सुप्रीम कोर्ट ने अरावली पहाड़ियों पर अवैध खनन को लेकर चिंता जताई है। CJI सूर्यकांत की बेंच ने एक्सपर्ट कमेटी बनाने और राजस्थान सरकार से अवैध खनन रोकने की गारंटी ली है। जानें पूरी खबर।

अरावली पर्वतमाला के संरक्षण को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को बेहद सख्त रुख अपनाया है। चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम. पंचोली की बेंच ने स्पष्ट किया कि कोर्ट की रोक के बावजूद अरावली में अवैध खनन जारी है। CJI ने चेतावनी देते हुए कहा, "अगर अवैध गतिविधियां इसी तरह चलती रहीं, तो हालात ऐसे हो जाएंगे जिन्हें भविष्य में सुधारा नहीं जा सकेगा।"
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने एक स्वतंत्र 'एक्सपर्ट कमेटी' गठित करने का निर्णय लिया है। यह कमेटी अरावली की परिभाषा, इसके वैज्ञानिक, पर्यावरणीय और भूवैज्ञानिक पहलुओं की समीक्षा करेगी। वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने भी कोर्ट में तर्क दिया कि हिमालय और अरावली जैसी पर्वतमालाओं की परिभाषा के पीछे ठोस विज्ञान होना चाहिए क्योंकि इनमें निरंतर टेक्टोनिक हलचल होती रहती है।
कोर्ट की सख्ती के बाद राजस्थान सरकार की ओर से एएसजी के.एम. नटराजन ने भरोसा दिलाया कि राज्य सरकार तुरंत यह सुनिश्चित करेगी कि अरावली क्षेत्र में किसी भी प्रकार का अवैध खनन न हो। कोर्ट ने पिछले आदेशों को जारी रखते हुए साफ किया कि फिलहाल किसी भी नई रिट याचिका पर विचार नहीं किया जाएगा।
गौरतलब है कि 20 नवंबर को सुप्रीम कोर्ट ने 100 मीटर से छोटी पहाड़ियों पर खनन की अनुमति दी थी, जिसे लेकर देशभर में विवाद खड़ा हो गया था। इसके बाद 29 नवंबर को कोर्ट ने अपने ही आदेश पर रोक लगा दी और केंद्र सहित चार राज्यों (राजस्थान, गुजरात, दिल्ली और हरियाणा) को नोटिस जारी किया था। कोर्ट का मुख्य उद्देश्य अब अरावली का पूर्ण संरक्षण सुनिश्चित करना है।
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