सतना जिले के उचेहरा तहसील से एक व्यक्ति का आय प्रमाण पत्र जारी हुआ, जिसमें वार्षिक आय शून्य रुपए दर्शाई गई। इसे सोशल मीडिया पर भारत का सबसे गरीब आदमी बताया जा रहा है। मामला सामने आने के बाद प्रशासन हरकत में आया और दूसरा प्रमाण पत्र जारी किया गया। इससे पहले कोठी तहसील में भी 3 रुपए की सालाना आय वाला प्रमाण पत्र जारी हो चुका है, जिससे सरकारी रिकॉर्ड की विश्वसनीयता पर सवाल उठे हैं।

सतना, स्टार समाचार वेब
जिले में एक अजीबो-गरीब मामला सामने आया है, जिसमें एक व्यक्ति की वार्षिक आय शून्य रुपए प्रमाणित की गई है। ऐसे में इसे भारत का सबसे गरीब व्यक्ति कहा जा सकता है। तहसीलदार कार्यालय उचेहरा से एक आय प्रमाण पत्र जारी हुआ है, जिसकी वार्षिक आय शून्य रुपए दर्ज की गई है। यह प्रमाण पत्र संदीप कुमार नामदेव पिता रामबहोर नामदेव निवासी अमदरी का है। जिसके नाम से प्रकरण क्र. आरएस /429/0111/22122/2025/बी-121/2025 के तहत 7 अप्रैल 2025 को जारी किया गया है। इसे प्राधिकृत अधिकारी रविकांत शर्मा द्वारा हस्ताक्षरित किया गया है। यह प्रमाण पत्र सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।
कठघरे में प्रशासन
इस मामले ने प्रशासन को कठघरे में खड़ा कर दिया है और अब यह जांच का विषय बन गया है कि किस स्तर पर यह चूक हुई। इससे पहले भी कोठी तहसील से एक व्यक्ति के नाम तीन रुपए की आय वाला प्रमाण पत्र वायरल हुआ था, जिससे तहसील की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हुए थे। स्थानीय नागरिकों और जनप्रतिनिधियों ने मामले की जांच और जिम्मेदारों पर कार्रवाई की मांग की है, ताकि भविष्य में ऐसी हास्यास्पद स्थितियों से बचा जा सके और सरकारी रिकॉर्ड की विश्वसनीयता बनी रहे।
अब सवाल उठ रहे हैं कि क्या वास्तव में किसी नागरिक की आय शून्य हो सकती है या यह किसी कर्मचारी की लापरवाही का नतीजा है।
जारी हुआ दूसरा प्रमाण पत्र
सोशल मीडिया में जीरो आय का प्रमाण पत्र वायरल होते ही प्रशासन हरकत में आया। आनन-फानन दूसरा आय प्रमाण पत्र जारी किया गया।सुधार कर जारी किए गए प्रमाण पत्र में संदीप कुमार नामदेव की बार्षिक आय 40 हजार रुपए दर्शाई गई। उल्लेखनीय है कुछ दिन पहले कोठी तहसील के नयागांव निवासी रामस्वरूप सिंह का आय प्रमाण पत्र सामने आया था, जिसमें वार्षिक आय 3 रुपए बताया गया था। यह प्रमाण पत्र कोठी तहसीलदार सौरभ द्विवेदी के हस्ताक्षर से जारी हुआ था,यह प्रमाण पत्र सोशल मीडिया में वायरल हुआ तो किसान रामस्वरूप सिंह का दूसरा आय प्रमाण पत्र जारी किया, जिसमें परिवार की वार्षिक आय 30 हजार बताई गई। कोठी तहसीलदार ने इस मामले को लिपिकीय त्रुटि बताया था।
कलेक्टर ने जारी किया नोटिस
कलेक्टर डॉ. सतीश कुमार एस ने सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे लोक सेवा केन्द्रों के माध्यम से जारी विसंगतिपूर्ण आय प्रमाण पत्रों को गंभीरता से संज्ञान में लिया है। उन्होंने तहसील कोठी और तहसील उचेहरा के जारी आय प्रमाण पत्रों में समाधान एक दिवस के लिए नियुक्त प्राधिकृत अधिकारियों तथा लोक सेवा केन्द्र संचालकों को कार्यवाही के लिए कारण बताओ नोटिस जारी किया है। कलेक्टर ने कहा है कि लोक सेवा केन्द्र के कर्मचारियों एवं प्राधिकृत अधिकारियों को लोक सेवा समाधान एक दिवस सेवा के संबंध में सेन्सेटाइज्ड करने प्रशिक्षण दिया जाएगा।
गलती छिपाने बगैर आवेदन के ही बना दिया 40 हजार की नया आय प्रमाण पत्र
बच्चों के एडमिशन, ईडब्ल्यूएस सर्टिफिकेट, बीपीएल राशन कार्ड व नौकरी के आवेदनों के अलावा विभिन्न हितग्राही योजनाओं का लाभ पाने के लिए आवश्यक माने जाने वाले आय प्रमाण पत्र कितनी लापरवाही से तैयार हो रहे हैं। 0 से 3 रूपए तक की सालाना आय के प्रमाण पत्र जारी करने वाला प्रशासन कटघरे में है। उपरोक्त मामले तो महज एक बानगी हैं, जानकारों की मानें तो यदि सतना में जारी हुए प्रमाण पत्रों की जांच हे तो संभवत: ऐसे कई मामले सामने होंगे जिनमे ऐसे आय प्रमाण पत्रों के जरिए योजनाओं का लाभ लिया जा रहा है। शासकीय योजनाओं के लाभ के लिए महत्वपूर्ण माने जा रहे आय प्रमाण को बनाने में किस तरह की प्रशासनिक लापरवाही बरती जा रही है इसके दो उदाहरण पिछले एक सप्ताह के अंदर सामने आ चुके हैं। एक मामला कोठी तहसील का दूसरा मामला उचेहरा तहसील का सामने आया है। पिछले एक सप्ताह के अंदर आय प्रमाण पत्र जारी करने के मामले में कोठी और उचेहरा में जिस तरह की विसंगतियां सामने आर्इं हैं उससे कहीं न कहीं प्रशासनिक लापरवाही साफ झलकती है।
मामला खुला तो दिखा दी 40 हजार की आय
किसी भी आवेदन को महीनों लटकाए रखने में माहिर जिले का प्रशासनिक अमला किसी मामले में इतनी तत्परता भी दिखा सकता है सहसा किसी को विश्वास नहीं होगा लेकिन उचेहरा में तीन माह के अंदर दो आय अलग-अलग आय का प्रमाण पत्र जारी करने वाले जिम्मेदारों ने तो बिना आवेदन के ही आवेदक को दूसरा प्रमाण पत्र जारी कर दिया। दरअसल, उचेहरा तहसील के अमदरी निवासी संदीप कुमार नामदेव ने आय प्रमाण पत्र बनाने का आवेदन दिया था जिस पर उन्हें शून्य सालाना की आय का प्रमाण पत्र जारी कर दिया गया। यह मामला जब सुर्खियों में आया तो पहला प्रमाण पत्र निरस्त करते हुए संदीप कुमार को दूसरा आय प्रमाण पत्र जारी कर दिया गया जिसमें उनकी सालाना आय 40 हजार रुपए दिखाई गई। संदीप का आरोप है कि उन्होंने दूसरे प्रमाण पत्र के लिए आवेदन ही नहीं किया है। इस संबंध में जब प्रशासन का पक्ष जानने के लिए उचेहरा तहसील की तहसीलदार से सम्पर्क किया गया तो उन्होंने फोन ही नहीं उठाया।
केस-1: उचेहरा तहसील के अमदरी निवासी संदीप कुमार नामदेव ने आय और जाति प्रमाण पत्र बनवाने का आवेदन दिया था। जिसमें से संदीप का जाति प्रमाण पत्र तो जारी नही हुआ लेकिन उनकी आय का प्रमाण पत्र 7 अपै्रल 2025 को जारी कर दिया गया जिसमें उनकी आय शून्य बताई गई। आरोप है कि सोमवार को मामला सोशल मीडिया में वायरल होने के बाद पूर्व के आय प्रमाण पत्र को निरस्त कर आनन- फानन में इसे बैक डेट में 15 जुलाई को नया आय प्रमाण पत्र 40 हजार रुपए की आय का जारी कर दिया गया।
केस-2: 22 जुलाई को कोठी तहसील के नयागांव निवासी रामस्वरूप पिता श्यामलाल को भी 3 रुपए की सालाना आय का प्रमाण पत्र जारी कर दिया गया। मामला सामने आने के बाद आय प्रमाण पत्र को बाद में निरस्त कर दिया गया।


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