रीवा के संजय गांधी स्मृति चिकित्सालय में स्वास्थ्य सुविधाओं की बदहाली के बीच पोस्टमार्टम के आंकड़े डराने लगे हैं। साल खत्म होने से पहले ही 1063 पीएम हो चुके हैं। डॉक्टरों की कमी, प्राइवेट प्रैक्टिस, नाइट राउंड का अभाव और लगातार रेफरल ने सरकारी दावों की पोल खोल दी है।

हाइलाइट्स:
रीवा, स्टार समाचार वेब
संजय गांधी अस्पताल में स्वास्थ्य सुविधाएं दम तोड़ रही हैं। मौत के आंकड़े डराने वाले हैं। अभी साल खत्म भी नहीं हुआ और मरने वालों का 1 हजार का आंकड़ा पार हो गया। यह आंकड़ा एसजीएमएच में हुए पीएम का है। इसमें अधिकांश एक्सीडेंट में मरने वाले हैं। सामान्य बीमारियों से मरने वालों की कोई सीमा ही नहीं है।
विंध्य का सबसे बड़ा अस्पताल इस समय बदहाली की मार झेल रहा है। यहां आए दिन कोई न कोई बवाल होता ही रहता है। मरीजों की मौत यहां आम हो गई है। यहां सामान्य बीमारियों का भी इलाज मुश्किल हो गया है। लगातार मौत के आंकड़े बढ़ रहे हैं। साल खत्म होने जा रहा है। इस एक साल में संजय गांधी अस्पताल में पीएम ने भी 1 हजार का आंकड़ा पार कर लिया है। सूत्रों की मानें तो यह आंकड़ा पिछले साल की तुलना में कहीं अधिक है। इसमें हालांकि दो दिन एमरजेंसी के डॉक्टरों के पीएम की संख्या जुड़ी नहीं है। यदि उनके भी आंकड़े जोड़ दिए जाएं तो यह आंकड़ा 1500 से भी पार निकल जाएगा। इन पोस्टमार्टम के आंकड़ों से ही स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है। एक तरफ तो डीन श्याम शाह मेडिकल कॉलेज सब कुछ बढ़ियां होने की बात कह रहे हैं। वहीं दूसरी तरफ यह आंकड़े उनके दावों की भी पोल खोल रहे हैं।
गायनी विभाग की हालत सबने देखी
संजय गांधी अस्पताल के गायनी विभाग की हालत किसी से छुपी नहीं है। यहां अब कहने को नाम मात्र के चिकित्सक ही बचे हैं। आपसी लड़ाई के कारण कई चिकित्सक नौकरी छोड़ चुके हैं। आए दिन उपचार में लापरवाही के कारण मरीजों की जान तक जा रही है। ओटी में आग तक लग गई थी। नवजात को ओटी में ही छोड़ दिया गया था। गायनी विभाग की हालत भी अब नाजुक हो चली है।
प्राइवेट प्रैक्टिस बनी सबसे बड़ी समस्या
संजय गांधी अस्पताल के अधिकांश चिकित्सकों ने अपना खुद का निजी अस्पताल खोल लिया है। इसके कारण पूरा समय अस्पताल को नहीं देते। रात में कोई भी सीनियर डॉक्टर राउंड पर नहीं आता। यहां तक की गहन चिकित्सा इकाई भी पीजी छात्रों के भरोसे ही चलती है। सभी सीनियर डॉक्टरों की ड्यूटी लगती तो है लेकिन राउंड पर कोई नहीं आता। इसी लापरवाही के कारण अस्पताल में मरने वाले मरीजों की संख्या बढ़ रही है।
एयरलिफ्ट के मामले में भी रीवा टॉप पर
रीवा में सुपर स्पेशलिटी अस्पताल भी हैं। विंध्य का सबसे बड़ा अस्पताल संजय गांधी स्मृति चिकित्सालय है। इसके बाद भी यहां से मरीजों के रेफर का सिलसिला नहीं थम रहा। यहां पर्याप्त और एक्सपर्ट चिकित्सक हैं। फिर भी एयरलिफ्ट के मामले में रीवा प्रदेश में टॉप पर है। सामान्य बीमारियां का इलाज भी यहां मुश्किल हो गया है।
रात में नहीं रहते डॉक्टर, राउंड भी नहीं करते
सबसे बुरी हालत मेडिसिन विभाग की है। यहां आकस्मिक गहन चिकित्सा इकाई बनी हुई है। यहां सीरियस मरीजों को रखा जाता है। यहां सबसे अधिक मरीज दम तोड़ते हैं। हर दिन दो से चार मरीजों की मौत होती है। एसपीडब्लू विभाग ही पीजी छात्रों के भरोसे चल रहा है। सीनियर डॉक्टरों की नाइट ड्यूटी लगाई तो जाती है लेकिन कोई भी नहीं आता। रोस्टर बना हुआ है। इसके बाद भी डॉक्टरों पर कोई कंट्रोल नहीं है।
साल भर में पीएम पर एक नजर
महीना पीएम संख्या
योग 1063

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