सीधी जिले में आवारा पशुओं की बढ़ती समस्या से किसान बुरी तरह परेशान हैं। खरीफ सीजन की फसलें सुरक्षित रखने के लिए किसान दिन-रात खेतों में जागकर रखवाली कर रहे हैं। खेतों में तार और बाड़ा लगाकर सुरक्षा की कोशिशें की जा रही हैं, जिससे खेती की लागत और बढ़ रही है। सरकार से ठोस समाधान की उम्मीद अब भी अधूरी है।

हाइलाइट्स
सीधी, स्टार समाचार वेब
जिले में आवारा पशुओं की समस्या से किसान सबसे ज्यादा सांसत में हैं। खरीफ सीजन में बोनी के बाद अब फसलों की सुरक्षा करने के लिए दिन रात किसान खेतों में ही रहने के लिए मजबूर हो गए हैं। खेतों में खड़ी फसलों की सुरक्षा के लिए जिले भर में बाड़ा एवं तार लगाया जा रहा है। जिससे आवारा पशु खेतों के अंदर न आ सकें। चर्चा के दौरान कुछ किसानों ने बताया कि आवारा पशुओं का झुंड दिन के समय आसपास सडकों या अन्य स्थानों में मौजूद रहता है। रात होते ही आवारा पशुओं के झुंड खेतों की ओर कूच कर जाते हैं। जिन खेतों में बाड़ा कमजोर रहता है उसको एक ही झटके में तोड़ दिया जाता है और दर्जनों की संख्या में आवारा पशु खेतों के अंदर पहुंचकर फसलों को अपना ग्रास बना लेते हैं। इस तरह की समस्या कमोबेश जिले के सभी क्षेत्रों में बनी हुई है। आवारा पशुओं की समस्या को लेकर स्वयं किसान एवं पशुपालक जिम्मेदार हैं। अब जब खेती किसानी के कार्यों में आवारा पशु बड़ी समस्या बन चुके हैं ऐसे में सरकार को कोसने के काम चल रहा है। कोई भी ग्रामीण यह मानने को तैयार नहीं है कि सडकों में हजारों की संख्या में स्वच्छंद विचरण कर रहे आवारा पशु कभी न कभी उनके द्वारा ही अपने घरों में रखे गए थे। अब खेती के लिए ट्रैक्टर से जुताई एवं फसलों की कटाई के लिए आधुनिक मशीनों के आ जाने से पालतू पशुपालकों के लिए बड़े बोझ बन गए और उनके द्वारा उन्हें अपने घरों से खदेड़ दिया गया। चर्चा के दौरान कुछ प्रबुद्ध नागरिकों का कहना था कि सरकार द्वारा आवारा पशुओं की समस्या से निपटने के लिए कड़े कानून बनाए जाएं। जो भी पशुपालक इसके लिए जिम्मेदार हैं उनके विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जाए। जो पालतू पशु हैं उनका रजिस्ट्रेशन ग्राम पंचायत के माध्यम से करने की व्यवस्था बनाई जाए।
ऐरा के कारण खेती की बढ़ी लागत
पशुओं के ऐरा विचरण करने से किसानों के लिए वह सबसे बड़ी समस्या बन चुके हैं। कभी खेती-किसानी के कार्य में पशुओं की काफी मांग थी और वह काफी उपयोगी माने जाते थे। वर्तमान में खेती-किसानी का कार्य ट्रैक्टर एवं आधुनिक मशीनों से होने के कारण अधिकांश पालकों ने अपने पालतू पशुओं को आवारा छोंड़ दिया है। पालतू पशु अपने गांव एवं क्षेत्र में ऐरा विचरण करने के लिए मजबूर हैं। अब किसानों के समक्ष खेतों में बोई गई फसलों की सुरक्षा करना काफी चुनौती भरा कार्य साबित हो रहा है। आवारा पशुओं से खेतों को बचानें के लिए सभी किसान खेतों में बाड़ा लगाकर या फिर कंक्रीट तार लगाकर बैरीकेटिंग कर रहे हैं। जिससे आवारा पशु खेतों के अंदर आकर खड़ी फसलों को अपना ग्रास न बना सकें। फसलों की सुरक्षा के लिए संपन्न किसान तार एवं फेसिंग तार का उपयोग कर रहे हैं। इससे खेतों की सुरक्षा पर भी किसानों के ऊपर काफी भार बढ़ रहा है। किसानों को मालूम है कि आवारा पशुओं की समस्या का निराकरण इतनी जल्दी नहीं हो सकता। इस वजह से खेतों मेंं स्थाई रूप से मजबूत बैरीकेटिंग की जा रही है। इससे खेती के कार्य की लागत भी अब काफी बढ़ रही है। कुछ किसान खेतों की देख-रेख के लिए भी श्रमिकों की व्यवस्था बनाए हुए हैं। जिससे फसलों की पैदावार सुरक्षित रूप से मिल सके।
किसानों की समस्या का नहीं हो रहा निदान
जिले में आवारा पशुओं की समस्या से किसान सबसे ज्यादा सांसत में हैं। खासतौर से छोटे किसान इस समस्या को लेकर ज्यादा चिंतित हैं। उनको मालूम है कि आवारा पशुओं की समस्या जल्द दूर होने वाली नहीं है। इस वजह से खड़ी फसलों की देखरेख को लेकर सभी अपने स्तर से व्यवस्था बनानें में जुटे हुए हैं। कुछ किसान अपने खेतों में जहां बारी एवं कंटीले तारों की फिनिशिंग किए हुए हैं तो कई किसान रात-दिन खेतों की तकवारी के लिए बैठने को मजबूर हैं। किसानों को मालूम है कि यदि आवारा पशुओं का झुंड उनके खेतों में पहुंचा तो फसलों का बरबाद होना निश्चित है। आवारा पशुओं के झुड खेतों में मौजूद कुछ फसलों को चट कर जाएंगे तो कुछ को कुचलकर बरबाद कर देंगे। किसान काफी समय से इस आस में थे कि संभवत: शासन द्वारा आवारा पशुओं की समस्या को लेकर कोई बड़ा कदम उठाया जाएगा। यह समस्या पूरे देश के साथ ही प्रदेश एवं जिले में भी गंभीर रूप धारण कर चुकी है। इसका स्थाई निराकरण कैसे हो इसको लेकर सरकार भी काफी परेशान है। फिलहाल उक्त समस्या का निदान हो पाना संभव नजर नहीं आ रहा है।


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