सतना में स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत बनाए जा रहे निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर बड़े सवाल उठ रहे हैं। रात में बनी डामर सड़क का सुबह उखड़ जाना नगर निगम और संविदाकारों की कार्यशैली पर गंभीर आरोप खड़े करता है। आठ करोड़ की स्टेशन रोड परियोजना से लेकर 10 करोड़ की डामरीकरण योजना तक सब पर भ्रष्टाचार और अनियमितता की गूंज।

प्रमुख बिंदु:
सतना, स्टार समाचार वेब
शहर में चल रहे निर्माण व विकास कार्यों में भ्रष्टाचार को लेकर भले ही आरोप लगते रहे हों पर यदि वह काम स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट का है तो उसमें भ्रष्टाचार होगा ही, इसकी बात की पूरी गारंटी। वैसे तो स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत शहर में कई ऐसे प्रोजेक्ट हैं जिन पर सवालिया निशान हैं। उन पर भ्रष्टाचार व अनियमितता के गंभीर आरोप हैं। अब तो हालात यह हैं कि जहां निर्माण व विकास कार्यों में स्मार्ट सिटी का नाम आता है वहां लोगों का साफ कहना होता है कि इस कार्य में तो भ्रष्टाचार की गारंटी है। जिसमें रात में डामर की सड़क बनी और सुबह सड़क की गिट्टियां निकल के बाहर आ गई हैं। बताया जाता है कि यह कार्य स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत स्टेशन रोड डेवलपमेंट प्रोजेक्ट के तहत कराया जा रहा है। इस संबंध में मिली जानकारी के मुताबिक लगभग आठ करोड़ रुपए की लागत से शहर में स्टेशन रोड (पुराने नगर निगम) से स्वामी चौराहा तथा प्रेम नर्सिंग होम से सर्किट हाउस चौक तक सड़क, नाली, सीवर डालने के लिए खोदी गई सड़क के रोड रेस्टोरेशन, पुलिया चौड़ीकरण एवं लाइट पोल का काम किया जाना था। इस कार्य के तहत शुक्रवार की रात प्रेम नर्सिंग होम से सर्किट हाउस चौक के रास्ते में डामर की सड़क बनाई गई। आरोप है कि रात में सड़क बनी और सुबह उसमें से गिट्टियां निकल कर बाहर आ गईं।
निगम की नाक के नीचे गुणवत्ताविहीन काम
शहर में चल रहे निर्माण कार्यों में भ्रष्टाचार आम बात हो गई है, पर भ्रष्टाचारियों के हौसले इन दिनों इतने बढ़ गए हैं कि वे नगर निगम की नाक के नीचे हो रहे काम में भी जमकर भ्रष्टाचार कर रहे हैं। नगर निगम कार्यालय से महज दो सौ मीटर दूर व्यंकट क्र. दो स्कूल के सामने रात में डामर हुई और सुबह उसमें गिट्टियां निकल आई। इससे साफ है कि डामरीकरण में कहीं न कहीं भ्रष्टाचार किया गया है। डामरीकरण के लिए तय किए गए मापदंडों का पालन नहीं किया गया तभी तो रात बीतते - बीतते सड़क के चीथड़े उड़ गए।
10 करोड़ में 35 किमी में बननी है डामर की सड़क
शहर में बन रही डामरीकृत रोड की बात करें तो बताया जाता है कि शहर के विभिन्न वार्डोंं में लगभग 10 करोड़ रुपए की लागत से 35 किमी डामर की सड़क बनाई जानी है। कई वार्डों में यह कार्य हो भी चुका है। जहां यह कार्य हो चुका है वहां भी गुणवत्ताविहीन कार्य की लगातार शिकायतें सामने आ रही हैं। जब अभी बरसात नहीं है तब भी डामर की सड़क का निर्माण होने के साथ ही उखड़ने लगी हैं तो उससे साफ है कि यह सड़क पहली बरसात भी नहीं झेल पाएंगी।
भ्रष्टाचारियों को निगम ने दे रखा है अभयदान
शहर में चल रहे निर्माण व विकास कार्यों में लगातार गुणवत्ताविहीन कार्य की शिकायतें सामने आती रहती हैं। कई बार महापौर, स्पीकर और नगर निगम आयुक्त स्वयं गुणवत्ताविहीन कार्य पकड़ चुके हैं, संबंधितों को चेतावनी भी दी जा चुकी है, निर्माण कार्य भी दोबारा कराया गया है बावजूद इसके गुणवत्ताविहीन कार्य पर अंकुश नहीं लग पा रहा है। बताया जाता है कि गुणवत्ताविहीन कार्य करने वाले संविदाकारों के खिलाफ कोई कड़ी कार्रवाई न होने से लगातार गुणवत्ताविहीन कार्य हो रहे हैं।
आधे इंजीनियर कर रहे ठेकेदारी तो कैसे कार्य में होगी गुणवत्ता
नगर निगम में नेता प्रतिपक्ष रावेन्द्र सिंह मिथलेश ने कहा कि निर्माण कार्यों की क्वालिटी को लेकर शुरू से ही गड़बड़ी चल रही है। काम की क्वालिटी से न तो इंजीनियर और न ही ठेकेदारों को कोई मतलब है, किससे शिकायत करें कोई सुनने वाला नहीं है। निर्माण कार्यों में गड़बड़ी हो भी क्यों न जब नगर निगम के आधे इंजीनियर स्वयं पर्र्दे के पीछे से ठेकेदारी करने लगे हैं। जब निर्माण कार्यों में इंजीनियर साइलेंट पार्टनर होंगे तो क्वालिटी कैसे आएगी? श्री सिंह ने कहा कि वे संविदाकार पर क्वालिटी के लिए दबाव नहीं डाल पाएंगे और शहर में चल रहे निर्माण कार्यों में यही हो रहा है।
निर्माण कार्यों में हो रही गुणवत्ता की अनदेखी
शहर में चल रहे निर्माण कार्यों को लेकर वार्ड क्र. 25 की पार्षद नम्रता सिंह का कहना है कि निर्माण कार्यों में गुणवत्ता का कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। संविदाकारों पर महापौर व निगमायुक्त मेहरवान हैें। इंजीनियरों को भी कार्य की गुणवत्ता से कोई लेना- देना नहीं। यही वजह है कि संविदाकार मनमानी कार्य कर रहे हैं। पार्षद श्रीमती सिंह ने कहा कि शहर में चल रहे निर्माण कार्यों की लोकायुक्त जांच कराई जानी चाहिए।


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