सतना जिले में प्रशासन के पर्याप्त यूरिया स्टॉक के दावों के बावजूद किसानों को खाद के लिए दिनभर लंबी कतारों में खड़ा रहना पड़ रहा है। रामनगर में हालात बिगड़ने पर पुलिस की मौजूदगी में यूरिया का वितरण किया गया। सरकारी गोदामों में भीड़ और निजी दुकानों पर महंगे दाम से किसान परेशान हैं।

हाइलाइट्स:
सतना, स्टार समाचार वेब
एक ओर जिला प्रशासन लगातार जिले में खाद की पर्याप्त मात्रा होने का दावा कर रहा है तो दूसरी ओर किसानों को खरीफ फसल के लिए यूरिया जैसी खाद उपलब्ध नहीं हो पा रही है नतीजतन किसान खाद के लिए दिन भर कतार में खड़ा रहने के लिए मजबूर है। सर्वाधिक फजीहत उन किसानों को हो रही है जो दूर-दराज के गांवों से खाद लेने के लिए जिला मुख्यालय पहुंच रहे हैं। ऐसे ही कतारबद्ध किसानों से जब स्टार समाचार ने चर्चा की तो उनका दर्द छलक उठा। किसानों ने बताया कि सुबह से आकर पहले टोकन लेना और फिर शाम तक खाद के लिए इंतजार करना, उनकी मुसीबतें बढ़ा रहा है।
प्रशासन का दावा, समितियों के पास 178 एमटी यूरिया
इधर जिला प्रशासन ने जिले में यूरिया के पर्याप्त स्टाक का वादा करते हुए आंकड़े जारी किए हैं। उप संचालक कृषि के अनुसार जिले की 14 पैक्स सोसायटी दलदल, नकैला, ओबरा, सोनवारी, लदबद, कोटा, मचखड़ा, पाथरकछार, पड़रौत, कौंहारी, बठिया, हिरौंदी, मनकीसर और हर्रई में 178.65 एमटी यूरिया उपलब्ध है। इसी प्रकार सतना और मैहर जिले की 47 प्राइवेट दुकानों तथा प्राइवेट होलसेलर के पास 693 एमटी यूरिया उपलब्ध होने का दावा किया गया है। इसके अलावा मार्किफेड के सतना, उचेहरा, शेरगंज, मैहर में 250 एमटी डीएपी उपलब्ध है। एक बड़ा सवाल यह है कि जब हर जगह प्रशासन खाद के स्टाक होने का दावा कर रहा है तो फिर किसानों को खाद वितरण केन्द्रों में लम्बी कतारों में लग कर खाद लेने के लिए क्यों बाध्य होना पड़ता है? माना जा रहा है कि खाद वितरण व्यवस्था पुख्ता न होने के कारण स्टाक होने के बावजूद किसानों को खाद के लिए परेशान होना पड़ता है।
रामनगर में संगीनों के साये में बटी खाद
रामनगर में खाद वितरण के दौरान हालात इस कदर बिगड़ गए कि वेयर हाउस के सामने किसानों की लगी कतार को नियंत्रित करने थाना प्रभारी विजय त्रिपाठी को पुलिस बल के समेत मोर्चा सम्हालना पड़ा। बताया जाता है कि पर्याप्त खाद के स्टाक के प्रशासनिक दावों के कार्यालय बाद खाद लेने के लिए रामनगर वेयर हाउस में किसानों की भीड़ उमड़ पड़ी जिससे खाद वितरण व्यवस्था लड़खड़ा गई। अंततः पुलिस के पहरे में खाद बांटी गई।
सरकारी गोदाम में पहुंच रहा किसान
किसान खाद के लिए सरकारी गोदामों के चक्कर लगाता है जबकि किसानों की सुविधा के लिए निजी खाद विक्रेताओं को भी खाद मुहैया कराई जाती है। अधिकांश किसानों का कहना है कि निजी दुकानों में न केवल खाद महंगी मिलती है बल्कि खाद के साथ-साथ दूसरे उत्पाद भी टिका दिए जाते हैं जिसके चलते किसान पहली प्राथमिकता सरकारी गोदाम की खाद को देता है नतीजतन सरकारी गोदामों में किसानों की कतार लगी नजर आती है।
खरीफ फसल में भी सरकार खाद उपलब्ध नहीं फसल में यूरिया की जरूरत आज है और मिलेगी 15 दिन बाद तो फिर उत्पादन कैसे बढ़ेगा?
शिवम तिवारी
सुबह से बैठे हैं और शाम तक टोकन नहीं मिला, खाद लेने के चक्कर में फसल की तकवारी करें या फिर लम्बी कतार में आए दिन लगते रहे। सरकार को पर्याप्त मात्रा में खाद समय पर उपलब्ध करानी चाहिए।
विद्याबाई
सुबह 10 बजे से लम्बी कतार में खड़े हैं लेकिन शाम 4 बजे तक टोकन नसीब नहीं हुआ, आज अगर टोकन मिलता है तो कल फिर खाद लेने आना पड़ेगा वो भी जितनी जरूरत है उतनी नहीं मिलेगी।
विजयभान सिंह
पिछले तीन दिन से खाद के लिए भटक रहा हूं, सरकारी गोदामों व सरकारी समितियों में खाद नहीं मिलती, बाजार में मिलती है तो वह औने-पौने दाम पर। सरकार की इन व्यवस्थाओं से कर्मठ किसान परेशान है।
शिवम सिंह बघेल


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