सतना जिले में सशस्त्र सेना झंडा दिवस के अंतर्गत अनुदान संग्रहण का लक्ष्य 13.55 लाख था, लेकिन 4 अगस्त तक केवल 3.77 लाख ही इकट्ठा हो सके। जिला प्रशासन, सीमेंट फैक्ट्रियां और स्मार्ट सिटी जैसी बड़ी संस्थाएं भी मदद से दूर रहीं। पुलिस, एसडीएम, सीईओ, सीएमओ तक ने सहयोग नहीं किया।

हाइलाइट्स
सतना, स्टार समाचार वेब
सशस्त्र सेनाओं से सेवानिवृत्त, शहीदों एवं घायल हुए सैनिकों एवं सैन्य कर्मियों के परिवारों के कल्याण के लिए आर्थिक मदद करने के मामले में जिले का प्रशासनिक अमला व संस्थाएं कंजूसी बरत रही हैं। यहां बात हो रही है 7 दिसम्बर सशस्त्र सेना झंडा दिवस के मौके से शुरू होने वाले अनुदान संग्रह की। 4 अगस्त तक की स्थिति की बात की जाए तो इस मामले में जिले में दिखावटी समाजसेवा कर वाहवाही लूटने वालों के हाथ उस वक्त तंग हो जाते हैं जब उन्हें वास्तव में समाजसेवा करने या आर्थिक मदद देने का मौका मिलता है। सतना में सशस्त्र सेना झंडा दिवस सात सितम्बर से शुरू किए गए अनुदान संग्रह की बात करें तो बीते चार अगस्त तक 13 लाख 55 हजार के लक्ष्य के मुकाबले मात्र 3 लाख 77 हजार 430 रुपए ही संग्रहित हुए हैं। जबकि 10 लाख 62 हजार 860 रुपए का संग्रहण बाकी है। सबसे बड़े दुर्भाग्य की बात तो यह है कि देश के जाबांज सैनिकों के परिजनों के कल्याण के लिए दिए जाने वाले इस अनुदान में अपनी सहभागिता निभाने में पुलिस कप्तान, सीईओ जिला पंचायत, नगर निगम आयुक्त, खनिज अधिकारी, आबकारी अधिकारी, एसडीएम, जनपद सीईओ, नगर पंचायत के सीएमओ तथा जिले की सीमेंट फैक्ट्रियों ने भी दूरी बनाए रखी है।
कुल मिलाकर सीमेंट फैक्ट्रियों, गैस एजेंसियों समेत 77 विभागों से इस राशि को संग्रहित करने का लक्ष्य रखा गया था लेकिन अब तक 19 विभागों द्वारा ही अनुदान दिया गया है। उसमें से कई विभाग ऐसे भी हैं जिन्होंने निर्धारित लक्ष्य से आधी या उससे कम राशि अनुदान स्वरूप दी है।
एक हजार करोड़ के बजट वाली स्मार्ट सिटी से नहीं मिले एक रुपए
सशस्त्र सेना झंडा दिवस के लिए स्मार्ट सिटी को भी 50 हजार रुपए का अनुदान देने का लक्ष्य दिया गया था, लेकिन लगभग 1000 करोड़ के करीब बजट वाली स्मार्ट सिटी से देश के जाबांज सैनिकों के परिजनों के कल्याणार्थ एकत्रित होने वाली इस राशि के लिए एक रुपए का भी अनुदान नहीं निकला। कुछ यही हाल नगर निगम कमिश्नर का भी रहा उन्हें भी 60 हजार रुपए अनुदान स्वरूप देना था लेकिन वहां भी हाथ खाली ही रहा।
दस से बीस हजार रुपए नहीं दे सके एसडीएम, सीईओ
अनुदान राशि जिले में किसको कितनी देनी थी, इसका एक लक्ष्य निर्धारित किया गया था। इसके तहत जिले के सभी एसडीएम व सभी जनपद पंचायतों के सीईओ व सीएमओ को भी लक्ष्य दिया गया था, लेकिन बैठकों व अन्य आयोजनों में लाखों खर्च करने वाले इन अधिकारियों से अनुदान स्वरूप एक रुपए नहीं निकले। जानकारी के मुताबिक सभी एसडीएम को 20 हजार और सभी जनपदों के सीईओ को दस-दस हजार अनुदान स्वरूप देना था लेकिन चार अगस्त की स्थिति में अभी तक एक रुपए का अनुदान इनके द्वारा नहीं दिया गया है। यही हाल जिले के सभी नगरीय निकायों के सीएमओ के हैं। इन्हें भी दस- दस हजार का अनुदान देना था लेकिन बिंरसिंहपुर सीएमओ समेत अब तक किसी ने फूटी कौड़ी नहीं दी है।
इन्होंने भी नहीं ढीली की जेब
कई बड़े शासकीय विभागों के अलावा जिन अन्य विभागों से सशस्त्र सेना झंडा दिवस का अनुदान नहीं मिला उनमें सामाजिक न्याय एवं नि:शक्त कल्याण विभाग, महिला एवं बाल विकास, मुख्य चिकित्सा अधिकारी, खाद्य एवं औषधि प्रशासन, नॉन कार्यालय, सिंचाई विभाग बाणसागर, जल संसाधन विभाग जवाहर नगर, वाणिज्य कर विभाग, उप संचालक किसान कल्याण तथा कृषि विकास, उप संचालक उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग, ग्रामीण यांत्रिकी सेवा, श्रम आयुक्त कार्यालय, महुआ कल्याण एवं मत्स्य विकास विभाग, वन विभाग, परियोजना क्रियान्वयन इकाई (पीआईयू), कृषि उपज मंडी, नियंत्रक नापतौल विभाग, उप संचालक पशु चिकित्सा सेवाएं, प्रदूषण नियंत्रण अधिकारी, पुरातत्व अभिलेखागार एवं संग्रहालय रामवन, वेयर हाउसिंग एंड लाजिस्टिक कार्पोरेशन, इंदिरा गांधी कन्या महाविद्यालय, शा. महाविद्यालय सतना, केन्द्रीय विद्यालय क्र. एक, जिला योजना एंव सांख्यिकी विभाग समेत कई अन्य विभाग व फैक्ट्रियां शामिल हैं।
जिला शिक्षा अधिकारी को सबसे ज्यादा लक्ष्य
जिला शिक्षा अधिकारी को अनुदान राशि देने का सबसे बड़ा लक्ष्य दिया गया है। उन्हें 1 लाख 50 हजार रुपए का लक्ष्य दिया गया था, इसके एवज में अब तक मात्र 30 हजार रुपए का अनुदान प्राप्त हुआ है। 1 लाख 20 हजार रुपए का अनुदान मिलना अब भी शेष है।
खनिज अधिकारी का भी हाथ तंग, आबकारी से भी नहीं आया पूरा पैसा
सैनिकों के परिवारजनों के कल्याण के लिए दी जाने वाली सहायता राशि के मामले में जिले के सबसे कमाऊ विभाग के मुखिया के हाथ भी तंग हैं। इस मामले में खनिज अधिकारी और आबकारी अधिकारी को पचास- पचास हजार रुपए देना था लेकिन खनिज अधिकारी का इस मामले में हाथ पूरी तरह से तंग है। उन्होंने अभी तक एक रुपए नहीं दिए हैं, आबकारी अधिकारी को 50 हजार रुपए देने थे लेकिन उन्होंने अभी तक मात्र 39 हजार दिए हैं उनका भी 11 हजार रुपए अभी बकाया है।
सीमेंट फैक्ट्रियां भी गंभीर नहीं
सामाजिक कार्यों में बढ़चढ़कर भाग लेने का दावा करने वाली सीमेंट फैक्ट्रियों में सीएसआर मद भी रहता है पर सैनिक परिवारों की मदद के मामले में जिले की फ ैक्ट्रियां भी काफी पीछे हैं। इन फैक्ट्रियों को अनुदान राशि देने का लक्ष्य तो दिया गया लेकिन ज्यादातर फैक्ट्रियों ने अनुदान राशि नहीं दिया और जिन्होंने दिया भी है वह भी आधा-अधूरा। इतना ही नहीं गैस एजेंसियों और केन्द्रीय विद्यालयों ने भी कोई गंभीरता नहीं दिखाई।
इन्हें था 50 हजार का लक्ष्य
(चार अगस्त की स्थिति में)


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