इस होली अपनी त्वचा और बालों को केमिकल रंगों से बचाएं। जानिए घर पर हर्बल रंग बनाने के तरीके और रंग खेलने से पहले और बाद के जरूरी स्किन केयर टिप्स।
By: Ajay Tiwari
Feb 09, 20264:51 PM
फीचर डेस्क। स्टार समाचार वेब
होली यानी रंगों के संग उत्सव। यह पर्व रंगों, खुशियों और भाईचारे का पर्व है, लेकिन आधुनिक समय में होली खेलने के तरीकों में आए बदलावों ने इस उत्सव के साथ कुछ स्वास्थ्य जोखिम भी जोड़ दिए हैं। बाजार में मिलने वाले रासायनिक (Chemical) रंगों के कारण त्वचा, आंखों और बालों को गंभीर नुकसान पहुँचता है। ऐसे में हर्बल रंगों का चुनाव और प्री-होली स्किन केयर न केवल आपकी त्वचा को सुरक्षित रखते हैं, बल्कि पर्यावरण के प्रति आपकी जिम्मेदारी को भी दर्शाते हैं।
केमिकल रंगों के छिपे हुए खतरे
आजकल बाजारों में मिलने वाले सस्ते और चमकीले रंगों में भारी मात्रा में केमिकल्स पाए जाते हैं। बचें इन केमिकल रंगों से-
इन रसायनों के संपर्क में आने से त्वचा पर रैशेज, खुजली, एक्जिमा और गंभीर एलर्जी हो सकती है। यही कारण है कि विशेषज्ञ अब प्राकृतिक और हर्बल रंगों के इस्तेमाल पर जोर देते हैं।
हर्बल रंगों का महत्व और घर पर बनाने के तरीके
हर्बल रंग प्राकृतिक स्रोतों जैसे फूलों, पत्तियों और मसालों से बनाए जाते हैं। ये त्वचा के लिए सुरक्षित होने के साथ-साथ आसानी से धुल भी जाते हैं। आप इन्हें घर पर भी आसानी से तैयार कर सकते हैं-
रंग खेलने से पहले त्वचा और बालों की सुरक्षा
होली के रंगों से बचने का सबसे अच्छा तरीका 'सुरक्षा कवच' तैयार करना है। रंग खेलने निकलने से पहले यह जरूर करें-
होली के बाद रंगों को छुड़ाने का सही तरीका
रंग छुड़ाने की जल्दबाजी में त्वचा को जोर से रगड़ना सबसे बड़ी गलती है। इसके बजाय इन कोमल तरीकों को अपनाएं-
ठंडे पानी का प्रयोग: हमेशा ठंडे या सामान्य पानी से रंग धोएं। गर्म पानी रंगों को त्वचा पर और गहराई से जमा सकता है।
उबटन का जादू: बेसन, दही और नींबू के रस का लेप लगाएं। यह प्राकृतिक क्लीनर की तरह काम करता है।
साबुन के बजाय क्लींजर: कठोर साबुन का इस्तेमाल न करें, क्योंकि यह त्वचा को और शुष्क बना देता है। इसके बजाय सौम्य बॉडी वॉश या क्लींजिंग मिल्क का प्रयोग करें।
मॉइस्चराइजिंग: नहाने के बाद त्वचा पर अच्छी मात्रा में मॉइस्चराइजर या एलोवेरा जेल लगाएं ताकि खोई हुई नमी वापस आ सके।
सुरक्षित होली, सुखद होली
होली का आनंद तभी है जब उत्सव के बाद आप बीमार न पड़ें या आपकी त्वचा खराब न हो। हर्बल रंगों का उपयोग करके हम न केवल अपनी सुरक्षा करते हैं, बल्कि जल प्रदूषण को रोकने में भी मदद करते हैं। इस बार संकल्प लें कि हम रसायनों को त्यागकर प्रकृति के रंगों से होली खेलेंगे।
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