंबर 2024 का संविधान संशोधन विधेयक लागू होता है, तो 2029 के चुनाव एक साथ होंगे। नबीन को पार्टी के पूरे संसाधन, रणनीति और गठबंधन प्रबंधन को इस ऐतिहासिक बदलाव के अनुरूप ढालना होगा।
2027 की जनगणना में जाति गणना शामिल होने से नए समीकरण बनेंगे। नबीन को ब्राह्मण-बनिया छवि से निकलकर पिछड़ों और दलितों की ओर बढ़ रही भाजपा के पुराने कोर वोट बैंक को बचाए रखते हुए नए वर्गों को साधने की दोहरी चुनौती का सामना करना होगा।
पीएम मोदी के विजन के अनुसार, नबीन को ऐसे 1 लाख युवाओं को राजनीति में लाना है जिनका कोई राजनीतिक बैकग्राउंड नहीं है। इसके लिए उन्हें पार्टी की राष्ट्रीय और प्रादेशिक इकाइयों में बड़े फेरबदल करने होंगे।
अमेरिका के बढ़ते टैरिफ और चीन के साथ व्यापारिक असंतुलन व सीमा विवाद का सीधा असर भारत की अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा। सत्ताधारी पार्टी के अध्यक्ष होने के नाते नबीन को जनता के बीच जाकर इन जटिल मुद्दों पर सरकार का बचाव और संदेश स्पष्ट करना होगा।
नितिन नबीन कई दिग्गज नेताओं से जूनियर हैं। शिवराज सिंह चौहान, धर्मेंद्र प्रधान और मनोहर लाल खट्टर जैसे दिग्गजों के बीच अपनी स्वीकार्यता बनाए रखना और उत्तर प्रदेश व बिहार जैसे राज्यों की आंतरिक गुटबाजी को संभालना उनके नेतृत्व कौशल की असली परीक्षा होगी।