केंद्र सरकार ने नेशनल हाईवेज पर टोल टैक्स के नियम और सख्त कर दिए हैं। अब टोल नहीं चुकाने वाले वाहनों को एनओसी, फिटनेस सर्टिफिकेट और नेशनल परमिट जैसी मूलभूत सेवाएं नहीं मिलेंगी। यह बदलाव सेंट्रल मोटर व्हीकल्स रूल्स 2026 के तहत किए गए हैं। इसका मकसद इलेक्ट्रॉनिक टोल कलेक्शन मजबूत करना और टोल चोरी रोकना है।
By: Arvind Mishra
Jan 21, 202612:00 PM
नई दिल्ली। स्टार समाचार वेब
केंद्र सरकार ने नेशनल हाईवेज पर टोल टैक्स के नियम और सख्त कर दिए हैं। अब टोल नहीं चुकाने वाले वाहनों को एनओसी, फिटनेस सर्टिफिकेट और नेशनल परमिट जैसी मूलभूत सेवाएं नहीं मिलेंगी। यह बदलाव सेंट्रल मोटर व्हीकल्स रूल्स 2026 के तहत किए गए हैं। इसका मकसद इलेक्ट्रॉनिक टोल कलेक्शन मजबूत करना और टोल चोरी रोकना है। दरअसल, कई बार एनएच के टोल प्लाजा पर गाड़ी का फास्टैग स्कैन होने पर टेक्नीकल खराबी की वजह से टोल टैक्स नहीं कट पाता। फास्टैग में बैलेंस कम होने पर भी गाड़ियां टोल क्रॉस कर जाती हैं। अब ऐसे वाहनों की बकाया राशि गाड़ी के रिकॉर्ड से जुड़ जाएगी। नए नियमों के लागू होने के बाद, अगर किसी गाड़ी पर टोल का बकाया मिलता है, तो उसकी सभी प्रमुख सेवाएं रोक दी जाएंगी। यही नहीं,गाड़ी के रिकॉर्ड से टोल बकाया जुड़ने की प्रक्रिया पूरी तरह से डिजिटल और आॅटोमेटेड होगी।
टोल प्लाजा पर लगा सेंसर-कैमरा
जैसे ही गाड़ी किसी टोल प्लाजा से गुजरती है, वहां लगा आरएफआईडी रीडर फास्टैग को स्कैन करता है। अगर फास्टैग में बैलेंस कम है या वह ब्लैकलिस्टेड है, तो सिस्टम तुरंत उस गाड़ी के रजिस्ट्रेशन नंबर को रिकॉर्ड कर लेता है। भविष्य में आने वाले मल्टी-लेन फ्री फ्लो सिस्टम में तो बैरियर भी नहीं होंगे, वहां हाई-डेफिनिशन कैमरे सीधे नंबर प्लेट की फोटो खींच लेंगे। टोल प्लाजा का सर्वर यह जानकारी नेशनल इलेक्ट्रॉनिक टोल कलेक्शन को भेजता है, जिसे एनपीसीआई मैनेज करता है। यहां से पता चलता है कि किस बैंक के फास्टैग से पैसा कटना था और क्यों नहीं कटा।
वाहन पोर्टल के साथ डेटा सिंक
सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने अपने वाहन डेटाबेस को टोल कलेक्शन सिस्टम के साथ सिंक कर दिया है। जैसे ही कोई टोल अनपेड रह जाता है, एनपीसीआई उस डेटा को मंत्रालय के सर्वर पर भेज देता है। वहां गाड़ी के इंजन नंबर और चेसिस नंबर के आधार पर उस बकाया राशि को डिजिटल रिकार्ड में जोड़ दिया जाता है।
बिना बैरियर के होगी टोल वसूली
सरकार का यह कदम भविष्य में शुरू होने वाले मल्टी-लेन फ्री फ्लो टोलिंग सिस्टम के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस सिस्टम में हाईवे पर कोई फिजिकल टोल प्लाजा या बैरियर नहीं होगा। गाड़ियां तेज रफ्तार में हाईवे से गुजरेंगी और लगे हुए कैमरे और सेंसर अपने आप टोल काट लेंगे। इससे टोल प्लाजा पर लगने वाली लंबी कतारें खत्म हो जाएंगी और ईंधन की बचत होगी। चूंकि बिना बैरियर के टोल वसूली में कोई गाड़ी को मौके पर रोक नहीं पाएगा, इसलिए सरकार ने इसे गाड़ी के कागजों से जोड़ दिया है ताकि लोग खुद ही समय पर भुगतान करें।
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