बृजेश पांडे का कॉलम: रीवा में मिशन डायरेक्टर के दौरे से स्वास्थ्य महकमा घबराया हुआ है। अस्पतालों की सच्चाई छिपाने के लिए बाहरी चमक-दमक पर ज़ोर दिया जा रहा है, जबकि मरीज बदहाल व्यवस्था और 108 एम्बुलेंस जैसी ‘बीमार सेवाओं’ के बीच जूझ रहे हैं।

डायरेक्टर की आहट: 'घबराहट' में अस्पताल
रीवा संभाग में मिशन डायरेक्टर के आने की खबर से स्वास्थ्य महकमे में ऐसी खलबली मची है, मानो कोई आपदा आने वाली हो। संभागीय स्तर की बैठक से पहले जिला अस्पताल का निरीक्षण? अरे बाप रे! अधिकारियों के हाथ-पांव ऐसे फूले हैं कि बेचारे शायद अपने ही चेंबर की ठंडी हवा भी ठीक से नहीं ले पा रहे होंगे। सुना है, दो-तीन डॉक्टरों का 'स्वागत' ग्रुप भी तैयार है और धवारी से आदेश पर आदेश निकल रहे हैं कि "मेहमान नवाजी में कोई कमी न रहे।" चादरें बदली जा रही हैं, स्टाफ को ड्रेस कोड में आने की हिदायत दी जा रही है। अंदरखाने फुसफुसाहट चल रही है कि डायरेक्टर साहिबा को अस्पताल की बाहरी खूबसूरती और रंग-रोगन दिखाकर ही खुश करने की कोशिश की जाएगी। अंदर की सच्चाई तो वही जानें। लगता है, ये अस्पताल नहीं, जाने दो क्या कहें... जहाँ "अतिथि देवो भव" का पालन डायरेक्टर के लिए होता है, मरीजों के लिए नहीं।
'मीटिंग-मीटिंग' और फिर 'जीरो' नतीजा
स्वास्थ्य विभाग में इस समय 'समीक्षाओं' का दौर चल रहा है। अगर कोई लापरवाही हुई, तो बस एक और समीक्षा। राज्य और संभाग स्तर के अधिकारी आते हैं, डब्ल्यूएचओ की टीमें घूमती हैं, टीकाकरण से वंचित गर्भवती महिलाएं और बच्चे मिलते हैं, और फिर क्या? सिर्फ समीक्षा। रीवा के आला अधिकारियों ने तो पांच घंटे की मैराथन बैठक भी कर ली, लेकिन नतीजा वही ढाक के तीन पात। सिर्फ 'सुधार के निर्देश' देकर कहानी खत्म और हाँ, आठ विकासखंडों के खंड चिकित्सा अधिकारी अनुपस्थित रहे, लेकिन उन पर कोई कार्रवाई नहीं होगी, क्योंकि "वो भी अपने विकासखंड के अधिकारी ही हैं," और "साहब का आदेश नहीं मानते!" वाह रे सिस्टम! लगता है, समीक्षा का मतलब अब सिर्फ 'दिखावा' और 'समय बर्बाद करना' रह गया है।
साहब हमारे 'एक्टिव' हैं... सिर्फ नोटिस देने में!
एक बात तो माननी पड़ेगी, धवारी स्थित कार्यालय में बैठे हमारे जिले के आला अधिकारी 'एक्टिव' बहुत हैं! जरा सी भी सोशल मीडिया पर हलचल हुई नहीं कि तुरंत 'संज्ञान' लेकर 'कार्रवाई' होती है। और हाँ, कार्रवाई में केवल 'नोटिस' जारी होती है, उसके बाद कुछ नहीं! सुना है, साहब ने एक महीने में न जाने कितनी नोटिसें जारी की होंगी लेकिन शायद ही किसी एक-दो का जवाब आया होगा। लगता है, नोटिस जारी करना ही इनकी 'एक्टिवनेस' का पैमाना है। समस्या का समाधान हो या न हो, एक नोटिस तो जरूर जाएगी!
चेंबर से बाहर नहीं आते साहब
जिला अस्पताल में मरीजों के साथ हमेशा से 'दोयम दर्जे' का व्यवहार होता आया है, और यह प्रथा भला अब क्यों बदलेगी? हमारे आला अधिकारियों ने तो नई बिल्डिंग में अपना डेरा डाल लिया है, जहाँ फुल एसी, वेल फर्निश्ड चेंबर हैं और बाहर से मंगाई गई 'बड़ी महंगी' कुर्सी भी! इधर, बेचारे मरीज पुरानी इमारतों में तड़पने को मजबूर हैं, ओपीडी में बैठने के लिए कुर्सी तक नहीं। बाहर से भवनों का 'कायाकल्प' हो रहा है, लेकिन अंदर मरीजों को 'अनट्रेंड स्टाफ' से इलाज मिल रहा है, 'मवाली' मरीज का गला काट कर चले जाते हैं, और सुरक्षा के नाम पर 'ठेके के गार्ड' अस्पताल परिसर में ढूंढे नहीं मिलते। कूलर तो लगा दिए गए हैं, लेकिन हवा अभी भी सीलिंग फैन ही दे रहा है। लगता है, अब अस्पताल प्रबंधन को यह आदेश भी जारी कर देना चाहिए कि "मरीज स्ट्रेचर और व्हीलचेयर घर से ही लेकर आएं।"
खुद बीमार, क्या ढोएंगी मरीज?
मरीज को नया जीवन देने वाली 'जीवनदायिनी' 108 एम्बुलेंस की हालत ऐसी है कि उनका कोई 'माई-बाप' ही नहीं है। मरीज को लाते-लाते कहाँ रुक जाए, कोई भरोसा नहीं। कई बार तो परिजनों को धक्का लगाने तक मजबूर होना पड़ता है। कुल मिलाकर, ये वाहन खुद ही बीमार हैं, किसी मरीज को क्या ढोएंगी? और इनकी निगरानी के लिए नियुक्त 'समन्वयक अधिकारी' का न तो कोई दफ्तर है और न ही कहीं बैठने का ठिकाना। कहने को तो जिले में 60 वाहन हैं, लेकिन मौके पर एक भी मरीज को उपलब्ध नहीं हो पाता। लगता है, ये 108 एम्बुलेंस नहीं, बल्कि 'खटारा एक्सप्रेस' हैं, जो बस सरकारी कागजों पर चलती हैं।

जबलपुर हाईकोर्ट का ऐतिहासिक फैसला, सरकारी कर्मचारियों को मिलेगा 100% वेतन और एरियर्स

खरमास 2025-2026: कब से कब तक रहेगा, जानें शुभ कार्यों की मनाही का कारण

ऑपरेशन सिंदूर...मुझे एक तस्वीर दिखा दो...जिसमें भारत का एक गिलास भी नहीं टूटा हो

लागू होंगे नए अवकाश नियम: CCL में वेतन कटौती, EL को 'अधिकार' नहीं मानेगा MP वित्त विभाग

आहत जनता को राहत...निचले स्तर पर आई थोक महंगाई

जैतवारा से लेकर बारामाफी तक आक्रोश

सुरक्षित और नेचुरल तरीके से बाल करना है काले तो अपनाएं ये उपाय

बची हुई चाय को दोबारा गर्म करके पीने क्या होगा, जानें इसके बारे में?

अगर 40 की उम्र कर ली है पार और रहना चाहते हैं तंदरुस्त तो अपनाएं ये आदतें

ठंडा पानी पीने और मीठा खाने पर दांतों में होती है झनझनाहट तो हो जाएं सावधान, नहीं तो हो सकती है बड़ी समस्या

ठंड में बढ़ जाती है डिहाइड्रेशन की समस्या, जानें क्या है कारण ?

तनाव से चाहिए है छुटकारा तो इन चीजों से करें तौबा, अपनाएं ये सलाह
पत्रकार करण उपाध्याय के कॉलम प्लेटफ़ॉर्म में सतना रेलवे विभाग के गलियारों में घूम रही दिलचस्प कहानियां – किसी अधिकारी की मलाईखोरी के किस्से, किसी की ईमानदारी की दुहाई, विकास की धीमी चाल और खुरचन की मिठास तक। प्लेटफॉर्म पर सुनाई दे रही ये चर्चाएं यात्री से लेकर अफसर तक सबको गुदगुदा रही हैं।
प्रो. रवीन्द्रनाथ तिवारी अपने लेख में कहते हैं कि भारत की 79 वर्षों की स्वाधीनता यात्रा अब वास्तविक स्वतंत्रता की ओर अग्रसर है। वे बताते हैं कि राजनीतिक आज़ादी पर्याप्त नहीं, बल्कि शिक्षा, न्याय, अर्थव्यवस्था और संस्कृति में ‘स्व’ के तंत्र की स्थापना ही असली राष्ट्रनिर्माण है। अमृतकाल का संकल्प भारत को विश्वगुरु पद पर प्रतिष्ठित करने का है।
जयराम शुक्ल अपने लेख में बताते हैं कि असली राष्ट्रप्रेम तिरंगा रैली निकालने या दिखावे से नहीं, बल्कि अपने-अपने दायित्व को ईमानदारी और निष्ठा से निभाने में है। शहीद पद्मधर सिंह से लेकर कैप्टन विक्रम बत्रा तक के बलिदान का स्मरण करते हुए वे कहते हैं कि तिरंगा आचरण में दिखना चाहिए, आवरण में नहीं।
इस रिपोर्ट में जानिए कैसे सरकारी अस्पतालों में मरीजों से चंदा वसूला जा रहा है, निजी अस्पतालों को विभागीय बाबुओं का संरक्षण मिला है और स्वास्थ्य विभाग में भ्रष्टाचार की गहरी जड़ें फैल चुकी हैं। पढ़ें ब्रजेश पाण्डेय की खास रिपोर्ट जो उठाती है स्वास्थ्य व्यवस्था की सच्चाई की परतें।
रीवा की राजनीति में एक बार फिर श्रीनिवास तिवारी की जयंती पर कांग्रेस और बीजेपी आमने-सामने आ गए हैं। वहीं बीजेपी में आंतरिक असंतोष, कांग्रेस को बैठे-बिठाए मिला मुद्दा, और निगम-मंडल की कुर्सियों के लिए शुरू हुआ जोड़-जुगाड़, इन सबने विंध्य की राजनीति को और दिलचस्प बना दिया है। पढ़ें वरिष्ठ पत्रकार रमाशंकर मिश्रा का ब्लॉग पॉवर गैलेरी।
पत्रकार धीरेंद्र सिंह राठौर के ब्लॉग पावर गैलरी में पढ़िए — कैसे एक नेता जी दो चुनाव हारने के बाद बिजली के मीटरों की चिंगारी से फिर राजनीति में कूद पड़े हैं। साथ ही जानिए कि कैसे सरकारी कर्मचारी ट्रांसफर के बाद भी अधर में लटके हैं, अफसरशाही ने जनप्रतिनिधियों को बेबस कर दिया है और सरपंच साहब ने पंचायत भवन को दुकान में बदल डाला है।
सतना संभाग में बिजली विभाग की ‘कुर्सी’ को लेकर मची होड़, नए अफसर के आने से विभाग में लगा ‘करंट’। स्मार्ट मीटर से लेकर वसूली तक की नई योजनाएं, और गर्मी में सोए अधिकारी अब बारिश में ‘चार्ज’ होकर आम जनता पर टूटे। पढ़ें बृजेश पाण्डेय की तीखी और चुटीली रिपोर्ट।
रीवा में आयोजित पर्यटन कान्क्लेव ने विंध्य क्षेत्र में पर्यटन विकास की नई शुरुआत की है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा चित्रकूट, मुकुंदपुर, संजय दुबरी जैसे ऐतिहासिक और धार्मिक स्थलों को पर्यटन के नक्शे पर स्थापित करने की पहल न केवल क्षेत्रीय विकास, बल्कि रोजगार और सांस्कृतिक संरक्षण को भी गति देगी।
सतना के जिला अस्पताल में ब्लड बैंक ‘राम’ भरोसे चल रहा है। दलालों की पौ-बारह है और मरीजों की जान आफत में। अधिकारी मौन, जांच सिर्फ चाय तक सीमित। इंजीनियर से लेकर ठेकेदार तक की करतूतों पर ‘बड़े साहब’ का रौद्र रूप देखने को मिला, लेकिन कार्रवाई नदारद। पढ़िए पत्रकार बृजेश पांडे का ब्लॉग।
पुलिस विभाग की अंदरूनी राजनीति, संबंधों का असंतुलन, पसंद-नापसंद से उपजी तकरार, और अफसरों की संवादहीनता की हकीकत को बारीकी से उजागर करता अमित सेंगर का व्यंग्यात्मक विश्लेषण। थानों से लेकर अफसरों की केबिन तक फैली चुप्पियों और शिकायतों का दिलचस्प दस्तावेज़।