सतना जिले के ग्रामीण आज भी सड़क जैसी मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं। चित्रकूट और त्यौंधरा जैसे गांवों में झोली में प्रसूता और कंधे पर बुजुर्गों को अस्पताल ले जाने की घटनाएं प्रशासनिक और राजनीतिक उदासीनता की पोल खोल रही हैं। वहीं सितपुरा-छींदा-बचवई मार्ग की बदहाली के विरोध में ग्रामीण सड़क पर धान रोपने का प्रदर्शन कर रहे हैं।

हाईलाइट्स
सतना, स्टार समाचार वेब
सड़कों पर हर साल करोड़ों खर्च करने के बाद भी जिले के कई गांव ऐसे हैं जो सड़क जैसी बुनियादी सुविधाओं के लिए भी संघर्ष कर रहे हैं। इन गांवों से गाहे-बगाहे ऐसी तस्वीरें सामने आती हैं जो प्रशासनिक तंत्र के साथ साथ राजनीतिक तंत्र को भी कटघरे में खड़ा करती हैं। अस्पताल तक का सफ रतय करने कहीं बुजुर्गोँ को अपने परिजनों के कंधे की सवारी करनी पड़ती है तो कहंी प्रसूताओं को चद्दर की झोली में समाकर अस्पताल पहुंचने के लिए बाध्य होना पड़ता है। कई गांवों के हालात तो यह हैं छात्र स्कूल तक पहुंचने से वचित हो रहे हैं। आजादी के 7 दशक से अधिक समय बीतने के बाद भी शनिवार को चित्रकूट व त्यौंधरा क्र. 2 गांव की दो ऐसी ही तस्वीरों ने एक बार पुन: सरकार के ग्राम्य विकास के दावों की पोल खोल दी है।
शर्मनाक: झोली में प्रसूता को लेकर अस्पताल पहुंचे परिजन
जिस चित्रकूट के सर्वांगीण विकास की बड़ी-बड़ी बाते हो रही हैं, उसी चित्रकूट के नगर पंचायत क्षेत्र अंतर्गत आने वाले वार्ड क्र. 15 की एक शर्मानाक तस्वीर सामने आई जिसमें एक प्रसूता को अस्पताल पहुंचाने के लिए परिजन झोली में भरकर ले जा रहे हैं। शुक्रवार को एक नाती द्वारा अपनी दादाी को कंधे में बैठाकर अस्पताल ले जाने के मामले के 24 घंटे के भीतर झोली में प्रसूता को ले जाने की तस्वीर सरकार के ग्राम्य विकास के दावों को झुठलाती नजर आ रही है। बीते एक साल में ऐसी कई तस्वीरें सामने आने के बाद प्रशासनिक अफ सरों ने थर पहाड़ गांव के दौरे किए , बड़े बड़े वादे गिनाए लेकिन थर पहाड की कराहती जिÞंदगी को अब तक मुकाम नहीं मिल सका है।
क्या है मामला
दरअसल थरपहाड़ निवासी शोभा मवासी को तेज प्रसव पीड़ा हुई । परिजनों ने बड़ी उम्मीद से एंबुलेंस को सूचना दी । सूचना पाकर एंबुलेंस रवाना ता ेहुई लेकिन थरपहाड़ गांव तक सड़क न होने के कारण एंबुलेंस के पहिए तकरीबन दो किमी पहले ही थम गए। नतीजतन शोभा के पति अंजू मवासी व अन्य परिजनों ने चद्दर की ‘झूला एंबुंलेंस’तैयार की और शोभा को उसमें भरकर दुर्गम व पथरीले रास्ते से लेकर मुख्य मार्ग तक पहुंचे। झोला एंबुलेंस में प्रसूता को ले जाते जिसने भी देखा उसका मन व्यवस्था के प्रति वितृष्णा से भर उठा। गौरतलब है कि ऐसा ही नजारा शुक्रवार को भी देखने को मिला था जब 65 वर्षीया बीमार दादी राजकली को अपनी पीठ में बैठाकर उसके नाती महेंद्र सिंह ने ऐसी ही यात्रा की थी। ग्रामीणों का कहना है कि चुनाव के दौरान हर छोटा-बड़ा नेता यहां आकर विकास की गंगा बहाने का वादा करता है। इसी प्रकार अधिकारी भी पहुंचकर जल्द से जल्द समस्या निदान का वादा करते हैं लेकिन सब कुछ भुला दिया जाता है। इसी गांव की एक और महिला शोभा मवासी, पत्नी अंजू मवासी को जब तेज प्रसव पीड़ा हुई, तो परिजन उन्हें कपड़े की झोली में रखकर जैसे-तैसे अस्पताल तक ले गए। एम्बुलेंस गांव की सीमा में नहीं आ सकी क्योंकि गांव तक सडक ही नहीं है। ये घटनाएं विकास की खोखली परिभाषा और प्रशासनिक असंवेदनशीलता को उजागर करती हैं। गांववासियों का कहना है कि उन्होंने कई बार प्रशासन से गुहार लगाई, लेकिन हर बार उन्हें आश्वासन के सिवा कुछ नहीं मिला। कलेक्टर द्वारा निरीक्षण कर शीघ्र समाधान का वादा किया गया था, लेकिन महीनों बीत जाने के बाद भी कोई कार्यवाही नहीं हुई। अब तो लोगों को विश्वास ही नहीं रहा कि कोई अधिकारी या जनप्रतिनिधि उनकी पीड़ा समझेगा।
सितपुरा-छींदा-बचवई का मार्ग बदहाल आज धान रोपेंगे किसान
जिले के रैगांव विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत आने वाला सितपुरा-छींदा -बचवई मार्ग की जर्जरता और इसको लेकर बरती जा रही प्रशासनिक उदासीनता ने ग्रामीणों को आक्रोशित कर दिया है। कई बार मांग उठाने के बाद भी इस सड़क मार्ग का निर्माण न होने से नाराज ग्रामीणों व किसानों ने अब प्रशासनिक अधिकारियों का ध्यान आकृष्ट कराने आज विरोध स्वरूप सड़क पर धान रोपने का निर्णय लिया है। उप सरपंच आरवेन्द्र सिंह गांधी के नेतृत्व में होने वाले धान रोपण कार्यक्रम में आसपास के कई गांवों के ग्रामीण भाग लेंगे। गौरतलब है सितपुरा -छींदा-बचवई मार्ग इन दिनों गड्ढों में त्बदील हो गया है जिससे इस मार्ग से जुड़े बरहा , बचवई, हरदुआ, छींदा, खम्हरिया, पटना, बड़ी खम्हरिया, रजरवार, महाकोना जैसे एक दर्जन से अधिक गांवों के हजारों लोग परेशान हैं। सबसे अधिक प्रभावित वे स्कूली छात्र हैं जो सितपुर स्थित विद्यालय में पढ़ने के लिए आते हैं। जिम्मेदारों द्वारा इस समस्या को नजरंदाज करने के कारण आज सड़क पर धान रोपकर विरोध जताया जाएगा। उपसरपंच गांधी का कहना है कि जब सड़क ही खेत जैसी है तो फसल उगाने में बुराई क्या है?
ग्रामीण करेंगे विरोध प्रदर्शन
आज बचवई, बरहा, छींदा, हरदुआ, खम्हरिया,बम्हौर आदि गांवों के ग्रामीण जर्जर सड़क मार्ग को लेकर असंतोष प्रदर्शित करने सड़क पर धान की रुपाई करेंगे। इस दौरान इन गांवों के उप सरपंच आरवेन्द्र सिंह गांधी, बादल सिंह, जयवेन्द्र सिह, नन्हें सिंह, रावेन्द्र सिंह, बिटलू सिंह, रामपाल चौधरी, विक्रम बागरी, महेन्द्र बागरी, लकी, लिटिल, शिवपाल दाहिया, सुशीला आदिवासी, रानी कोरी समेत कई ग्रामीण विरोध प्रदर्शन के लिए सड़क पर उतरेंगे।


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